युक्ति से चलने वालों की प्रभु करते मदद

Hardoi Updated Fri, 25 Oct 2013 05:41 AM IST
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अतरौली/बेहंदर (हरदोई)। बिना लंबे परिश्रम के कार्य की सिद्धि नहीं होती। मदद की भावना रखते हुए भी अमृत की प्राप्ति को भगवान ने देवताओं और दैत्यों से समुद्र का मंथन करवाया। उद्योग और युक्ति से काम लेने वाले लोगों की भगवान मदद करते हैं। विष्णु उपकारी और शांत हैं।
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सिरौली आए प्रो. डा. जयनारायन पांडे द्वारा बिना संगीत के ही भावपूर्ण श्रीमद्भागवत कथा का वाचन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देवताओं द्वारा दैत्यों का विनाश करने के लिए मांगी गई मदद पर भगवान ने युद्ध की जगह पर उद्योग और युक्ति का रास्ता चुनते हुए पहले समुद्र मंथन करवाया और बाद में मोहिनी रूप धारण करके संपूर्ण अमृत देवताओं को पिला दिया। समुद्र से निकली लक्ष्मी को पाने को दैत्य लालायित हुए, पर सदाचार की कमी होने से लक्ष्मी उनकी हो न सकी और विष्णु के गले में माला डाल दी।
विरोधी और विषम परिस्थितियों में भी विष्णु शांत और प्रसन्न रहने वाले हैं। इसीलिए उन्हें शांताकारं भुजगशयनं कहकर प्रदर्शित किया गया, जो सर्प पर शयन करने पर भी शांत रहते हैं। अमृत पीकर अमर होने वाले देवता पराजित हो नहीं सकते थे, अंतत: बिना संघर्ष के ही भगवान ने उद्योग व युक्ति से देवताओं को विजय दिला दी। कार्यक्रम में सिरौली प्रधान ने भक्तों को प्रसाद का वितरण किया। रविवार को हवन व भंडारा के साथ कार्यक्रम का समापन किया जाएगा।
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