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‘गुरू’ की फांसी से अवाम प्रफुल्लित

Hardoi Updated Sun, 10 Feb 2013 05:30 AM IST
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हरदोई। अजमल आमिर कसाब के बाद शनिवार को वर्ष 2001 में संसद पर हुए हमले के मामले में दोषी करार दिए गए अफजल गुरू को फांसी दे दी गई। यह सूचना इस दिन जिसको भी जिस माध्यम से भी मिली, उसके मुख से एक ही बात निकली, वाह क्या बात है। यदि यह कहा जाए कि आतंकी गतिविधियों का जवाब जिस तेजी से अब भारत देने का प्रयास कर रहा है, उससे हर नागरिक अपने आप को अब भारत में महफूज समझ रहा है।
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अफजल गुरू को तिहाड़ जेल में फांसी दे दी गई। जेल में ही किसी अज्ञात जगह पर उन्हें शनिवार को दफना भी दिया गया। जानकारी के मुताबिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने हाल में ही अफजल गुरू की दया याचिका को खारिज कर दिया था, जिससे 13 दिसंबर 01 में संसद के साथ आतंकी गतिविधियों के कारण पूरे देश को सकते में डालने वाले आतंकी को फांसी दे दी गई। फांसी की सूचना मिलते ही जिले भर में संतुष्टि के भाव भी हर चेहरे पर उबरते दिखाई दिए। खबर लगते ही चाहे सरकारी, गैर सरकारी, पान की गुमटी से लेकर होटल ढाबों में भी अफजल गुरू की फांसी को लेकर चर्चा होती रही।

हर किसी ने इस निर्णय की प्रशंसा की साथ ही यह भी कहा कि यदि इस ओर भारत सरकार पहले सोच लेती तो देश को आतंकी गतिविधियों से हिलाने वाला इतने सालों तक देश का मेहमान बनकर न रहता। निश्चित रूप से इससे भारत की तरफ नजरें टेढ़ी करने वालों को एक सबक मिलेगा। भविष्य में भी देश में आतंकियों को ऐसी सजा सुनाई जानी चाहिए, ताकि आतंकी खौफ में तो देशवासी सुरक्षित महसूस कर सके।
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जल्दी हो जाता तो और अच्छा होता : मिश्र
हरदोई। भाजपा जिलाध्यक्ष राजीव रंजन मिश्र का कहना है कि देश की कमान चाहे जिसके हाथों में भी हो निर्णय ऐसे होने चाहिए कि देशवासियों को भी अहसास होना चाहिए। अफजल की फांसी में देरी पर भाजपा ने चर्चा के लिए लोस में 13 दिसंबर 12 के प्रश्नकाल स्थगित करने का नोटिस दिया था। उनका कहना है कि जो हुआ देशहित में हुआ। जल्दी हो जाता तो और अच्छा हो जाता।
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सुकून महसूस कर रहे देशवासी : कौशल
हरदोई। जिला सैनिक कल्याण अधिकारी कर्नल एचएन कौशल का कहना है कि देश की संसद पर चोट करने वाले का हश्र यही होना चाहिए था। जो शनिवार को हुआ उससे देशवासी अपने को सुरक्षित पा रहे हैं। भविष्य में भी ऐसे ही निर्णय होते रहे, ताकि देश में आतंकी गतिविधियों पर लगाम लग सके।
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संसद हमले के शहादत को किया नमन
हरदोई। सैनिक पुनर्वास कल्याण कार्यालय में शनिवार के दिन फांसी की सूचना मिलने के बाद न सिर्फ इस बात पर खुशी जताई गई, बल्कि 13 दिसंबर 01 को संसद पर हुए हमले के बाद शहीद हुए पांच पुलिसकर्मी, संसद का एक सुरक्षाकर्मी, एक माली एवं 18 जख्मी लोगों को नमन किया गया। र्नल एचएन कौशन, अजय सिंह आदि मौजूद थे।
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पुलिस और खुफिया महकमा रहा सतर्क
हरदोई। अफजल गुरु की फांसी के बाद पुलिस व खुफिया विभाग सतर्क हो गया। सभी एसओ को अलर्ट कर दिया गया था। पुलिस के बड़े अफसर एसओ से जानकारी प्राप्त करते रहे। नगर में सीओ सिटी राजेश कुमार ने निरीक्षण किया। पूरे जिले में शांति रही। पूरे दिन पुलिस की गतिविधियां तेज रही।

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