पुलिस का ‘हाथ’ बंदी के ‘साथ’

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Hardoi Published by: Updated Wed, 10 Jul 2013 05:31 AM IST

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हरदोई। पुलिस अभिरक्षा से बंदियों के भागने में कहीं न कहीं पुलिस महकमे की कार्यशैली भी जिम्मेदार है। कोर्ट परिसर में सुरक्षा के नाम पर सिर्फ रस्म अदायगी और कागजी खानपूरी की जाती है। हकीकत में बंदियों के पेशी पर ले जाने में मानकों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। इस कारण बंदियों के भागने की घटनाओं पर अंकुश नहीं लग रहा है।
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कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को पुलिस महकमे की ओर से एक पुलिस चौकी स्थापित की गई है। प्रभारी सहित पर्याप्त संख्या में पुलिसकर्मी तैनात हैं। इसके अलावा कोर्ट परिसर के सभी गेटों पर भी सुरक्षाकर्मियों की तैनाती है। इसके अलावा कोर्ट में पेशी पर आने वाले बंदियों के लिए भी पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था है। नियमानुसार पेशी पर आने वाले बंदी को पुलिसकर्मी के साथ हवालात से कज्ञैर्ट भेजा जाए और उसी के साथ वापस आए। इसके अलावा गैंगेस्टर आदि गंभीर मामलों के आरोपी के साथ सशस्त्र पुलिस कर्मी का होना अनिवार्य है। बंदियों के पास कुछ भी ऐसी वस्तु न पहुुंचने पाए, जिससे उसे या अन्य किसी को कोई खतरा हो। इतनी सुरक्षा होने के बावजूद पुलिस अभिरक्षा से बंदियों के भागने की घटना ने सारी सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी है।

वर्तमान में कोर्ट परिसर की सुरक्षा भगवान भरोसे है। कोर्ट परिसर की सुरक्षा को हर गेट पर सुरक्षाकर्मी की तैनाती है, पर सुरक्षा कर्मी गेट पर नहीं रहते, जिससे लोगों का बेरोकटोक आवागमन जारी रहता है। मंगलवार की दोपहर एक बजे दीवानी कोर्ट का मुख्य गेट सूना पड़ा हुआ था। यहीं हाल कलक्ट्रेट जाने वाले गेट का था। किसी भी गेट पर सुरक्षाकर्मी नहीं थे। वही बार एसोसिएशन केे गेट पर तैनात सुरक्षा कर्मी गेट से दूर कुर्सी पर बैठ कर आपस मेें गुफ्तगू कर रहे थे। कोर्ट परिसर की सुरक्षा को परिसर में पुलिस चौकी भी है, पर चौकी कागजों में ही बेहतर ढंग से कार्य कर रही है। चौकी के लिए अभी तक कोर्ट परिसर में स्थान नहीं मिला है।
चौकी व चौकी प्रभारी को खोजना टेढ़ी खीर है। महज चंद रुपयों के लालच में बंदियों के साथ जाने वाले सुरक्षा कर्मी अपनी ड्यूटी को भी दांव पर लगाने से नहीं चूकते है। वह कोर्ट परिसर और उसके आस पास में बनी कैंटीन में बंदियों को उनके क ेरिवार के सदस्यों के साथ मिलने की छूट दे देते है। जहां पर बंदी अपनी नशे की लत तक को पूरा कर लेते है। इतना ही नहीं गैंगेस्टर जैसे अपराध के मामले में आरोपी को भी होमगार्ड के सहारे भेज दिया गया, जिससे एक बंदी फरार हो गया। उधर, पेशी पर आए बंदियों के हाथ में सामग्री से भरी बड़ी थैली खुद ही बयां कर रही है। इन थैलियोें में क्या है इसकी जानकारी साथ में आए सुरक्षा कर्मी जानने की कोशिश नहीं करते।
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कैंटीन से ही आपराधिक गतिविधियों का संचालन
हरदोई। कोर्ट परिसर और उसके आस पास बनी कैंटीन से ही आपराधिक गतिविधियों को अंजाम दिया जाता है। पेशी पर आने वाले गंभीर मामले के बंदी कैंटीन पर बैठकर चाय नाश्ता तो करते हैं, वहीं पर उनके आपराधिक साथी आ जाते है। जिनके साथ मिल कर अपराधी कई घटनाओं की रणनीति बनाकर अंजाम देते हैं।
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पुलिस अभिरक्षा से भागे बंदी का नहीं लगा सुराग
हरदोई। शनिवार को शाहजहांपुर जिले के जलालाबाद के कलक्टर गंज निवासी कल्लू पुत्र जालिम पुलिस अभिरक्षा से भाग गया था। उसका अभी तक पता नहीं चल सका है। पेशी पर लाने वाले होमगार्ड विनोद को पुलिस ने जेल भेज कर कार्य की इतिश्री कर ली है। अभी तक पुलिस बंदी को तलाश नहीं कर सकी है।
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इससे पूर्व भी अभिरक्षा से फरार हो चुके कई बंदी
हरदोई। पुलिस अभिरक्षा से बंदी के फरार होने की शनिवार को घटना पहली नहीं है। इससे पूर्व भी कई पुलिस अभिरक्षा से फरार हो चुके हैं। विगत छह माह में बंदियों की भागने की पांच से छह घटनाएं हो चुकी है। एक बार बंदी ने लाल मिर्च का प्रयोग किया था, तो एक बार चाकू से वार कर फरार हो गया था। इसके अलावा कई बार बंदी पुलिस को चकमा देकर फरार हो चुके हैं।
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रोक के बावजूद परिसर में रहता वाहनों का जमावड़ा
हरदोई। दीवानी कोर्ट परिसर में जिला न्यायाधीश ने वाहनों के आने पर रोक लगा रखी है और उनकी ओर से इस बाबत दस कक्षीय कोर्ट भवन में सूचना भी चस्पा की गई है। इसके बावजूद कोर्ट परिसर में दो व चार पहिया छोटे वाहनों का जमावड़ा लगा रहता है। आड़े तिरछे वाहन खड़े रहते हैं, पर परिसर में तैनात सुरक्षा कर्मियों को कुछ भी नजर नहीं आता है। इससे जहां कोर्ट की सुरक्षा को खतरा रहता है, वहीं आवागमन भी बाधित होता है। जिसका फायदा अपराधी उठाते हैं।
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‘बंदियों की सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाता है। फरार बंदी की तलाश में टीमें लगाई गई है। अगर सुरक्षा में कोई लापरवाही बरती जा रही, तो जांच कर दोषी लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।’ गोविंद अग्रवाल, एसपी

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