पूरे विश्व को शांति की जरूरत

Hardoi Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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हरदोई। स्वामी हरि चैतन्य महाप्रभु महाराज ने कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व बंधुत्व और सर्वे भवंतु सुखिन: का भाव रखती है। आज सारे विश्व को शांति की जरूरत है, पर दुर्भाग्यवश हम उसे स्थापित नहीं कर पा रहे है। उन्होंने कहा कि सुख और शांति विचाराें में है संतों व गुरुओं की शरण में है यदि इंद्रियों पर नियंत्रण न किया गया तो हम शांति कभी भी नहीं पा सकते।
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वह एएसबीबी कॉलेज के पास एसडी शर्मा के आवास पर सत्संग में बोल रहे थे। कहा कि मत, पंथ, संप्रदाय कई हो सकते हैं, पर धर्म एक ही है, परमात्मा के नाम, उपासना की पद्धतियां, उसे जानने व पाने के मार्ग कई हो सकते हैं, पर परमात्मा एक ही है। धर्म जोड़ता है तोड़ता नहीं, पर आज धर्म को तोड़ समाज को बांटने का कुचक्र रचा जा रहा है। कहा कि संत, महापुरुष व अवतारों को मात्र अपनी कमियां छिपाने के लिए ढाल न बनाया जाए, बल्कि उनसे शिक्षाप्रद उपदेश ग्रहण किए जाए, ताकि हम धर्म के मर्म को समझकर राष्ट्र व समाज के कल्याण में कुछ कर सके। कहा कि आज भौतिकता की चकाचौंध में लिप्त होकर कुछ संत अपनी गरिमा को गिरा रहे हैं।
उनके ही कारण औरों की भी उपेक्षा होती है, जिससे लोगों का संतों व धर्म से विश्वास उठने लगा है। संतों को इससे बचना चाहिए। कहा कि भूतकाल में की गई गलतियों को सुधार कर हमें उज्जवल भविष्य की ओर प्रस्थान करना चाहिए, साथ ही वर्तमान में जीने की कला सीखनी चाहिए। इससे पहले स्वामी का धार्मिक रीति रिवाज से फूल माला पहनाकर आरती उतारी गई। इस मौके पर आदित्य नारायण तिवारी, अमित मिश्रा आदि मौजूद थे।
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