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यहां तो ‘डेडलाइन’ पर ही उठता-गिरता ‘फावड़ा’

Hardoi Updated Wed, 13 Feb 2013 05:31 AM IST
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हरदोई। जिले की मनरेगा और उस पर होने वाले कार्यों ने आसपास के जनपदों में ही नहीं पूरे प्रदेश में अपना एक मुकाम हासिल किया है, पर इन सबके बाद भी जिले में 100 दिन का रोजगार पाने वालों की संख्या पांच लाख जॉब कार्डों में महज सैकड़ों में ही रह जाती है। इनके पीछे के कारणों पर न तो अधिकारी ही कुछ समझ पाते हैं और न ही मजदूर ही कोई जवाब दे पाते हैं, पर जिले की मनरेगा का सच यही है कि 31 दिनों की डेडलाइन के पार होते ही जिले के मजदूर अपना फावड़ा चलाना बंद कर देते हैं और यही से कार्य करने वाले मजदूर परिवारों का ग्राफ गिरता चला जाता है।
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दो हाथों को काम और फिर काम के बदले दाम देने वाले मनरेगा जिले में ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में एक ऊंचे मुकाम पर पहुंच चुकी है इसमें कोई दो राय नहीं है, पर ठीक इसके साथ ही एक सच यह भी है कि जिले की ग्राम पंचायतों में बिरले मजदूर परिवार ही 100 दिनों का रोजगार पूरा कर पाते हैं। जिसका आलम यह है कि अब तक 100 दिनों का रोजगार जिले के 19 विकास खंडों में बमुश्किल 200 से अधिक परिवार ही कर पाए हैं। सरकारी डायरी में जिले की मनरेगा के तहत दिनवार काम करने वाले मजदूरों की संख्या को यदि बांटा जाता है तो 30 दिनों तक ही काम करने वाले मजदूर परिवार ज्यादा संख्या में एक साथ काम करते दिखाई देते हैं, पर उसके बाद जैसे ही ग्राफ 31 दिनों के बाद का चलना लगता है, वहां से काम करने वाले परिवारों की संख्या एकदम से घटने लगती है।

जनवरी के आंकड़ों के मुताबिक, एक से 10 दिन काम करने वाले मजदूर परिवारों की उपस्थिति 21,536 देखी गई और 11 से 20 दिनों के बीच बढ़कर यह 28,188 पहुंच गई। इसी तरह 21 से 30 दिनों के मध्य कुछ कम होकर यह 24,411 पहुंची, पर 31 से 40 दिनों के बीच के दिनों में तो जैसे मजदूरों का मोह भंग सा हो जाता है। जिसके बाद काम करने वाले मजदूरों की संख्या मात्र 13,138 ही रह गई। ऐसी ही स्थिति 41 से 50 दिनों के मध्य 12,551 ही रह गई।
इसके बाद तो मानो 51 से 60 के मध्य 6736, 61 से 70 के मध्य 5451, 71 से 80 के मध्य 2680, 81 से 99 दिनों के बीच मजदूराें की संख्या 2,941 के लगभग ही रह जाती है। कुल मिलाकर जिले के ग्राम पंचायत से लेकर मुख्यालय स्तर के बड़े अफसरों की यह परेशानी रही है कि आखिर 100 दिनों का काम कर पाने वाले मजदूरों की संख्या पूरे वित्तीय वर्ष कम कैसे रह जाती है।

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