समस्याओं से जूझ रहीं कस्तूरबा की छात्राएं

Hardoi Updated Thu, 21 Nov 2013 05:42 AM IST
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बिलग्राम/मल्लावां/सांडी। अफसरों की मनमानी कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालयों की छात्राओं पर भारी है। इनमें विभागीय लापरवाही के चलते अब खाने के लाले पड़ रहे हैं। इसके चलते बिलग्राम कस्तूरबा की छात्राओं को पिछले 10 दिनों से सर्दी के मौसम में चावल खाकर गुजारा करना पड़ रहा है। जहां इन विद्यालयों में रजाई गद्दों का टोटा है वहीं ऊनी कपड़े भी अभी तक बांटे नहीं गए। इसके चलते विद्यालय की छात्राओं से लेकर स्टाफ तक परेशान है। यह स्थिति तब है जब केंद्र सरकार की ओर से एक कमेटी इन विद्यालयों का जायजा लेने आ रही है।
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बिलग्राम स्थित विद्यालय में अब तक न तो बिजली का कनेक्शन लिया गया और न जनरेटर सही है। इससे छात्राओं और स्टाफ को सारी रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। बिजली न होने से सबमर्सिबल से पानी भी नसीब नहीं हो रहा। विद्यालय की एक सैकड़ा छात्राएं मात्र एक हैंडपंप के सहारे हैं। इतना ही नहीं विद्यालय परिसर में ऊबड़ खाबड़ जमीन से होकर उन्हें पानी भरने जाना पड़ता है। छात्राओं को अब तक कापियां भी नहीं दी गई हैं। बिस्तर भी बदहाल है। खाद्यान्न की आपूर्ति न होने से विद्यालय की छात्राओं को 10 दिन से चावल खाना पड़ रहा है।
उधर, माधौगंज स्थित कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में बाहरी प्रांगड़ ऊबड़ खाबड़ है। जल निकासी की व्यवस्था न होने से विद्यालय का पानी पिछले हिस्से में भरा रहता है। पेयजल के लिए एक मात्र हैंडपाइप है। यहां अब तक बिजली का कनेक्शन नहीं हुआ। इससे रात अंधेरे में गुजारनी पड़ती है। खाद्यान्न आवंटित न होने से यहां भी छात्राओं के भोजन के लाले पड़ रहे हैं। तीन साल पहले मंगाए गए रजाई गद्दे भी खराब हो चुके हैं वहीं ऊनी वस्त्र भी अभी तक नहीं दिए गए। हैरत की बात है कि इस विद्यालय में अधिकारियों का आना जाना रहता है लेकिन छात्राओं की पीड़ा किसी को नहीं दिखाई देती।
इधर, कछौना स्थित विद्यालय में जनरेटर न चलने से छात्राओं को हैंडपंप से पानी भरना पड़ता है। सर्दी में ऊनी कपड़े भी नहीं दिए गए। सूत्रों की मानें तो विद्यालय मेें नाश्ते से लेकर खाने तक में मनमानी का बोलबाला है। खिड़कियों के टूटे शीशे से आती सर्द हवाएं छात्राओं को कंपा देती हैं। इनकी पीड़ा तो कोई सुनना तक पसंद नहीं कर रहा। इस विद्यालय में खाद्यान्न का संकट बरकरार है। इस बावत वार्डेन ममता देवी ने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। सांडी स्थित विद्यालय की छात्राओं को मूलभूत सुविधाओं से जूझना पड़ रहा है। यहां भी खाद्यान्न से लेकर ऊनी कपड़े तक की समस्या है। इस बावत यहां की वार्डेन ने कुछ भी बताने से इंकार कर दिया।


गैस सिलेंडर न होने से चूल्हे का सहारा
बिलग्राम। तहसील क्षेत्र के कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय में गैस सिलेंडर न मिल पाने से चूल्हे पर खाना बनाया जा रहा है। बुधवार को विद्यालय की छात्राओं को खाने में चावल और सब्जी दी गई। पूछे जाने पर पता चला कि अगस्त से अब तक विद्यालय को खाद्यान्न के लिए मात्र 20 हजार रुपया मिला है जिसमें 115 लोगों का दो टाइम का खाना बनता है। विद्यालय का भोजन बजट के अभाव में गड़बड़ा गया है।

वर्जन
‘कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में खाद्यान्न, सामग्री, दैनिक उपयोग की सामग्री व स्टेशनरी की आपूर्ति के लिए संबंधित फर्मों को क्रयादेश दिये जा चुके है। प्रत्येक दशा में 21 नवंबर तक विद्यालयों में सामग्री की आपूर्ति करने के निर्देश दिए गए हैं’।
वीके शर्मा
बीएसए


‘कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालयों में खाद्यान्न, बिस्तर और ऊनी कपड़े, स्टेशनरी आदि की समस्याओं की जानकारी मिली है। इस संबंध में विभागीय अधिकारियों से बात की जाएगी। यदि सुधार न हुआ तो उच्चाधिकारियों से बात करेंगी’।
कामिनी अग्रवाल
जिला पंचायत अध्यक्ष
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