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कटौती से बढ़ी लोगों की प्यास

Hardoi Updated Sun, 03 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। जिले में बिजली की घोषित और अघोषित कटौती से जहां लोगों का चैन छिन गया है, वहीं पेयजल व्यवस्था भी चरमरा गई। ऐसे में खराब हैंडपंपों से भी पानी का सहारा छिन गया है। समय पर पानी न मिलने से नौकरीपेशा वालों की भी दिनचर्या बिगड़ने लगी। उन्हें एक दिन पहले भरे गए पानी से ही गुजारा करना पड़ रहा है। जिन पालिकाओं में जनरेटर से पानी की सप्लाई देने की व्यवस्था है, वहां पर टिल्लू पंप न चलने से लोगों को पेयजल मुहैया नहीं हो पा रहा है।
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युवाओं ने कहा कि सीएम लैपटॉप और कंप्यूटर देने का दावा कर रहे हैं, पर वह तभी चलेंगे, जब बिजली मिल सकेगी। सदर पालिका क्षेत्र में बिजली की कटौती से सुबह 5 से 9 होने से लोगों को टंकी का पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है। इसके चलते छत पर रखी टंकी में भरे गर्म पानी से उन्हें गुजारा करना पड़ रहा है। जिसका असर लोगों के कामकाज पर पड़ रहा। बिलग्राम क्षेत्र में सुबह शाम होने वाली बिजली की अघोषित कटौती से पालिका प्रशासन जनरेटर चलवाकर नलकूप चलवाता है, पर ऊंचे स्थानों पर बसे खतराना, रफैयतगंज आदि मोहल्लों में पानी नहीं पहुंचता। जिन मोहल्लों की लाइन में पानी पहुंच रहा, वहां बगैर टिल्लू पंप के घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा। संडीला क्षेत्र में सुबह शाम होने वाली कटौती से लोग आजिज आ चुके है। समय पर पानी न मिलने से नौकरी करने वाले लोगों को कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है। पोस्ट आफिस में तैनात सुधीर कुमार का कहना है कि उन्हें नहाने को ताजा पानी नहीं मिलता। रीरू ने बताया कि सुबह जल्दी जाने से टंकी के गर्म पानी से ही नहाना पड़ता है। वार्ड 8 के मोहम्मद खालिद ने बताया कि समय पर पानी न मिलने से दिनचर्या बिगड़ गई है। वार्ड 22 के सलीमुद्दीन व प्रभात अस्थाना ने कहा कि पिछले कई दिनों से पानी नसीब नहीं हो रहा, जिससे उनकी कामकाज की दिनचर्या गड़बड़ा गई। अतरौली के लालपुर फाटक के जीतेंद्र दीक्षित, प्रह्लाद खेड़ा के गुड्डू तिवारी, भटपुर के विमलेश तिवारी ने कहा कि बिजली न आने पर उनके नलकूप बंद पड़े हैं, जिससे फसल सूख रही हैं। जब कभी रात में बिजली मिलती है, तो उन्हें रात में ही सिंचाई को खेत पर जाना पड़ता है। शाहाबाद के एमबीए के छात्र मनोज त्रिवेदी ने कहा कि बिजली कटौती से सारे कामकाज प्रभावित हो रहे हैं। ऐसे में सीएम लैपटॉप व कंप्यूटर देने की बात कर रहे हैं, वह तभी चल सकेंगे, जब बिजली मिलेगी। बीकाम के छात्र धीरेंद्र रस्तोगी व बीए के छात्र हिमांशु गुप्ता ने कहा कि सुबह शाम हैंडपंप से पानी लेते लेते वह परेशान हो गए है। कहा कि पालिका के पास जनरेटर नहीं है, जिससे पेयजल समस्या रहती है। यदि जनरेटर की सुविधा हो तो कम से कम लाइन से पानी मिल सकता है। उधर, जिले की चार चीनी मिलें अपनी जरूरत के अनुसार बिजली का उत्पादन कर लेती है। इनमें दो मिलें 40 मेगावॉट कारपोरेशन के माध्यम से जिले में देती हैं, पर सीजन ऑफ होने पर मिले बंद हो गई, जिससे बिजली का संकट और गहरा गया। राइस मिल, दुग्ध प्लांट, अन्य लघु उद्योग बिजली आपूर्ति पर निर्भर है। राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने बताया सीजन पर यदि कटौती होती है, जो मिलर्स को नुकसान उठाना पड़ता है।

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