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76 साल की खूनी रंजिश फिर ‘मैदान’ पर

Hardoi Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई-पाली। पाली पंचायत अध्यक्ष के दो दावेदारों के बीच 76 वर्ष की रंजिश के बाद एक बार फिर उनके आमने सामने होने से सनसनी मची हुई है। दोनों पक्षों से अभी तक सात हत्याएं हो चुकी हैं। बीच में शांती बनी रही, पर पुरानी रंजिश और चुनाव में भी आमने सामने होने से किसी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है। शनिवार की रात दोनों पक्षों के आमने सामने आने के बाद हुए बवाल ने आशंका को मजबूत कर दिया है। बवाल के बाद रविवार को माहौल शांत रहा।
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पाली के कमलाकांत बाजपेई और हरीप्रसाद शुक्ला परिवार के बीच 76 वर्ष से रंजिश चली आ रही है। अब तक शुक्ला परिवार के चार और बाजपेई परिवार से संबंध रखने वाले तीन लोगों की हत्याएं हो चुकी हैं। 1936 से रंजिश शुरू हो गई थी। 1936 में मिट्ठूलाल बाजपेई पहलवान ने फब्तियां कसने पर गुरुसहाय शुक्ला पहलवान का पैर तोड़ दिया था। 1938 में मिट्ठूलाल के करीबी दृगपाल त्रिवेदी ने गुरुसहाय शुक्ला की ग्राम गुटकामऊ में हत्या कर दी थी। 1944 में बाजपेई खानदान के रिश्तेदार खनिकलापुर निवासी छुटकुन पांडेय की शुक्ला खानदान ने हत्या कर दी थी। जिसके बाद 1954 में दृगपाल की ग्राम बेगराजपुर में हत्या कर दी गई। इसमें गंगा शुक्ल, सत्यदेव, रतीराम, रामकरन व बालकराम नामजद किए गए थे।
1965 में स्वतंत्रता सेनानी व तत्कालीन चैयरमैन प्रभूदयाल बाजपेई की शाहाबाद में हत्या कर दी गई थी। इस घटना के बाद शुक्ला परिवार के सत्यदेव शुक्ल की 1969 में पाली बाजार में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में ब्रजकिशोर, रामानंद, लक्ष्मीकांत बाजपेई, जगदीश नारायण बाजपेई को नामजद किया गया था। 1970 में हत्याकांड का बदला लेने को शुक्ला परिवार ने जगदीश नारायण बाजपेई पर गोलियां बरसाईं, जिससे वह गंभीर घायल हो गए थे। 1974 में बाजपेई परिवार ने शुक्ला परिवार पर गोलियां बरसाईं जिसमें रामनिवास शुक्ला घायल हो गए थे। जिसके बाद 1975 में रामनिवास शुक्ला की उनके दरवाजे पर हत्या कर दी गई थी।
इस घटना का बदला लेने को कमलाकांत बाजपेई के शाहाबाद से आते समय गोली मार दी गई थी, पर वह बच गए थे। बदला लेने को कमलाकांत के भाई लक्ष्मीकांत बाजपेई ने 1983 में हरिनिवास शुक्ला पर गोलियां बरसाईं थी। इसके बाद रंजिश शांत रही। वर्ष 08 में लक्ष्मीकांत बाजपेई की संदिग्ध मौत हो गई, जिसमें दूसरे पक्ष के लोग नामजद किए गए थे। इसके बाद से खून खराबा शांत हो गया था। दोनों पक्ष अपने अपने कारोबार में लग गए। एक चुनाव में तो अप्रत्यक्ष रूप से हरीनिवास शुक्ला ने कमलाकांत की मदद भी की थी, पर नगर पंचायत चुनाव में कमलाकांत बाजपेई व हरीनिवास शुक्ला उर्फ बांके आमने सामने हैं। शनिवार की रात दोनों पक्षों के आमने सामने आ जाने पर जमकर फायरिगं भी हो गई थी।
इस घटना में कोई हताहत नहीं हुआ, पर जिले में सनसनी फैला दी है और चुनाव के दौरान किसी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है। शनिवार की रात हुए बवाल के बाद एएसपी प्रदीप गुप्ता पीएसी के साथ मौके पर पहुंचे थे। पुरानी रंजिश और दोनों पक्षों के चुनाव में आमने सामने होने से सनसनी फैली हुई है।

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