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विद्युत संकट पर जर्जर यंत्रों की ‘छौंक’

Hardoi Updated Fri, 22 Jun 2012 12:00 PM IST
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सवायजपुर (हरदोई)। तहसील क्षेत्र में लोगों को विद्युत आपूर्ति मुहैया कराने को चार विद्युत सब स्टेशन बने हैं, इसके बावजूद आपूर्ति सुधरती नजर नहीं आ रही। आए दिन लोक ल फाल्ट और अघोषित कटौती से लोग आजिज आ गए हैं।
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सवायजपुर, पाली, अनंगपुर व पलिया के बाशिंदों को बिजली मुहैया कराने को 33/11 केवी के सब स्टेशन हैं। इसमें सवायजपुर में आपूर्ति को पांच केवीए का पावर हाउस है, पर यहां भैलामऊ, पांडेयपुर, सहिजना के फीडर अलग-अलग न होने से बिजली की समस्या है। विगत 10 वर्षों से यहां लाइनों व पोलों की मरम्मत का कोई भी कार्य नहीं किया गया। डिमांड के बावजूद क्लैंप, इंसुलेटर तथा 40 पोल नहीं मिले। कसबे में नए कनेक्शन हो रहे हैं, पर एलटी लाइन विहीन होने से आपूर्ति नहीं हो पा रही है। नकटौरा गांव में मुख्य मार्ग पर पोल टूट गया, जिसे एक माह बाद भीे ठीक नहीं किया गया। उपकेंद्र पर स्टाफ के नाम पर जेई वीके रस्तोगी, पीयूष व सुरेश क र्मचारी तैनात है।
उपकेंद्र का सरकारी मोबाइल फोन खराब होने से लोगों को शिकायतें करने में दिक्कतें आ रही है। उधर, उपकेंद्र पाली में जर्जर विद्युत लाइनें काफी समय से न बदलने से फाल्ट होने पर आपूर्ति ठप हो जाती है। यहां के जेई महेंद्र के पास अनंगपुर पावर हाउस का भी चार्ज है। अनंगपुर में विद्युत लाइन पेड़ों के नीचें से होकर गुजरी हैं, जिससे आए दिन फाल्ट हो जाते हैं। ज्ञात हो कि मन्नापुरवा, सांडी से क करा होते हुए सवायजुपर तथा ककरा से उपकेंद्र पालिया लाइन जोड़ी गई है, वहीं सवायजपुर से पाली, अनंगपुर आपूर्ति दी जाती है। ऐसे में सवायजपुर या अनंगपुर में उपकेंद्रों में खराबी आने से सभी पावर हाउसों में आपूर्ति बाधित हो जाती है।
उधर, सरकार द्वारा 14 घंटे आपूर्ति के दावे भी यहां खोखले साबित हो रहे है। गत 4 मई को मात्र तीन घंटा, पांच को साढ़े तीन घंटा, छह को चार घंटा आपूर्ति मिल सकी। श्रीमऊ में मंजूरी के बाद 132 केवी पावर हाउस का निर्माण अधर में लटका है। उधर, कसबे के सीएचसी पर तीन फेस आपूर्ति न आने से पानी की टंकी सूखी है और मोटर आदि न चलने से पेयजल का संकट है। चिकित्सक डा. आनंद पांडेय ने तहसील दिवस पर कई बार शिकायत की, पर समस्या का निस्तारण नहीं हो सका, जबकि मरीज व तीमारदार यहां लगे हैंडपंप से दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
उधर, जर्जर तार व जर्जर विद्युत उपकरणों पर ज्यादा लोड पड़ते ही उपकेंद्र ठप होने से बिजली संकट बढ़ जाता है। करीब दो सैकड़ा गांवों में राजीव गांधी विद्युतीकरण योजना से बिजली दी जा रही है। इसका भी भार इसी उपकेंद्र पर पड़ रहा है। वहीं 132 केवी पावर हाउस बनने पर ही लोड की समस्या से निजात मिलेगी, पर इस पावर हाउस के लिए अभी भूमि तक नहीं मिल सकी है।
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