उपेक्षा का दंश झेल रहीं नर्सें

Hardoi Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। आधुनिकता की आंधी में नर्सिंग सेवा भी प्रभावित हुई है। फिर भी तमाम मुश्किलों के बाद भी नर्र्सें अपना काम कर रही हैं। समाज में आए बदलाव से अपने ही जख्म दे रहे हैं, पर नर्सें आज भी उन जख्मों पर मरहम लगा रही हैं। उसके बाद भी उन्हें वह सम्मान नहीं मिल रहा, जिसकी वह हकदार हैं। शनिवार को नर्स डे था, सम्मान तो दूर किसी ने सम्मान का एक फूल तक नहीं दिया।
नर्सें समर्पण भावना से मरीजों की सेवा कर उनके स्वास्थ्य की कामना करती हैं, जब सगे संबंधी हाथ नहीं लगाते तो नर्स ही जख्मों पर मरहम लगाती हैं, पर उसके बाद भी उन्हें सम्मान की नजर से नहीं देखा जाता है। जिला अस्पताल की आकस्मिक चिकित्सा कक्ष में तैनात सिस्टर मुन्नी देवी का यही कहना है। नर्स उर्मिला शर्मा के अनुसार समाज में बदलाव आया है, सब कुछ बदल गया, पर नर्सें अपना काम कर रही हैं। नर्सेज संघ की जिलाध्यक्ष रीता सिंह के अनुसार नर्सें मरीजों की सेवा में किसी भी प्रकार की कमी नहीं रखती। परिवार के लोग नहीं खड़े होते, पर नर्स मरीज का हाथ पकड़ती, पर उसके बाद भी मरीज या तीमारदार सम्मान नहीं देते। आज जब नर्सों की कमी है और एक-एक नर्स पांच-पांच का काम कर रहीं, पर उसके बाद भी उसे नजरंदाज किया जाता है। नर्स पुष्पा सिंह के अनुसार, आज भी नर्स के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। हां मरीज और तीमारदार जरूर बदलते जा रहे हैं। शनिवार को नर्स दिवस पर उनका कहना था कि उनके लिए क्या नर्स दिवस उन्हें तो रोजाना वही काम करना है। हालांकि कहीं न कहीं उनके दिल में इस बात का मलाल दिखा, कि गैर तो गैर विभाग के अपनों ने भी उनकी कोई खैर नहीं ली।

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