पारा 42 डिग्री के पार

Hardoi Updated Fri, 09 May 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। गुरुवार को भी सूरज के चढ़ते तेवर ने लोगों को छकाया। लोग घरों में हो या फिर सड़कों पर, तपिश से बचने का ही प्रयास करते देखे गए। घरों में जहां एसी, कूलर व पंखों का सहारा लेकर गर्मी से बचाव करते देखे गए तो वहीं सड़कों पर लोग गमछा और चश्मे से धूप का बचाव करते दिखे। गुरुवार को 42 डिगी पारे ने सभी को पसीने-पसीने होने पर मजबूर कर दिया।
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बुधवार को पारे का उच्चतम स्तर 41 डिग्री पर रहा था और देर शाम बाद लोगों को गर्मी से कुछ राहत भी मिली थी, पर गरुवार को तेज धूप से जहां गर्मी बढ़ी वहीं गर्म हवाओं के थपेड़ों ने लोगों को बेहाल कर दिया, जिससे दोपहर बाद तक अधिकांश सड़कों पर सन्नाटे का माहौल रहा, जबकि जरूरी काम से घरों के बाहर दोपहिया पर निकले लोग सिर में अंगौछा आदि लपेट कर तथा आम का पना आदि का सेवन कर गर्मी से राहत पाने का प्रयास करते रहे। तेज धूप से पारे का अधिकतम स्तर 42 डिग्री तक पहुंच गया। पंखों से निकलती गर्म हवाओं से लोगों को राहत नहीं मिल पाई और भीषण गर्मी परेशान कर रही है।
ज्ञात हो कि मौसम के तेवर कड़क रहने से पारा बढ़ने के साथ ही गर्मी बढ़ी और गर्म हवाओं के थपेड़ें भी लोगोें के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं। उधर, तापमान के बढ़ते स्तर से नए बागानों के पौधों के लिए खतरे की घंटी बज गई हैं। उद्यान विभाग के अधिकारी तथा कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को देर शाम बागों की सिंचाई करने की सलाह दी, ताकि तापमान की आंच से पौधों को सुरक्षित रखा जा सके। जिले में प्रमुख रूप से आम, अमरूद एवं आंवला की बागवानी की जाती है। आम की बागवानी को शाहाबाद क्षेत्र काफी प्रसिद्ध है। शाहाबाद, संडीला, बेनीगंज, भरावन क्षेत्र में हर वर्ष किसान जुलाई और अगस्त में नए बागान लगाने का काम करते हैं। उद्यान निरीक्षक हरिओम ने बताया कि जिले में लगभग 10 माह पूर्व किसानों द्वारा नए बागों को लगाने का काम था।
200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में जुुलाई से सितंबर माह तक आम, अमरूद एवं आंवला के पौधे लगाए गए थे। अभी यह पौधे से 8 से 10 माह की आयु पूरी कर पाए हैं और मौसम के तेवर कड़क हो रहे हैं, जिससे तापमान का स्तर 42 डिग्री के आसपास चल रहा हैं। तापमान का बढ़ता स्तर इन नए पौधों की सेहत खराब करने के साथ ही उन्हें सुखा सकता है, इसलिए इन पौधों की विशेष रूप से देखभाल करने की जरूरत है। कहा कि नए पौधों को लेकर किसानों में चिंता होना स्वाभाविक हैं। किसानों को इस गर्मी से नए बागानों को बचाने को देर शाम बागों की सिंचाई करनी चाहिए। जब तक पौधों की आयु ढाई से साढ़े तीन साल तक की नहीं हो जाती, तब तक जाड़े एवं गर्मी के मौसमों में विशेष रूप से देखभाल करने की जरूरत होती है।
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