जारी रहेगी मजदूर हितों की लड़ाई

Hardoi Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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हरदोई। मंगलवार को विश्व मजदूर दिवस पर बीएसएनएल और बैंक कर्मचारियों की संयुक्त तत्वावधान में एक बैठक हुई। इसमें पहली मई 1886 को शिकागो में मजदूरों के अहिंसक आंदोलन पर अमेरिकी सरकार की बर्बरता की निंदा की गई। कर्मचारियों ने मजदूर दिवस पर शहीदों को नमन कर उनको श्रद्धांजलि दी और मजदूरों के हितों के लिए लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया।
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सिविल लाइन स्थिति भारत संचार निगम लिमिटेड के एक्सचेंज पर मजदूर दिवस पर गोष्ठी हुई। बैंक व बीएसएनएल कर्मियों के संयुक्त तत्वावधान में हुई बैठक की अध्यक्षता करते हुए जिला सचिव वाईपी गुप्ता ने मई दिवस पर शहीद हुए मजदूरों को श्रृद्धांजलि दी। कर्मचारी शिवमंगला प्रसाद दीक्षित ने कहा कि 1886 में शिकागो में चल रहे मजदूरों के अहिंसक आंदोलन पर अमेरिका सरकार ने बर्बरता पूर्वक गोली चलवाई थी जिसमें सैकड़ों मजदूर शहीद हुए थे। उनकी कुर्बानी को याद कर आज सभी को मजदूरों के हितों की लड़ाई का संकल्प लेना होगा। जिला सचिव ने कहा कि सरकार की उदारीकरण नीति एवं विश्व बैंक के दबाव में मजदूर संगठनों को सताया जा रहा है। इसलिए कर्मचारी संगठनों को अब एक बैनर के नीचे लड़ने की आवश्यकता है। यूपी बैंक एसोसिएशन के लीडर आरके पांडेय ने कहा कि सभी मजदूर संगठनों को अब एक जुट होकर सरकार की नीतियों के विरुद्ध आवाज उठानी होगी। कहा कि आज बीटेक, एमबीए व पीएचडी युवक कारपोरेट जगत के पूंजीपतियों के हाथ 12 से 18 घंटे काम करने को मजबूर हैं। इसका प्रमुख कारण संसाधनों का अभाव है। युवाओं को जागरूक होना होगा। सभा में महमूद अली, सुभाष चंद्र, कैलाश बाबा आदि ने भी संबोधित किया। गोष्ठी में जेपी दीक्षित, मंशाराम, प्रहलाद दीक्षित, बृजनाथ, प्रेम कुमार गुप्ता, मासूम अली, राकेश चंद्र मिश्रा, रऊफ व उदय पाठक आदि मौजूद रहे। उधर, माकपा कार्यालय पर संतोष वर्मा ने मजदूर दिवस पर कहा कि मजदूर वर्ग के क्रांतिकारी आंदोलन के फलस्वरूप दुनिया के मजदूरों को दिन में 8 घंटे काम करना तय हुआ। उसके पूर्व श्रमिकों को 18 घंटे काम करना पड़ता था। इस मौके पर यदुनाथ प्रसाद, नन्हें शर्मा, कृपा सिंधु, प्रभात, सुनील कुमार आदि मौजूद रहे। इधर, विचार गोष्ठी में रूकमंगल सिंह ने कहा कि जन सामान्य मजदूरों की समस्याओं, शोषण आदि के मामले में सहयोगात्मक रुख अपनाए। सुनील कुमार ने कहा कि देश में बाल मजदूरों की संख्या दिनों दिन बढ़ती ही जा रही है। होटलों, ढाबों, कारखानोें में बाल श्रमिकों को शोषण किया जा रहा है। सरकार को कानून बनाकर इस पर अंकुश लगाना चाहिए। रामशरण तिवारी, राकेश शुक्ला, जितेंद्र सिंह, ईशान तिवारी, कुलदीप शर्मा, मिथिलेश शुक्ला आदि ने भी विचार रखे।
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