नहीं संजो पाए तारे जमीं के

Hardoi Updated Thu, 08 May 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। रेडक्रास सोसायटी द्वारा संचालित विकलांग पुनर्वास केंद्र बजट के अभाव में अपने उद्देश्यों की पूर्ति नहीं कर पाया। बीते साल सोसायटी ने साढ़े 10 लाख की अतिरिक्त ग्रांट मांगी थी, जो नहीं मिली। ऐसे में चिकित्सकों की टीम पिछले दो साल से केंद्र से किनारा कर चुकी है। कैसे रेडक्रास सोसायटी कैसे संजोएगी तारे जमीं के, अब यह सवाल सभी को मथ रहा है।
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आठ मई यानी गुरुवार को रेडक्रास दिवस पूरे विश्व में मनाया जाएगा। यदि दायित्वों के निर्वहन की बात की जाए तो जिले की सोसायटी अपने कार्यों में पूरे प्रदेश में अग्रणी जिलों में से एक बताई जाती है लेकिन उद्देश्यों की पूर्ति की बात करें तो बजट के अभाव में कहीं न कहीं रेडक्रास के जिम्मेदार अपना मन मसोस कर रह जाते हैं। सभी इस बार तारे जमीं के उपेक्षित न रह जाएं, इसको लेकर रेडक्रास सोसायटी हमेशा प्रयासरत रही है लेकिन बजट का अभाव हमेशा इस प्रयास में रोड़ा बनता चला आया है। अधिकारिता मंत्रालय की तरफ से जिला विकलांग पुनर्वास केंद्र रेडक्रास सोसायटी के भवन में संचालित किए जाने का दावा तो किया जाता है लेकिन अब तो यहां से चिकित्सकों की टीम को भी गए दो साल से अधिक का समय हो गया।
विभागीय जानकारी के मुताबिक सितंबर 2010 में 17 लाख 20 हजार रुपये की ग्रांट आई थी। इससे उपकरण खरीदने के निर्देश थे। इसके सापेक्ष उपकरणों का क्रय 2011 तक हुआ और शेष धनराशि का यूटीलाइजेशन नवंबर 2012 तक कर दिया गया। इसके बाद अप्रैल माह में सवा आठ लाख ग्रांट की मांग की गई, जो अभी पूरी नहीं हुई। इस बाबत सोसायटी के सचिव आलोक श्रीवास्तव ने बताया कि रेडक्रास सोसायटी, पुनर्वास केंद्र को आगे भी संचालित करेगी या नहीं इसको लेकर आगामी बैठक में विचार होगा। इसी बैठक में नवीनीकरण पर सहमति बनाई जाएगी। इसके अलावा रेडक्रास के अन्य जनहित के कार्यक्रम जारी रहेंगे। रेडक्रास दिवस पर इस बार कोई कार्यक्रम भी नहीं होगा। चुनाव के चलते इसे आगे ले जाया जा रहा है। 16 मई के बाद बैठक होगी। 21 मई को हरियावां में ब्लड कैंप लगाया जाएगा।
बहुत उम्दा था केंद्र का उद्देश्य
हरदोई। पुनर्वास केंद्र से सबसे अधिक फायदा कृत्रिम अंगों को लेकर जूझ रहे लोगों को होगा, यह दावे पूर्व में किए गए थे। इसके अलावा उन मानसिक तौर से विकलांग बच्चों को भी फायदा मिलने की बात कही गई थी जो उपेक्षा के चलते आम लोगों से दूर होते जा रहे हैं। यहां पर आने के बाद न सिर्फ बच्चों को ट्रीट कि ए जाने बल्कि उनके अभिभावकों को भी जानकारी दिए जाने की बात कही गई थी। केंद्र के बारे में बताया गया था कि अब तक जहां विकलांग बच्चों के माता-पिता को अपने बच्चों के लिए कृत्रिम अंगों को लगवाने की खातिर बाहरी जिलों की खाक छाननी पड़ती थी, वहीं अब इसी जिले में ही उनको यह सहूलियत प्राप्त हो जाएगी, पर सपने अधूरे ही हैं।

यह रही जिले की रेडक्रास सोसायटी
हरदोई। रेडक्रास सोसायटी के अध्यक्ष पदेन जिलाधिकारी डा. एच भास्कर यशोध, चेयरमैन रमेश अग्रवाल, उपसभापति नरेश गोयल, कोषाध्यक्ष अविनाश गुप्ता, सचिव आलोक श्रीवास्तव सहित चार सौ सदस्य हैं जो रेडक्रास सोसायटी को जनहित के कार्यों में ले जाने के लिए प्रयासरत हैं। पुनर्वास केंद्र के अलावा ब्लड बैंक कैंप, बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य, प्याऊ लगवाने से लेकर किसी भी जनहित कार्यों में वालेंटियर्स की बढ़ चढ़कर भागेदारी भी रहती है।
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