देनदारी के नीचे दबीं समितियां

Hardoi Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। जिले दुग्ध व्यवसाय के प्रति अलख जगाने वाली दुग्ध उत्पादन सहकारी समिति देनदारियों के पहाड़ के नीचे दब गई हैं, जिसके कारण जहां दुग्ध उत्पादन विकास योजना पर ब्रेक लग गया है, वहीं कर्मचारियों को वेतन के लाले पड़े है। इतना ही नहीं किसानों का लगभग सवा करोड़ रुपए बकाया हो जाने के कारण कभी 40 हजार लीटर तक प्रतिदिन दूध खरीद करने वाली समिति का दुग्ध व्यवसाय 6 हजार प्रतिदिन लीटर पर आ गया है।
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देनदारियों का मकड़जाल कुछ ऐसा बना कि अगर समिति को सरकारी सहायता न मिली तो तालाबंदी की भी नौबत आ सकती है। हालांकि, समिति के कर्मचारियों के साथ ही किसानों को भी भरोसा है कि सरकारी सहायता मिलेगी और देनदारियां खत्म होने के साथ ही जिले में फिर से दुग्ध विकास योजना रफ्तार पकड़ लेगी।
ज्ञात हो कि 1980 के दशक में बिलग्राम तहसील क्षेत्र में किसानों को दुग्ध उत्पादन व्यवसाय के प्रेरित करने वाली सहकारी समिति ने दो हजार लीटर दूध से 40 हजार लीटर दूध प्रतिदिन खरीदने का सफर तय कर गांवों में किसानों के लिए दुग्ध उत्पादन व्यवसाय को आय का प्रमुख जरिया बना दिया था।
खरीद सेंटरों पर पारदर्शिता रखने एवं किसानों को समुचित मूल्य मुहैया कराने को समिति ने अब तक 98 स्थानों पर आटोमेटिक मिल्क कलेक्शन सेंटर स्थापित करने के साथ ही 18 स्थानों पर बल्क मिल्क कूलिंग यूनिटें भी लगाई गई। हजारों किसानों के रोजी रोटी का जरिया बनी समिति किसानों को प्रतिदिन दूध का लगभग 21 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से खरीदती हैं, मगर पिछले 6 वर्षों से समिति को विकास मद में पैसा न मिलने एवं तथा दूध लेने वाली संस्था पराग में पैसा फंसने के कारण देनदारियां होने लगी और हालत यह हुई कि पैसे के अभाव में दुग्ध विकास योजना की रफ्तार को थम गई है।
साथ ही समिति की देनदारियां लगातार बढ़ती गई जिससे किसानों का भी काफी पैसा बकाया हो गया और समिति को दूध मिलना लगातार कम होता गया। आलम यह है कि आज समिति पर किसानों का करीब 1 करोड़ 19 लाख एवं कर्मचारियों का वेतन एरियर आदि का एक करोड़ 40 लाख सहित करीब पौने तीन करोड़ की देनदारियां हैं और ऐसे में समिति का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
इस बाबत समिति के वरिष्ठ प्रबंधक एससी सिंह कहते हैं कि यह सही है कि देनदारियां काफी बढ़ गई हैं, मगर सरकार सहायता राशि का आवंटन किया जा रहा है। इसके साथ ही पराग डेयरी पर बकाया चल रहे धनराशि के मिलने की संभावना है। ऐसे में जल्द ही देनदारियां को चुकता करने के साथ ही दुग्ध विकास योजना को जिले में भर रफ्तार देने का प्रयास किया जाएगा।
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