‘तमंचे’ को असरदारों की दरकार

Hardoi Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
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हरदोई। शायद यह बात बहस का मुद्दा बन सकती कि शस्त्र लाइसेंस पाने को पात्रता का मानक क्या है। शस्त्र हासिल करने को तमाम आवेदन कार्यालय में फाइलों में गुम होते जा रहे हैं। रिपोर्ट दर रिपोर्ट लगने के बाद भी सैकड़ों आवेदनों का निस्तारण नहीं हो सका है। दस हजार से ज्यादा आवेदन पत्र निस्तारण की राह देख रहे है तो आवेदक असरदारों की चौखट पर दस्तक देने को मजबूर हो रहे हैं।
ऐसा नहीं कि जिले में शस्त्र लाइसेंस जारी नहीं हो रहे, पर जारी होने वाली लिस्ट में शायद ही किसी ऐसे आम आवेदक का नाम आया हो, जिसने किसी असरदार की चौखट पर दस्तक न दी हो। लिखा पढ़ी और दस्तावेजों में भले ही उन असरदार लोगों द्वारा भेजी जाने वाली सूची को जगह न दी जाती हो, पर सिफारिश लेटर पैडों की कितनी भरमार है, यह दफ्तर में पड़ी फाइलों में लगे टैग गवाही दे देते हैं। सूत्रों की माने तो कई लोग लाइसेंस पाने की हसरत लिए ही दुनिया से विदा हो गए, पर उनका सुनहरा ख्वाब पूरा नहीं हो सका। 40 लाख आबादी वाले इस जिले में करीब 30 हजार शस्त्र लाइसेंस हैं और दस हजार से ज्यादा शस्त्र लाइसेंस निस्तारण होने की राह देख रहे है।
इनमें से काफी संख्या में तो आवेदन पत्र ऐसे हैं, जिनकी रिपोर्ट की समय अवधि निकल चुकी है। उधर, लाइसेंस के मामले में सामान्य आवेदक ही दुखी नहीं है, बल्कि विरासत वाले आवेदनकर्ता भी परेशान हैं। बड़ी संख्या में विरासत के मामले लंबित हैं, पर जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। उधर, लाइसेंस के लिए लगने वाली पुलिस एवं राजस्व विभाग की रिपोर्ट को आवेदक धक्के खाने को मजबूर हैं। थानों से लेकर तहसील कार्यालयों तक हर रोज इस ओर लोग दौड़ते हैं और तमाम लोग मंजिल तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। उधर, किसी किसी की पूरी जिंदगी एक शस्त्र लाइसेंस पाने में गुजर जाती है तो तमाम किस्मत वाले ऐसे लोग है जिनके पास एक नहीं दो-दो शस्त्रों के लाइसेंस हैं।
बोले, अधिकारी
‘उनके कार्यकाल में अभी तक करीब दो सौ लाइसेंस जारी हुए हैं, जिसमें करीब सौ लाइसेंस विरासत के मामलों के है। ऐसा नहीं कि बिना सिफारिश के लाइसेंस नहीं बनवाया जा सकता, जो लोग सिफारिश लगवाते हैं वे भी तो आम लोग हैं और किसी को सिफारिश लगवाने से कैसे मना किया जा सकता है।’
अशोक शुक्ला, प्रभारी शस्त्र अधिकारी

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