बीमारी से खुद कराह रहा अस्पताल

Hardoi Updated Tue, 06 May 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। प्रदेश सरकार भले ही स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने का दंभ रही हो, पर डॉक्टरों के बिना मरीजों का इलाज संभव नहीं है। जब चिकित्सक ही नहीं हाेंगे तो मरीजों का इलाज कौन करेगा। महकमा जब सूबे के स्वास्थ्य राज्य मंत्री के गृह जिले में ही डॉक्टरों की तैनाती नहीं कर पा रहा, तो प्रदेश के अन्य जिलों की स्थित का स्वयं ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिले में तैनात किए गए हृदय रोग विशेषज्ञ ने कार्य भार ग्रहण नहीं किया। वहीं जिला अस्पताल में 50 फीसदी डॉक्टरों के पद रिक्त हैं।
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गर्मी में संक्रामक रोग बढ़ रहे, पर इलाज करने को फिजीशियन ही नहीं, तो उनका इलाज कैसे हो, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अस्पताल में वर्तमान में डॉक्टरों के 26 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से 13 पद रिक्त चल रहे हैं। अस्पताल में कार्डियोलाजिस्ट का पद कई वर्षों से रिक्त चल रहा है, पर अभी तक उस पर तैनाती नहीं हुई है। वहीं फिजीशियन के दोनों पद वर्षों से रिक्त चल रहे हैं, वहीं बाल रोग विशेषज्ञ का एक पद रिक्त है। वहीं तीन पद ईएमओ के रिक्त चल रहे हैं। त्वचा रोग विशेषज्ञ का पद तो है, पर अस्पताल में कई वर्षों से उस पर तैनाती नहीं हुई, जबकि मरीजों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है, पर परामर्श व दवा के नाम पर कुछ गोली देकर कार्य की इतिश्री कर ली जाती है। इससे मरीजों को निजी डॉक्टरों की शरण में जाना पड़ रहा। 50 फीसदी डॉक्टरों की कमी से अस्पताल इन दिनों स्वयं ही बीमार है।
अस्पताल में करोड़ों की लागत से आक्सीजन प्लांट लगा है, पर उसका प्रयोग नहीं हो पा रहा है। वह सिर्फ शोपीस बने है। आज भी परंपरागत आक्सीजन सिलेंडर से ही कार्य चलाया जा रहा है। उधर, अस्पताल में आने वाले मरीजों का इलाज करने के स्थान पर यहां पर तैनात डॉक्टर विशेषज्ञ न होने की बात कहकर लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। अस्पताल के आंकड़ों की मानें तो प्रति माह डेढ़ से दो सौ मरीजों को बाहर का रास्ता दिखाया जाता है। जनवरी में 226 मरीजों को रेफर किया गया। फरवरी में 203, मार्च में 228 और अप्रैल में 196 मरीजों को लखनऊ का रास्ता दिखाया गया। इसके अलावा जिला अस्पताल में हृदय रोग विशेषज्ञ के रिक्त पद पर डा. रुद्रदत्त द्विवेदी का 3 अप्रैल 13 को लखनऊ से स्थानांतरण किया गया था, पर आज तक उन्होंने कार्य भार ग्रहण नहीं किया है।
इससे जिला अस्पताल में आने वाले हृदय रोग के मरीजों को भटकना पड़ता है। इसके अलावा जिला अस्पताल में सभी दवाइयां मुहैया कराने के दावे किए जाते हैं। डॉक्टर मेडिकल स्टोर की पर्ची पकड़ा देते है। मरीजों को सांप काटने के इंजेक्शन से लेकर आपरेशन तक की सारी दवाइयां बाहर से ही लानी पड़ती है। यहां तक बीगो तक आकस्मिक कक्ष में मुहैया नहीं है। इसके अलावा अस्पताल में कहने को तो जनरेटर है, पर सिर्फ कागजों में ही सही चल रहा है। अकसर जनरेटर बंद रहता है। जिससे मरीज गर्मी में बेहाल होते हैं। बर्न वार्ड में एसी तो लगा है, पर वह चलता कम खराब ज्यादा रहता है, इससे उसका लाभ मरीजों को नहीं मिल पाता है।
केस 1- हरपालपुर क्षेत्र के ग्राम पांडेय पुरवा निवासी पंकज (35) को सांप काटने पर जिला अस्पताल में लाया गया। जहां पर इंजेक्शन तक नहीं मिला, जिससे परिजनों को बाहर से इंजेक्शन लाना पड़ा। इससे मरीज के तीमारदार काफी देर तक भटकते रहे।
