ऐसे तो नहीं हो पाएगा पर्यावरण का संतुलन

Hardoi Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। पिछले वर्षों की तरह एक बार फिर 5 जून का विश्व पर्यावरण दिवस पर गोष्ठियां होने के साथ ही भाषणों एवं विचार व्यक्त करने का सिलसिला चलेगा और फिर अगले वर्ष तक मामला जस का तस रह जाएगा, जबकि वास्तव में अगर हम पर्यावरण को लेकर अभी न चेते तो गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
नगर हो या गांव हर जगह प्रदूषण बढ़ रहा है, जिससे लोगों को बीमारियों के रूप में गंभीर संकटों का सामना करना पड़ रहा है। हमारा पर्यावरण किस कदर असंतुलित होता जा रहा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पक्षियों का अस्तित्व ही समाप्त होता जा रहा है। घर-घर में दाना चुगने वाले गौरैया एवं घोसले बनाने वाले कबूतरों की गुटर गू, चिड़ियों की चहचहाहट तथा कौओं की कांव-कांव और कोयल की सुरीली आवाज के साथ ही कठफुडवा चिड़िया गुजरे जमाने की बात हो चुकी है। पेड़ों पर चल रही लगातार कुल्हाड़ी एवं नदियों में बढ़ते प्रदूषण तथा गांव-गांव पहुंची मोबाइल टावरों के रेडिएशन तथा हाई वोल्टेज लाइनों ने हमारे पर्यावरण मित्रों को इस संसार से गायब ही कर दिया है।
ऐेसे में हमारा पर्यावरण कैसे संतुलित हो इसको लेकर जागरूक होना जरूरी है। वन विभाग औसतन हर वर्ष 5 से 7 लाख पौधे रोपित कराता है। इसमें 25 से 30 फीसदी पौधे सूख जाते हैं और शेष जो वृक्ष बनते हैं, उससे कहीं ज्यादा वृक्ष हर साल कट जाते हैं। पर्यावरण संतुलन के लिए महती जरूरत वाले जल संचयन के मुख्य वाहक कुएं एवं तालाब पट चुके हैं। जिले की कुल 1101 ग्राम पंचायतों में औसतन हर गांव में 10 से 12 कुएं 4 से 5 ढकुली और दो से तीन चरख एवं 6 से 8 तालाब हुआ करते हैं, मगर अब इनकी संख्या काफी कम हो गई है। मनरेगा योजना ने तालाबों को बचाने का प्रयास तो किया है, पर रखरखाव के अभाव में अभी भी तालाबों की उपयोगिता पूरी तरह से नहीं हो पा रही है।
नारा तो सभी लोग देते हैं कि एक वृक्ष को काटने को पहले चार वृक्षों को लगाकर सींचना चाहिए, मगर ऐसा हुआ होता, तो शायद जिले में अब तक ग्रीन बेल्ट हो गई होती। पता नहीं ग्रीन हरदोई का सपना पूरा होगा भी या नहीं, पर अगर पर्यावरण को लेकर हम न चेते तो लोगों ने प्राण वायु आक्सीजन का भी संकट गहरा जाएगा।
उधर, पर्यावरण संतुलन को कुल क्षेत्रफल के मुकाबले 30 से 33 फीसदी वन एवं हरियाली क्षेत्र होना जरूरी मानते हैं, पर जिले में कुल क्षेत्रफल के मुकाबले वन एच बागवानी हरियाली क्षेत्रफल महज साढ़े तीन प्रतिशत है। जिले का कुल क्षेत्रफल लगभग 6 लाख हेक्टेयर है और वन तथा बागवानी हरियाली क्षेत्र करीब सवा दो लाख हेक्टेयर है।
कुछ लोग ऐसे भी हैं जो जगा रहे अलख
हरदोई। नदियों में प्रदूषण रोकने को जन जागरण अभियान शुरू करने वाले गंगा एक्शन परिवार के जिला संयोजक सरोज दीक्षित कहते हैं कि नदियों को प्रदूषण मुक्त बनाने को हर स्तर पर संघर्ष करेंगे। प्रसिद्ध नेचेरोपैथ डॉ. राजेश मिश्र ने जिले को गोद लेकर गांव-गांव पर्यावरण एवं स्वास्थ्य मित्र बनाने की परिकल्पना को साकार करने का संकल्प लिया है। सामाजिक कार्यक र्ता मुरलीधर गुप्ता प्रदूषण रोकने को लोगों के बीच देहदान करने के प्रति अलख जगा रहे है। सामाजिक कार्यकर्ता सत्यवीर प्रकाश आर्य, इंजी टीपी सिंह तथा राधेश्याम कपूर सहित अन्य कई लोग पर्यावरण संरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक रहने का आह्वान कर रहे हैं।

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