टूटी आस, नहीं रहा योजनाओं पर विश्वास

Hardoi Updated Fri, 06 Jun 2014 05:32 AM IST
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हरदोई। जनता से सीधे जुड़ी केंद्र सरकार की तमाम योजनाओं पर लापरवाही की धूल जम चुकी है। गत सरकार ने योजनाओं का संचालन तो किया, पर उनको आगे नहीं बढ़ाया। कई ऐसी योजनाएं जो लागू हुईं, पर बाद में बजट के अभाव में या फिर स्वीकृति को संघर्ष करती रहीं, जबकि कुछ योजनाओं पर जिम्मेदारों ने ही लापरवाही बरती, काम पूरा नहीं हो सका, जिससे योजना का फायदा लोगों को नहीं मिल सका। केंद्र की पिछली सरकार में गरीबाें के लिए आवास योजना, राशन कार्डों के कंप्यूटरीकरण योजना सहित बच्चों को शिक्षित करने की योजनाएं चलीं, जिन पर सरकार की उदासीनता और जिम्मेदारों की लापरवाही का ग्रहण लग चुका है। अब सरकार बदली, तो योजनाओं का भविष्य बदलेगा, इसको लेकर जनता के मन भी कई प्रश्न हैं। लोग विचार कर रहे कि क्या इन योजनाओं के भी अच्छे दिन आएंगे। केंद्र सरकार से संचालित कुछ और योजनाओं पर विशेष रिपोर्ट।
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योजना एक :-
छत मिली नहीं, मिले आश्वासन
गरीब आवास विहीनों को एक अदद छत मुहैया कराने को केंद्र सरकार ने तमाम योजनाएं संचालित कीं, पर आज भी जरूरतमंद पालिथीन के नीचे जीवन काट रहे हैं। शहरी क्षेत्र में रहने वालों के लिए केंद्र सरकार ने राजीव गांधी आवास योजना शुरू की। डूडा से संचालित योजना में पांच लाख से ज्यादा आबादी वाले शहर में गरीबों को आवास बनाने को पांच लाख और पांच लाख से कम आबादी वाले नगर में चार लाख रुपये से आवास बनाने की योजना बनी। सरकार ने योजना से संबंधित एक प्रारूप जारी किया और ईओ से पात्रों की सूची मुहैया कराने के निर्देश दिए। ईओ ने पात्रों का चयन कर रिपोर्ट भेज दी, पर दोबारा इस योजना के लिए बजट आना तो दूर प्रस्ताव को भी मंजूरी नहीं दी गई। अफसर लक्ष्य और गरीब आवास का ही इंतजार करते रह गए।
योजना दो :-
परिवर्तित नहीं हुए शुष्क शौचालय
हरदोई। नगरीय विकास अभिकरण (डूडा) से एक अन्य योजना शुष्क शौचालयों को जल प्रवाहित शौचालयों में परिवर्तित करने की योजना बनी। जिस पर काम शुरू हुआ सर्वे कराया गया। केंद्र सरकार ने लाखों रुपये भी खर्च कर डाले, पर शहर व नगरीय क्षेत्रों में तमाम ऐसे शौचालय हैं, जो योजना में शामिल हुए, पर वह जल प्रवाहित में परिवर्तित नहीं हो सके। शौचालयों का सर्वे करने में लापरवाही पर एफआईआर कराने के भी निर्देश दिए गए, पर स्थिति यह है कि लोग लाभ भी नहीं ले सके और योजना बंद हो गई।
योजना तीन:-
बालिकाएं भी नहीं बनीं आत्मनिर्भर
हरदोई। सर्व शिक्षा अभियान के अंतर्गत सरकार बच्चों को पढ़ाने के साथ उन्हें आत्म निर्भर भी करना चाहती है। इसके लिए बालिकाओं को व्यावसायिक शिक्षा देने का फैसला किया गया। कागजी घोड़े तो बहुत दौड़ाए गए, पर नतीजा सिफर रहा। सर्व शिक्षा अभियान में जिले में कुल 3993 स्कूल हैं, जिनमें आने वाले करीब छह लाख बच्चों को निशुल्क पाठ्य पुस्तक व ड्रेस देने का दावा किया गया, पर सरकार द्वारा खर्च किए जा रहे करोड़ों रुपयों का हश्र क्या है, यह किसी से छिपा नहीं है। कुछ सरकार तो कुछ जिम्मेदारों की लापरवाही से अब स्कूल सिर्फ मिड-डे मील बंटने तक ही सीमित होकर रह गए। पढ़ाई के नाम पर स्कूल एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहे हैं।
योजना चार:-
भूख की आग से छटपटाया इंसान
हरदोई। केंद्र सरकार की सार्वजनिक वितरण प्रणाली तो सबसे ज्यादा भ्रष्टाचार और अनियमितता में डूबी है। नियमित अनाज, चीनी और मिट्टी का तेल न मिलने से आए दिन प्रदर्शन हो रहे, पर सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार नहीं हुआ। हालांकि, सरकार ने अब सार्वजनिक वितरण प्रणाली में सुधार लाने को कंप्यूटरीकरण का आदेश दिया और राशन कार्डों की फीडिंग कर आनलाइन करने के निर्देश दिए। योजना में पारदर्शिता से काम करने और वित्तीय वर्ष 13-14 के अंतर्गत ही काम समाप्त करने के निर्देश दिए। जिले के कुल 7,96,961 राशन कार्डों को फीड किया जाना है, जिसमें 6,81,890 राशन कार्ड सूचनाओं के साथ प्राप्त हुए हैं और इसके सापेक्ष 6,06,940 राशन कार्ड फीड किए गए, जबकि अभी तक एक भी राशन कार्ड आन लाइन जारी नहीं हुआ है।
योजना पांच :-
