विज्ञापन

मां! तू है तो कोई गम नहीं

Hardoi Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
ख़बर सुनें
हरदोई। ऊपर जिसका अंत नहीं, उसे आसमां कहते हैं, जिसके प्यार का अंत नहीं उसे मां कहते हैं...। इन्हीं कुछ भावों को लेकर जिले भर में रविवार को मातृत्व दिवस मनाया गया। किसी ने अपनी मम्मी को गिफ्ट देकर तो किसी ने प्यारी साड़ी देकर उन्हें मातृत्व दिवस की बधाई के साथ उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर की।
विज्ञापन
मां से अमूल्य कुछ नहीं है। जितने शब्द भी अपनी मां के लिए लिखे जाए शायद ही नहीं यकीनन वह कम पड़ जाएंगे। कहना गलत न होगा कि जननी मां का स्थान भगवान तुल्य ही होता है। जिसे मां का आशीर्वाद मिलता है कामयाबी उसके कदम चूमती है। हर व्यक्ति के जीवन में मां का प्यार व दुलार नहीं होता। यह भी बड़ी ही किस्मत वालों को मिलता है। बहरहाल रविवार को मातृत्व दिवस जिले में बड़े ही उत्साह पूर्वक मनाया गया। गिफ्ट कार्नर पर भी उपहार लेने को युवा दिखाई दिए। मातृत्व दिवस की बधाई देने वाले कार्डों की भी मांग रही तो इसके साथ ही साड़ी की दुकानों पर भी लोग जुटे दिखाई दिए। दुकानदार आशू गुप्ता का कहना है कि कइयों के मुंह से एक ही बात निकली कि मां के लिए एक अच्छी सी साड़ी देना। शिक्षिका अर्चना तिवारी का कहना है कि मां की ममता तो असीमित है, तो उनके लिए हमारा आदर क्यों एक ही दिन सीमित कर दिया जाता है। हम चाहे तो हर दिन को अपनी मां के लिए महत्वपूर्ण बना सकते हैं। वह तो उनके जीवन की हर राह पर आने वाली मुश्किलों पर खड़ी नजर आती है तो उनका सम्मान एक ही दिन क्यों। वह तो इस दिन भी और बाकी के 364 दिन भी अपनी मां के ही नाम करना चाहती हैं। इसी तरह शहर के विष्णुपुरी निवासी पीयूष मिश्र का कहना है कि मां के प्यार के आगे सभी पकवान बेकार हैं। जब कभी भी वह बाहर कहीं जाते हैं तो होटलों पर सभी पकवान नजर आते हैं, लेकिन फिर भी मां के हाथों की दाल की उन्हें बहुत याद आती है।
ममता से भर उठती राखी जब अरणी बोलती ममम...
हरदोई। मासूम होठों से मां शब्द का पूरा संबोधन नहीं, बल्कि सिर्फ मम शब्द सुनने को ही जो वर्षों से बेताब कहें या फिर तड़पते रहे, आज उनको यह खुशी मिलती है। फिलहाल अपनी बेटी अरणी के साथ मां राखी का पहला मातृत्व दिवस उसी को गोद में लेकर उसे दुलार करते ही गुजरा। जिलाक्रीड़ाधिकारी अनिमेष सक्सेना व उनकी पत्नी राखी के पास सब कुछ था, पर मां राखी के पास यदि कुछ नहीं था तो मां होने का सुख व किसी नन्हें की घर में किलकारी सुनने का सुख। वर्षों तक भगवान ने उन दोनों की मनोकामनाओं को नहीं सुना, पर बीते कुछ महीनों पहले ही इस दंपति ने एक बच्ची को गोद लेकर न सिर्फ एक मिशाल बनाई, बल्कि अपने घर अरणी के रूप में खुशियों का खजाना ले आए। पहले मातृत्व दिवस पर बच्ची के साथ मां के होठों पर खुशियां बिखरते नजर दिखाई दी।
पहले दिया जन्म, 32 साल बाद लड़ रही जंग
हरदोई। उसकी हर परीक्षा जैसे, उसकी अपनी परीक्षा होती है। मां एक पल के लिए भी दूर होती है तो जैसे, कहीं कोई अधूरापन सा लगता है। हर पल मानों एक सदी सा महसूस होता है, वाकई मां का कोई विस्तार नहीं, मेरे लिए तो मां से बढ़कर कुछ नहीं...। यह शब्द व भावनाएं हैं, जिले के एक कैंसर पीड़ित बेटे की अपनी मां के प्रति। उसकी के मातृत्व की शक्ति व उसकी ममता को महसूस कर पीड़ित बेटा आज अपने आप को मौत से एक बार फिर दूर अपने आप को खड़ा पा रहा है। न्यू सिविल लाइंस निवासी कैंसर पीड़ित अजीत और उसकी मां शिवकली अमर उजाला के प्रयास व जिले के कुछ समाजसेवियों के सहयोग से फिर से जीने की ललक जाग उठी है। इलाज शुरू होने के बाद डॉक्टरों को कुछ सार्थक परिणाम मिले हैं, जिसके बाद अजीत ठीक हो सकता है, पर अब भी उसे पैसों की जरूरत है। जन्म देने के 32 साल बाद भी मां अपने बच्चे के प्राणों के लिए किस तरह उतावली है और मातृत्व की ्शक्ति से उसमें दोबारा प्राण फूंकने की पुरजोर कोशिश कर रही है, उसको देखकर ही मातृत्व शक्ति का अहसास हो जाता है।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Kanpur

पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर अनशन पर बैठे वकील, कर दी ये घोषणा

पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 144 दिन से महोबा जिले में शहर के आल्हा चौक में चल रहे अनशन में सहयोग देने के लिए रविवार को जिले के अधिवक्ता भी अनशन पर बैठ गए।

18 नवंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

रेलवे ट्रैक पर काम कर रहे थे 4 कर्मचारी, अचानट आई ट्रेन ने कुचला

रेलवे प्रशासन की लापरवाही के चलते अब हरदोई में चार गैंनमैन की जान चली गई। ट्रैक पर पटरियों की मरम्मत की जा रही थी मगर तभी अचानक अकाल तख्त एक्सप्रेस ने चार गैंनमैन को कुचल दिया। इस घटना ने रेलवे प्रशासन को कठघरे में खड़ा कर दिया।

6 नवंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree