समर्थन मूल्य 1285, बाजार भाव 1050!

Hardoi Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। जिले का गेहूं बाजार काफी ठंडा पड़ा हुआ है। आलम यह है कि एक ओर जहां सरकारी खरीद अप्रैल से समर्थन मूल्य 1285 रुपए प्रति कुुुुुंतल पर हो रही, तो बाजार में गेहूं का भाव पिछले काफी समय से 1 हजार से 1050 रुपए प्रति कुंतल के आस पास चल रहा है, जिससे ज्यादातर किसानों के लिए फसल की लागत निकालना मुश्किल हो रहा, क्योंकि 85 फीसदी किसान आम बाजार में ही गेहूं बेचने को मजबूर रहते हैं।
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गेहूं खरीद को खुले बाजार में बड़ी कंपनियों एवं व्यापारियों के न आने से यहां गेहूं का बाजार पूरी तरह से स्थानीय व्यापारियों के हवाले है। इनमें से कुछ लोग ऐसे भी हैं, जो बाजार को मंदा देख बड़े पैमाने पर गेहूं की खरीद कर भंडारण कर रहे हैं, ताकि बाजार उठने पर ज्यादा लाभ कमाया जा सके। पिछले साल की अपेक्षा इस बार बाजार कुछ ज्यादा ही ठंडा चल रहा है। गत वर्ष जब गेहूं की सरकारी खरीद समर्थन मूल्य एवं बोनस के साथ 1170 रुपए प्रति कुंतल की दर से हो रही थी, तो बाजार 1100 रुपए प्रति कुंतल के ऊपर तक पहुंच गया था, पर अबकी बाजार ठंडा पड़ा हुआ है। ज्ञात हो कि जिले में करीब साढ़े तीन लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल हुई है और करीब 35 से 38 कुंतल प्रति हेक्टेयर की दर से उत्पादन हुआ है। गेहूं की फ सल करने वाले छोटे मझोले एवं बड़े तथा बंटाई पर खेती करने वाले किसानाें की संख्या 2 लाख है। सरकारी खरीद में 10 से 15 फीसदी किसानों को ही लाभ मिल पाता है, जबकि 85 फीसदी किसान खुले बाजार में बेंचते हैं। इनमें भी करीब 55 फीसदी किसान ऐसे होते हैं, जो 5 से 10 कुंतल गेहूं बेंचते हैं, जिन्हें ग्राम व्यापारी खरीद लेते हैं और उन किसानों को 9 सौ से साढ़े नौ सौ रुपए प्रति कुंतल का ही मूल्य मिल पाता है। एक बात साफ है कि सरकारी गेहूं खरीद का लाभ मिलना छोटे किसानों के लिए महज दिवास्वपभन है और बाजार में भी उन्हें वाजिब कीमतें न मिलने से किसान आंसू बहाने को विवश हो जाता है। उधर, सरकारी गेहूं खरीद योजना में भुगतान की हालत काफी खराब है। क्रय एजेंसियों ने किसानों को गेहूं लेने के बाद भुगतान की एकाउंट पेयी चेकें तो दे दी हैं, पर एजेंसियों के क्रय केंद्रों के खातों में पैसे ही नहीं है। ऐसे में किसानों को मिली गेहूं भुगतान की चेकें बाउंस हो रही हैं, जिससे किसान परेशान हैं। किसानों को करीब 10 करोड़ रुपए कई क्रय एजेंसियों पर बकाया है और उन्हें भुगतान नहीं मिल पा रहा है। इस बाबत गेहूं खरीद की नोडल एजेंसी के डिप्टी आरएमओ ने कहा कि एजेंसियों को एफसीआई से भुगतान मिलने में देरी होने से ऐसा हुआ है। अभी एफसीआई से सात करोड़ रुपए मिले हैं, जिनको एजेंसियां खातों में भिजवा रही है। जल्द ही भुगतान मिलना शुरू हो जाएगा।
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