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‘भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी’

Hardoi Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
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शाहाबाद। नगर में आयोजित श्री राम लीला के मंचन में श्रीराम जन्मोत्सव का आयोजन हुआ। लीला के मंचन में तीनों लोकों पर विजय पाने के लिए रावण ने अपने भाई विभीषण, कुंभकरण के साथ सृष्टि के रचयिता परमपिता ब्रह्मा जी को प्रसन्न करने के लिए घोर तप करना प्रारंभ किया। तीनों भाइयों के घोर तप से ब्रह्मदेव प्रसन्न हुए और उन्होंने प्रकट होकर तीनों को वरदान मांगने को कहा जिस पर दशानन ने तीनों लोकोें में विजय पताका फहराने का वरदान मांगा। विभीषण ने भक्ति तथा कुंभकरण ने जीभ फिसलने पर छह माह में एक दिन जागने का वरदान मांगा। जिस पर ब्रह्मा जी एवमस्तु कहकर अंतर्ध्यान हो गए।
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इधर, ब्रह्मा जी से वरदान पाकर रावण ने ऋषि, मुनि तथा देवताओं को अपनी शक्ति से आतंकित कर दिया। यज्ञों का विध्वंस करने लगा। इसी बीच रावण के पुत्र मेघनाथ ने देवलोक पर चढ़ाई कर दी सभी देवताओं को बंदी बना लिया। असुरों के बढ़ते अत्याचार से चारों ओर त्राहि त्राहि का वातावरण पैदा हो गया।

सभी व्याकुल देवता जगपालक भगवान श्री विष्णु के सम्मुख पहुंचे और अपनी व्यथा सुनाई जिस पर भगवान विष्णु ने सभी देवताओं को धैर्य रखने के लिए कहा और बोले वह शीघ्र ही राक्षसों के समूल नाश के लिए अयोध्या के राजा दशरथ के घर जन्म लेंगे। राजा दशरथ के यहां प्रभु राम का जन्म होते ही जय जयकार होने लगी। इस मौके पर कमेटी के महामंत्री आदित्य प्रकाश, ऋषि कुमार मिश्रा, राजीव दीक्षित आदि मौजूद रहे।

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