‘अत्याचार बढ़ने पर जन्म लेते प्रभु’

Hardoi Updated Wed, 07 May 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। जब-जब पृथ्वी पर ब्राह्मण, गौ और भगवान के भक्तों या संतों पर अत्याचार होता है और राक्षसों का दुराचार बढ़ जाता है, तब तब प्रभु पृथ्वी पर मनुष्य के रूप में अवतार लेते हैं। नटवीर बाबा मंदिर पर चल रही भागवत कथा के छठे दिन सोमवार को कथा व्यास आचार्य शशिभाल त्रिवेदी ने भक्तों को कथा की अमृत वर्षा कराते हुए यह बात कही।
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कहा कि अवतार लेकर भगवान काम, क्र ोध रूपी अत्याचार व अहंकार रूपी अंधकार को दूर करते हैं। कहा कि जब राक्षस वंश का अत्याचार बढ़ गया, तब प्रभु बाल कृष्ण ने मां देवकी की कोख से अवतार लेकर संसार में राक्षस रूपी वंश को मिटाने तथा धर्म के मार्ग को प्रशस्त करने को यशोदा-नंद के पास पहुंचे और मधुर बाल लीलाएं की। कहा कि पूतना का अर्थ है जो पवित्र न हो, पूतना बाल हत्यारिणी हैं और भगवान कृष्ण को मारने की इच्छा से वह उन्हें स्तनपान कराकर मार देना चाहती थी। पूतना के आते ही भगवान ने अपने नेत्र बंद कर लिए थे। नेत्र बंद करने के कई कारण थे। प्रथम तो यह कि यदि भगवान की दृष्टि अविद्या रूपी माया पर पड़ती तो वह स्वत: समाप्त हो जाती। दूसरा पूतना चूंकि बाल हत्यारिणी थी, इसलिए उसका मुख भी देखना नहीं चाहते थे।
भगवान ने तब यह भी विचार किया कि कैसी भी क्यों न हो, पर वह उन्हें स्तन पान कराने आई है, तो माता के समान है। इसे वह कौन सी गति प्रदान करें। अन्य भाव यह है कि उन्हाेंने विष पान करने को रुद्रदेव का स्मरण किया। भगवान ने पूतना को माता के समान गति प्रदान की। कथा व्यास ने कहा कि जीव और ब्रह्म का मिलन ही महारास है। जहां चिन्मय प्रेम की अभिव्यक्ति होती है। इसके पूर्व देवी प्रसाद त्रिपाठी ने पत्नी के साथ भगवान की आरती उतारी। इस मौके पर सलिल दीक्षित, सतीश सिंह, आदित्य नारायण, ज्योति प्रकाश सिन्हा, श्याम श्रीवास्तव, मुकुंद श्रीवास्तव, केके मिश्र, रामनाथ मिश्र, मनोज त्रिपाठी, विवेक, सरोज, विनय आदि मौजूद थे।
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कृष्ण लीला मंचन देख दर्शक भाव विभोर
कासिमपुर। रेहरी में चल रही श्रीकृष्ण लीला का मंचन देख दर्शक भाव विभोर हो गये। वृंदावन से आए व्यास रघुवीर यादव ने कथा का मनोहारी चित्रण किया। कथा व्यास ने कहा कि मथुरा का राजा कंस अपनी बहन देवकी व बहनोई वासुदेव को लेकर जा रहे थे, तभी रास्ते में आकाशवाणी हुई कि देवकी का आठवां पुत्र तेरा काल होगा। यह सुनकर कंस आग बबूला हो गया और बहन की हत्या करने के लिए तलवार खींच ली। इस पर वासुदेव ने कंस का हाथ पकड़ा और कहा कि यदि इसका आठवां पुत्र आप का काल है, तो उसे जन्म होते ही हम आप को सौंप देंगे। कंस ने वासुदेव-देवकी को जेल में डाल दिया और उसके सात पुत्र मार डाले। इधर, भगवान विष्णु देवकी के गर्भ में बालक के रूप में आए। कृष्ण को गोकुल पहुंचाया गया और यशोदा की कन्या को जेल लाया गया। कन्या के रोने की आवाज सुन कंस जेल में आया और कन्या को मारने की कोशिश करने लगा। इस पर उसका हाथ छूट गया और कन्या आकाश में पहुंच गई और बोली कंस तुझे मारने वाला पहले ही पैदा हो चुका है। अंत में कृष्ण ने कंस को मारकर धर्म की स्थापना की।
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