अंधेरे में प्रसव, कागजाें पर ठीक
हरदोई। स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने को प्रदेश सरकार पर तो ज्यादा जिम्मेदारी रहती है, पर कुछ योजनाओं से केंद्र सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा दे रही है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन योजना के अंतर्गत लोगों को अस्पताल की सेवाएं लेने को तमाम योजनाओं से प्रेरित कर रही, पर हकीकत तो यह है कि जिला अस्पताल को छोड़कर जिले के तमाम सीएचसी में अंधेरे में प्रसव कराए जा रहे हैं। जिले के स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय वर्ष 13-14 के दौरान कुल 51,219 प्रसव कराए गए जिसमें से सरकारी इकाइयों में सिर्फ 2,609 प्रसव हुए हैं। गैर प्राधिकृत निजी अस्पतालों में 299 व संस्थागत प्रसव 2908 कराए गए। स्वास्थ्य उपकेंद्र पर 432 प्रसव और प्राधिकृत स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ 99 लाभार्थियों ने लिया। हालांकि इस दौरान कुल 86 मातृ मृत्यु ही बताई गईं।
योजना छह :-
सभी हाथ में नहीं पहुंचे स्मार्ट कार्ड
हरदोई। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना को केंद्र सरकार ने इस उद्देश्य से शुरू किया कि बेहतर इलाज का फायदा उन लोगों को भी मिले, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में 30 रुपये जमा कर एक स्मार्ट कार्ड बनाया जाता है। इस कार्ड से तीस हजार रुपये तक के इलाज का भुगतान सरकार करेगी। योजना के अंतर्गत बीपीएल परिवारों में स्मार्ट कार्ड बनाए जाने थे, पर सभी को इसका लाभ नहीं मिल सका। जिले में 3,52,986 बीपीएल परिवार हैं। इसमें से 1,33,221 लोगों को ही स्मार्ट कार्ड जारी हुए हैं। प्रीमियम राशि प्राप्त स्मार्ट कार्ड सिर्फ 228 ही हैं। जिनके कार्ड बने भी हैं, उन्हाेंने इलाज तो कराया, पर अब संस्थाओं को भुगतान के लिए दौड़ना पड़ रहा है। वित्तीय वर्ष 13-14 के दौरान कुल 951 लोगों ने स्मार्ट कार्ड से इलाज कराया। इसका क्लेम 72.552 लाख रुपये बना, पर सरकार ने सिर्फ 65.96 लाख का ही भुगतान किया।
योजना सात:-
आसरा योजना भी कर गई बेसहारा
हरदोई। केंद्र सरकार ने कम आबादी वाले नगरीय क्षेत्रों में भी आवास योजना को शुरू किया। आसरा योजना में भी गरीबों को आवास देने को योजना संचालित हुई, पर गरीबों की सिर पर छत नहीं बन सकी। योजना से जिले में 22.705 करोड़ की लागत से 522 आवास बनाए जाने थे, जिनके सापेक्ष अभी प्रगति पूरी तरह से शून्य है। डूडा द्वारा संडीला में 504 आवासों में एससी वर्ग को आरक्षित 152 आवासों के 455.62 लाख तथा शेष जाति वर्ग को 352 आवास बनाने को मंजूर 1055.13 लाख में से दोनों वर्ग में पचास फीसदी धनराशि दी गई। इसी प्रकार शाहाबाद में 48 आवासों में से एससी के 15 आवासों के 44.97 लाख रुपये में और अन्य वर्गों के 33 आवासों के लिए 98.92 लाख रुपये में से दोनों वर्गों में पचास फीसदी धनराशि दी गई, जिससे आधे अधूरे मकान बनाकर अब बजट के अभाव में काम बंद हो गया है।
योजना आठ:-
पेंशन योजनाओं से मिल रही राहत
हरदोई। विभागाें में संचालित पेंशन योजनाओं में भी सबसे ज्यादा अंश केंद्र सरकार का है। हालांकि, इसमें प्रदेश सरकार से संचालित पेंशन शामिल नहीं है। सरकार द्वारा वृद्धावस्था पेंशन समाज कल्याण से, विकलांग पेंशन का संचालन विकलांग कल्याण विभाग से तथा विधवा पेंशन का संचालन प्रोबेशन विभाग से कराया जा रहा है। चूंकि यह पेंशन योजनाएं काफी समय से संचालित हैं। चूंकि यह योजनाएं जनता से सीधे जुड़ी और बजट भी कम है, ऐसे में पेंशन योजनाओं का सही ढंग से संचालन हो रहा है। जिले में वित्तीय वर्ष 13-14 के अंतर्गत तो वृद्धावस्था पेंशन के 1,21,441 पेंशनर, विकलांग के 17,618 पेंशनर और विधवा पेंशन के 78,543 लाभार्थियों को पेेंशन दी गई और अब वित्तीय वर्ष 14-15 में पेंशनरों का सत्यापन शुरू करवाकर जल्द खाते में पेंशन भेजने की कवायद की जाएगी। केंद्र सरकार की केवल पेंशन योजनाओं से पात्रों को राहत मिल रहा है।
इंसेट---
‘केंद्रीय योजनाओं की नियमित रूप से समीक्षा और निरीक्षण किया जाता है। योजनाओं से संबंधित जानकारी अफसरों को प्रतिमाह की प्रगति रिपोर्ट में भेजी जाती है। योजना में बजट आने पर काम कराया जाता है।’ सीडीओ वियोधन
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