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अब बस! मौला मेघ दे, पानी दे...

Hardoi Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। इस बार आषाढ़ माह में बारिश न होने से किसानों में चिंता के भाव है। धान की फसल करने वाले किसानों में धान की पौध बनाने को लेकर असमंजस है। अगर अगले 7 दिनों में बारिश न हुई तो धान की पौध समय से कैसे तैयार हो पाएगी। अगर बारिश के मामले में ऐसे ही हालात रहे तो पौध तैयार होने में विलंब होने के साथ धान की रोपाई कार्य भी पिछड़ जाएगा, जिससे धान का उत्पादन प्रभावित होगा।
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खरीफ की फसलों में यहां प्रमुख रूप से धान की फसल होती है। एक दशक से यहां हर वर्ष औसतन तीन से सवा तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल होती है, जिससे धान के उत्पादन में जिला अग्रणी बनने की राह पर है और यहां धान का अच्छा उत्पादन होने से पिछले एक दशक में धान मिलों की संख्या दो सौ का आंकड़ा पार गई है। कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में धान का औसतन उत्पादन 32 से 40 कुंतल प्रति हेक्टेयर है और पिछले साल करीब 85 लाख कुंतल धान का उत्पादन हुआ था।ज्ञ् ात हो कि हर साल किसान जून माह में धान की पौध तैयार करने का काम शुरू कर देते है और करीब 50 प्रतिशत किसान 20 जून तक धान की पौध बनाने को खेतों में बुआई कर देते हैं।
कृषि वैज्ञानिकोें के अनुसार, धान की पौध बनाने को आदर्श समय 7 से 20 जून तक रहता है और 21 से 25 दिनों में धान की पौध तैयार हो जाती है और 15 जुलाई से किसान धान की तैयार पौध की रोपाई का काम शुरू कर देते हैं, पर अबकी पौध तैयार करने के मामले में मौसम का रुख काफी सख्त हैं। एक ओर जहां बारिश नहीं हो रही, तो दूसरी ओर तेज धूप से पारे का स्तर भी 41 से 45 डिग्री के औसत पर चल रहा है। ऐसे में पौध बनाने का काम शुरू नहीं हो पा रहा है। बारिश में ज्यादा विलंब होता है तो पौध बनाने के साथ ही रोपाई कार्य में देरी होगी जिससे उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
प्री मानसून की बारिश न होने तथा तापमान का स्तर 40 डिग्री के ऊपर रहने से नगरों से लेकर गांवों में पशुओं के लिए हरे चारे का संकट गहराने लगा है। धूप इतनी तेज हो रही कि किसान पशुओं के हरे चारे को बरसीम आदि की बुआई नहीं कर पा रहे और ऐसे में ज्यादातर किसान पशुओं को गेहूं की फसल का भूसा आदि ही खिला पा रहे है। उधर, खरीफ की फसलों के लिए हरी खाद बनाने का भी कार्य नहीं हो पा रहा है। अब किसान बारिश होने का इंतजार कर रहे हैं।
इंसेट---
बोले, जिम्मेदार---
‘जिला कृषि अधिकारी अमर सिंह कहते हैं कि अबकी प्रीमानसून की बारिश न होने से खरीफ फसलों की तैयारियां पिछड़ रही है। बुआई आदि में विलंब होने से उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पड़ता है। ऐसे में किसानों का चिंतित होना स्वाभाविक है, पर उम्मीद है कि 20 से 22 जून तक मानसून आ सकता है और उसके बाद तैयारियां तेजी पकड़ेगी। अभी धान की पौध बनाने के लिए बहुत बिलंब नहीं हुआ है।’
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