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कैसे हो इलाज जब अस्पताल ही बीमार

Hardoi Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। ग्रामीण क्षेत्रों के सरकारी अस्पताल खुद ही बीमार हैं। डॉक्टरों की कमी है, संविदा डॉक्टरों और कर्मियों का नवीनीकरण नहीं हुआ। ऐसी हालत में ग्रामीण क्षेत्रों के अस्पतालों में कहीं फार्मेसिस्ट दवा कर रहे, तो कहीं आशा बहुएं प्रसव करा रही हैं। केंद्र से एनआरएचएम के बजट जारी होने के बाद भी नवीनीकरण को हरी झंडी न मिलने से जहां डॉक्टर और कर्मचारी अपनी नौकरी खोजने लगे हैं, वहीं ग्रामीणों के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आ रहा है।
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स्वास्थ्य विभाग में डॉक्टरों और कर्मियों की कमी चली आ रही है। तैनाती के सापेक्ष डॉक्टरों और फार्मेसिस्ट, स्टाफ नर्स और एएनएम की कमी है। कमी को दूर करने को एनआरएचएम में संविदा पर डॉक्टरों और कर्मियों की तैनाती हुई थी। जिला, महिला अस्पताल, सात सीएचसी, 12 पीएचसी व 45 न्यू पीएचसी पर संविदा डॉक्टरों और कर्मियों की तैनाती हुई थी, जिसमें सात एएनएम, 14 स्टाफ नर्स 14 महिला डॉक्टर, पांच पुरुष एमबीबीएस व एक महिला एमबीबीएस डॉक्टर के साथ ही 30 आयुष डॉक्टरों को संविदा पर अलग-अलग अस्पतालों में भेजा गया था। 31 मार्च को सभी की संविदा समाप्त हो गई। हालांकि संविदा नवीनीकरण की आस में 15 अप्रैल और कुछ ने अप्रैल अंत तक काम किया।
पर, धीरे-धीरे संकट के बादल छाते गए और डॉक्टरों व कर्मियों ने काम करना बंद कर दिया। ऐसी हालत में न्यू पीएचसी में कहीं तो केवल सफाई कर्मचारी ही रह गए हैं, तो कुछ में फार्मेसिस्ट दवाई दे रहे हैं। पीएचसी पर महिला डॉक्टरों की तैनाती न होने से आशा बहुएं प्रसव करा रही हैं। पिछले कई माह से समस्या से परेेशान ग्रामीणों को अफसरों के आश्वासन पर बजट पास होने पर संविदा नवीनीकरण होने की आस थी, पर उस पर भी पानी फिर गया। विभागीय जानकारों के अनुसार 17 मई को केंद्र से प्रदेश को धनराशि जारी कर दी गई। अरबों की धनराशि में अन्य सभी मदों को तो पैसा भेजा गया है, पर संविदा डॉक्टरों और कर्मियों के नवीनीकरण की कोई व्यवस्था नहीं है।
ऐसी हालत में डॉक्टरों और कर्मियों ने नौकरी खोजना शुरू कर दिया है, तो ग्रामीणों के भी अरमानों पर पानी फिर गया है। उधर, सीएमओ डॉक्टर अनुराग भार्गव ने बताया कि शासन को पत्र लिखे जा रहे हैं। उन्होंने नवीनीकरण की उम्मीद जताई है, पर कहा कि जब तक शासन स्तर से हरी झंडी नहीं मिल जाती, तब तक नवीनीकरण नहीं होगा। उन्होंने बताया कि डॉक्टरों और कर्मियों की कमी होने के बाद भी व्यवस्था का संचालन कराया जा रहा है।

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