अर्जियां निपटाने में हो रही सुस्ती

Hardoi Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
बांदा। हाल ही में लखनऊ की एक महिला आरटीआई एक्टीविस्ट को मुख्यमंत्री कार्यालय से जनसूचना अधिकार अधिनियम के तहत जानकारी दी गई थी कि मुख्यमंत्री को प्राप्त होने वाली जनता की अर्जियों पर मात्र 5-6 फीसदी पर कार्रवाई होती है। एक्टीविस्ट ने कहा था कि बसपा सरकार में यह औसत लगभग 65 फीसदी था लेकिन अब यहां भी सरकारी आंकड़ों से यह बात उजागर हुई है कि अधिकारी मुख्यमंत्री या शासन से प्राप्त मामलों के निस्तारण में भी पूरी दिलचस्पी नहीं ले रहे। मुख्यमंत्री के यहां से आए मामलों पर जनपद के अफसरों ने सिर्फ 46 फीसदी निस्तारण किया है।
मंगलवार को यहां प्रभारी जिलाधिकारी/सीडीओ वीरेश्वर सिंह ने जनपद के सभी उप जिलाधिकारियों और प्रमुख विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की। बैठक में मुख्यमंत्री, शासन, जनप्रतिनिधि, राजस्व परिषद, मुख्यमंत्री के युवा दर्शन और मंडलायुक्त व जिलाधिकारी से प्राप्त शिकायतों के निस्तारण की समीक्षा हुई। इसके आंकड़े हैरतनाक रहे। प्रदेश के मुखिया मुख्यमंत्री से जिला प्रशासन को प्राप्त मामलों में मात्र 46 फीसदी का निस्तारण हुआ। यह भी प्रशासन के दावे का आंकड़ा है। अब तक जिले के विभिन्न विभागों को मुख्यमंत्री के यहां से 67 मामले प्राप्त हुए हैं। माह में इनका निस्तारण मात्र 31 का हुआ है। 36 मामले अभी भी निपटारे को अवशेष हैं।
मुख्यमंत्री के जनता दर्शन के दौरान बांदा के लोगों द्वारा दी गई अर्जियों पर 57 फीसदी निस्तारण का दावा किया गया है। कुल 49 मामले प्राप्त हुए। इनमें से 28 निस्तारित बताए जा रहे हैं। 21 अभी भी निस्तारण को बाकी हैं। प्रदेश सरकार से कुल 48 मामले प्रशासन को प्राप्त हुए। इनमें 32 का निस्तारण बताया गया है। 16 अभी भी लंबित हैं। राजस्व परिषद ने 15 शिकायतें यहां भेजी थीं। इनमें 8 का निस्तारण हुआ। 7 अवशेष हैं।
जनप्रतिनिधियों द्वारा अधिकारियों को प्रेषित मामलों की और बुरी दशा है। अधिकारी इन पर तवज्जो नहीं दे रहे। हालत यह है कि जनप्रतिनिधियों ने 21 मामले अधिकारियों को भेजे। इनमें से अब तक मात्र 4 का निपटारा हुआ है। 17 लंबित हैं।
मंडलायुक्त के यहां से भी आने वाले मामलों को अधिकारी कुछ खास तवज्जो नहीं दे रहे। आयुक्त द्वारा भेजे गए मामलों में मात्र 32 फीसदी का निस्तारण होना बताया गया है। 71 में से 23 मामले निपटाए गए हैं। 48 शेष हैं। जिलाधिकारी द्वारा विभागों को भेजे जा रहे प्रकरणों में भी कुछ खास तवज्जो नहीं दी जा रही। विभिन्न विभागों को डीएम ने 61 मामले भेजे। इसमें मात्र 15 का निपटारा हुआ है। यह मात्र 24 फीसदी है। 46 मामले अफसरों की फाइलों में दबे पड़े हैं। प्रभारी डीएम ने विभागों और अफसरों के इस रवैए पर नाराजगी जताई है। लंबित मामलों को शीघ्र निपटाने का सख्त निर्देश दिया।

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