एफसीआई ने रिजेक्ट किया 1200 टन चावल

Hardoi Updated Tue, 04 Dec 2012 05:30 AM IST
हरदोई। जिले में एफसीआई की टीम ने मानक पर खरा न उतरने का कारण बताकर करीब 1200 टन लेबी चावल रिजेक्ट कर दिया है। लक्ष्य पूरा नहीं हो पाने से राइस मिल मालिकों के माथे पर चिंता की लकीरें पड़ रही है। उनका कहना है कि अधिकारी चावल रिजेक्ट का कारण नहीं बता रहे हैं। धान में डैमेज कंट्रोल के लिए चार प्रतिशत तक छूट का प्रावधान है तो चावल में तीन प्रतिशत डैमेज की छूट है।
सूत्रों का कहना है कि एफसीआई द्वारा रिजेक्ट किए जा रहे चावल में डैमेज प्रतिशत तीन से अधिक बताया जा रहा है। जबकि मिल मालिकों का कहना है कि ऐसा नहीं है और उन्हें परेशान किया जा रहा है। ऐसी स्थिति में लेबी चावल की आपूर्ति का लक्ष्य पूरा होने एवं कस्टम चावल की आपूर्ति होने पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। बताते चले कि कस्टम चावल आपूर्ति करने के मामले में जिले में हो रही सरकारी धान खरीद का धान मिल मालिकों को कुटाई शुल्क लेकर उसका चावल एफसीआई को देना है। यहां सरकारी धान खरीद का लक्ष्य 65500 एमटी है। इसके अलावा लेबी चावल में चावल आपूर्ति का लक्ष्य 1 लाख 26 हजार एमटी है। मगर बडे़ पैमाने पर चावल रिजेक्ट होने से अभी तक करीब 300 एमटी चावल की ही आपूर्ति हो पाई है। जानकारों की माने तो पीडीएस यानी सार्वजनिक वितरण प्रणाली के लिए गैर जिलों में चावल भेजने का कार्य करने वाले इस जिले को इस साल अपने यहां ही पीडीएस योजना में चावल वितरण के लिए बाहर से चावल मंगाना पड़ सकता है।
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क्या कहते हैं अधिकारी

राइस मिल मालिकों ने बड़े पैमाने पर चावल रिजेक्ट होने की जानकारी है। इसके संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।
वीपी सिंह, डिप्टी आरएमओ, चावल तथा धान खरीद की नोडल एजेंसी
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यूपी में चावल उद्योग का तबाह करना चाहती है एफसीआई - प्रदेश अध्यक्ष
यूपी राइस मिलर्स एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने कहा कि बडे़ पैमाने पर चावल रिजेक्ट करने का काम हरदोई सहित पूरे प्रदेश में हो रहा है ताकि यूपी से लक्ष्य अनुसार चावल की आपूर्ति न हो पाए। यह पूरा काम एफसीआई द्वारा पंजाब से ज्यादा से ज्यादा चावल खरीदने के लिए किया जा रहा है। एफसीआई यूपी में चावल उद्योग को तबाह करना चाहती है।
चावल रिजेक्ट होने से प्रभावित हो रहा धान का बाजार
बडे़ पैमाने पर चावल रिजेक्ट होने से इसका सीधा असर धान बाजार पड़ रहा है। आलम यह है कि धान का समर्थन मूल्य 1250 रुपए प्रति कुंतल होने के बाद भी बाजार चढ़ नहीं रहा है और खुले बाजार में धान का मूल्य 9 सौ से हजार रुपए प्रति कुंतल चल रहा है। सूत्रों का कहना है कि धान की सबसे ज्यादा खरीद मिल मालिक करते हैं। यहां 150 सौ से अधिक राइस मिले हैं। लेबी चावल आपूर्ति करने के लिए मिल मालिक बड़े पैमाने पर धान की खरीद कर उसका भंडारण करते हैं। इससे बाजार में उछाल आता है मगर चावल रिजेक्ट होने से बाजार में उछाल नहीं आ पा रहा है।

निरीक्षण के मानक
धान खरीद की नोडल एजेंसी के अनुसार चावल आपूर्ति के समय निरीक्षण के दौरान चावल की टूटन, नमी, छिलका, डैमेज दागी स्तर का निरीक्षण किया जाता है। चावल में 25 प्रतिशत से अधिक टूटन होने पर, 15 प्रतिशत से ज्यादा नमी होने पर 10 प्रतिशत से अधिक छिलका होने पर, 3 प्रतिशत से अधिक डैमेज दागी होने पर चावल रिजेक्ट कर दिया जाता है।

सरकारी धान की खरीद भी हो रही प्रभावित
चावल रिजेक्ट होने के चलते मिल मालिकों ने कस्टम चावल की आपूर्ति के लिए कुटाई के लिए मिलने वाले सरकारी धान को परखने के लिए निगाहें तेज कर दी है। नमी का स्तर ज्यादा होने को लेकर साफ तौर से धान की कुटाई करने से मना कर रहे हैं। इसका नतीजा है कि खरीद सेंटरों पर किसानों का धान खरीदने में काफी कड़ाई की जा रही है। आलम यह है कि लक्ष्य 65500 एमटी के सापेक्ष अभी तक महज 16 हजार एमटी धान की खरीद हुई है।

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