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हम तो निकले ही थे बांध कर कफन

Hardoi Updated Mon, 24 Mar 2014 05:31 AM IST
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हरदोई। आजादी के महान क्रांतिकारी शहीद सरदार भगत सिंह, राजगुरू और सुखदेव का बलिदान दिवस रविवार को जिले में श्रद्धापूर्वक मनाया गया। शहीद उद्यान में शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण कर जयघोष के नारे लगाए गए। लोगों ने उनके आदर्शों को जीवन में आत्मसात करने और बलिदान को हमेशा याद रखने की बात कही। साथ ही समाजसेवियों व देशभक्तों ने बलिदान दिवस को हर घर में मनाने की भी अपील की।
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राष्ट्रीय चेतना मंच, आर्य समाज श्रद्धानंदनगर एवं शहीद स्मारक संस्थान के तत्वावधान में शहीद-ए-आजम भगत सिंह, सुुखदेव व राजगुरू की शहीदी दिवस पर संस्थाध्यक्ष आचार्य सत्यवीर प्रकाश ने कहा कि तीनों देशभक्तों को 24 मार्च को फांसी दी जानी थी, पर विद्रोह के डर से अंग्रेजों ने 23 मार्च को ही फांसी दे दी। हरदोई में जयदेव कपूर के घर में भगत सिंह के जूते और घड़ी आज भी सहेज कर रखे गए हैं। क्रांतिकारी शिववर्मा के पौत्र धर्मेंद्र अस्थाना ने कहा कि उनके जीवन से देशप्रेम का पाठ सीखना चाहिए। राधेश्याम कपूर ने कहा कि उनके बलिदान को कभी भुलाना नहीं चाहिए। अश्वनी कुमार व उमेश कुमार ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस मौके पर सुयश प्रकाश, मनीष कुमार आदि मौजूद थे।
मुकुल सिंह आशा ने तीन देशभक्तों के चित्र पर माल्यार्पण किया। इस मौके पर सुबोध गुप्ता, शैलेंद्र सिंह यादव, अजय अवस्थी, संतोष सक्सेना, मंशाराम, राम कुमार, उमाकांत गुप्ता व रोहित मौजूद थे। सीएसएन पीजी कालेज में क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव के शहीदी दिवस पर गोष्ठी हुई, जिसमें प्राचार्य डा. नरेश चंद्र शुक्ला ने तीनों क्रांतिकारी समेत अमर शहीद चंद्रशेखर आजाद, डा. भीमराव अंबेडकर व स्वतंत्रता सेनानी बाबू मोहन लाल वर्मा की मूर्तियों पर माल्यार्पण किया। डा. महेंद्र वर्मा मधुप ने कहा कि शहीदों के त्याग और बलिदान से आज हम स्वतंत्र हैं। डा. महेंद्र त्रिपाठी ने कहा कि दुख की बात है कि सरदार भगत सिंह को हमारी सरकार आज भी शहीद का दर्जा नहीं दे सकी है।
उधर, शिव विश्व कल्याण संस्थान के बैनर तले लोगों ने शहीदों को याद किया। संस्थान के सदस्यों ने मूर्ति पर माल्यार्पण कर वंदेमातरम व भारत माता के जयघोष के नारे लगाए। संस्थान अध्यक्ष शिव सेवक गुप्ता ने कहा कि भगत सिंह, राजगुरू व सुखदेव के 83वें बलिदान दिवस को क्रांति दिवस के रूप में मनाया जाना चाहिए। तीनों शहीदों ने स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दे डाली। सचिव डा. खुनखुन अवस्थी ने कहा कि समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार, आतंकवाद, अनैतिकता, भाषा व क्षेत्रवाद के नाश को आज फिर से तीनों क्रांतिकारियों की जरूरत है। इस मौके पर पंकज पांडेय, सोमेश्वर सिंह, देवेश मिश्रा, गुलाब सिंह, संजीव अवस्थी आदि मौजूद थे।

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