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मां की कोख में दम तोड़ रही ‘ममता’

Hardoi Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। मां की कोख में ही ममता का गला घोंटा जा रहा है। बिना किसी खता के दुनिया में आने से पहले ही नन्हीं सी जानों को उन्हें लाने वाले ही समाप्त कर रहे हैं। जिले में हर साल सैकड़ों भ्रूणों को गर्भ में ही समाप्त कर दिया जाता है। जिला महिला अस्पताल के प्रसवोत्तर केंद्र पर हर माह भारी संख्या में हो रहे गर्भपात इसकी पोल खोल रहे हैं।
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सरकारी आंकड़ों में ही हर साल एक से डेढ़ हजार भ्रूण हत्याएं हो रही हैं, तो निजी और ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पतालों की हालत क्या होगी। नियमों की आड़ में रजामंदी से गर्भस्थ भ्रूण में खामी दिखाकर धड़ल्ले से गर्भ में ही उसे खत्म करा दिया जाता है। गर्भस्थ भ्रूण हत्या की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हालांकि शासन प्रशासन स्तर से भ्रूण हत्या को लेकर कड़े कदम उठाए गए हैं, पर अब नियमों की आड़ में यह काम शुरू हो गया है। सरकारी अस्पतालों और निजी अस्पतालों में गर्भस्थ भ्रूण में की समय सीमा या खामी दिखाकर मां की कोख में ही उसका गला घोट दिया जाता है। जिले में बढ़ रहीं भ्रूण हत्याओं की पोल जिला महिला अस्पताल के प्रसवोत्तर केंद्र पर हर माह होने वाले गर्भपात खोल रहे हैं।
केंद्र पर हर माह औसतन 100 से 150 गर्भपात कराए जा रहे हैं। केंद्र में नियमानुसार दो माह के अनचाहे गर्भ का समापन कराने या फिर गर्भस्थ भ्रूण के खराब होने से मां का जीवन बचाने को गर्भपात कराने की व्यवस्था है, पर व्यवस्था की आड़ में धड़ल्ले से मां की कोख में ही ममता का गला घोंटा जा रहा है। महिला अस्पताल के प्रसवोत्तर केंद्र के आंकड़ों में वर्ष 09 में 1098 गर्भपात कराए गए। वर्ष 10 में 1219, वर्ष 11 में 1295 और वर्ष 12 में यह संख्या और अधिक बढ़ती जा रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी तक 515 गर्भपात हो चुके हैं। जिसमें जनवरी में 116, फरवरी में 91, मार्च में 108, अप्रैल में 70 और मई में 130 गर्भपात कराए जा चुके हैं।
हालांकि यह सब वह गर्भपात बताए जा रहे हैं जो दो माह से कम या मां की कोख में ही खराब हो चुके होते हैं, पर असलियत में क्या होता है यह किसी से छिपा नहीं है। जब जिला महिला अस्पताल में ही हर साल सैकड़ों की संख्या में गर्भपात हो रहे हैं तो निजी व ग्रामीण क्षेत्रों की हालत क्या होगी। जानकारों का कहना है कि कोई भी महिला दो माह का अनचाहा गर्भ समापन करवा सकती है, पर भ्रूण में खामी दिखाकर अधिक समय का भी गर्भपात करा दिया जाता है। कभी गर्भस्थ भ्रूण की वृद्धि तो कभी उसकी गति और कभी उसके निर्जीव होने की बात कहकर गर्भपात कर दिया जाता है। गर्भ समापन के नियमानुसार गर्भस्थ भ्रूण की जांच के बाद ही गर्भपात कराया जाना चाहिए।
इसके पहले गर्भवती महिला की सारी जांचें अल्ट्रासाउंड व अन्य जांचों के बाद भी यह होना चाहिए, पर ऐसा कुछ नहीं होता हैै। उधर, जिला महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. रंजना श्रीवास्तव के अनुसार केंद्र पर नियमानुसार गर्भपात कराया जाता है। कोई महिला दो माह तक के अनचाहे गर्भ का समापन करवा सकती है और उन्हीं का गर्भ समापन कराया जाता है। उन्होंने बताया कि अगर किसी महिला के गर्भ में उसका भ्रूण खराब हो जाता है और जहर फैलने की आशंका होती है, तो महिला व उसके परिजनों की मर्जी के बाद गर्भपात या प्रसव करवा दिया जाता है। उन्होंने अस्पताल में नियमों के विपरीत गर्भपात की बात से इनकार किया।
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इशारों में गर्भस्थ भ्रूण की मिलती जानकारी
हरदोई। जिले में बढ़ रही गर्भपात की संख्या चिंता का विषय है और जानकार कहीं न कहीं इसे कन्या भ्रूण हत्या से भी जोड़ कर देख रहे हैं। जानकारों का कहना है छोटे अस्पतालों या क्लीनिक पर अल्ट्रासाउंड खोल कर जांच की आड़ में खेल होता है और इसके लिए विशेष इंतजाम हैं। जांच तो भ्रूण के स्वास्थ्य और गतिविधि की होती है, पर उसी की आड़ में लिंग भी पता कर लिया जाता है और उसे इशारों इशारों में बता भी दिया जाता है। जैसे कि अगर गर्भस्थ भ्रूण लड़का है तो कभी मुस्कान तो कभी बधाई या मिठाई खिलाने की बात कह कर इशारों इशारों में बता दिया जाता है और अगर लड़की है तो उसके भी कोड निर्धारित है, जैसे कि घर में माता लक्ष्मी आएंगी, तो क भी देवी जी का आगमन हो रहा है आदि से बता दिया जाता है।

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