केस 2- लोनार के नस्योली निवासी अजय कुमार की पत्नी अनीता (40) को उल्टी-दस्त और पेट में दर्द होने से जिला अस्पताल लाया गया, पर उसका इलाज करने से पहले ही डॉक्टर न होने की बात कहकर चलता कर दिया गया। इससे उसका परिवार पूरे दिन परेशान रहा। अनीता के पति का कहना था कि उसके पास इतना पैसा नहीं कि वह उसे लखनऊ ले जा सके। ।
केस 3- शहर के आजाद नगर निवासी अशोक कुमार (26) पुत्र रामकिशोर को हार्ट अटैक पड़ने पर परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर आए, पर यहां पर विशेषज्ञ न होने से उसको चलता कर दिया गया। वह काफी देर तक दर्द से कराहते रहे। आखिर परिजन उसे एक निजी चिकित्सक के पास ले गए।
केस 4- कोतवाली देहात के ग्राम बहार निवासी श्यामा कुमार (26) की रविवार की रात डायरिया से हालत खराब हो गई। उसे जिला अस्पताल लाया गया, पर वहां पर उसका इलाज तो हुआ, पर फिजीशियन न होने से उसका समुचित इलाज नहीं हो सका और उसे एक निजी चिकित्सक का सहारा लेना पड़ा।
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बदहाल हो गया है आईसीसीयू वार्ड
हरदोई। जिला अस्पताल में हृदय रोगियों के लिए आईसीसीयू वार्ड बनाया गया था। जहां पर मरीजों को रखने की व्यवस्था थी। इसके लिए वार्ड में एसी भी लगाया गया था, पर डॉक्टरों की तैनाती न होने से उसका उपयोग नहीं हो रहा है। वहां पर आम मरीजों का रखा जा रहा है। एक आईसीसीयू कक्ष को स्टाफ रूम बना दिया गया है। यहां के वार्ड में पड़े पलंग ईंटों के सहारे रुके हुए हैं, जो कभी गिर सकते हैं।
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लौटते मरीज, तीमारदार करते कार्य
हरदोई। जिला अस्पताल में इलाज की चाह में भारी संख्या में मरीज पहुंचते हैं। अप्रैल में 19,285 नए मरीज ओपीडी पहुंचे और 8232 पुराने मरीज पहुुंचे, पर उनको इलाज के नाम पर सिर्फ कुछ दवा देकर चलता कर दिया गया। इन मरीजों को सही राय देने को विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिले। किसी ने बाल रोग तो किसी ने पैथोलाजिस्ट से दवा लिखवाई। इसके अलावा अस्पताल में मरीजों की सेवा को स्टाफ नर्स, वार्ड ब्वाय तैनात हैं और उनके लिए स्ट्रेचर भी मुहैया हैं, पर यहां पर स्टाफ सिर्फ अपने निजी कार्य में व्यस्त रहते हैं। मरीजों की सेवा तीमारदारों को खुद करनी पड़ती है।
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अस्पताल में नहीं मिलतीं पूरी दवाइयां
हरदोई। जिला अस्पताल में दवाइयों के नाम पर मरीजों को बस कुछ ही दवाइयां दी जाती है। डॉक्टर के लिखने के बाद भी मरीजों को दवा काउंटर पर आधी अधूरी दवाइयां देकर चलता कर दिया जाता है। वर्तमान आधेे से ज्यादा दवाइयां नहीं है। लाल पीली गोली देकर मरीजों को बहलाया जा रहा है।
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सही रिपोर्ट नहीं देती एक्स-रे मशीन
हरदोई। यहां एक्सरे मशीन तो है, पर अकसर खराब रहती है। एक्सरे अधिकतर खराब ही आता है। वही सिर्फ मेडिको लीगल की रिपोर्ट बनाने तक ही सिमट कर रह गई है। अन्य मर्जों के लिए बाहर से ही एक्सरे कराना पड़ता है। यहीं हाल दंत विभाग के एक्सरे मशीन की है। विशेषज्ञ कभी कभार ही एक्सरे रूम में पहुंचते है। अधिकतर वह बाहर की पर्ची ही लिखते रहते हैं।
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‘जिला अस्पताल में डॉक्टरों की कमी को पूरा करने को शासन को पत्र लिखा गया है। जिला प्रशासन की ओर से भी पत्र भेजा गया है। अस्पताल में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने का प्रयास किया जा रहा है। अस्पताल का निरीक्षण कर उसकी खामियों को दूर कराने का प्रयास किया जाएगा।’ डा. वीके गुप्ता, सीएमओ
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