मनरेगा के धन पर कुंडली मारे बैठे हैं जिम्मेदार

Hardoi Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
हरदोई। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गांरटी योजना में ग्राम पंचायतों में काम कराने के लिए पैसा भेजने में तो कोताही नहीं बरती जा रही है लेकिन ग्राम पंचायत स्तरों पर काम की प्रगति काफी दयनीय है। कई ग्राम पंचायतों में तो उपलब्ध राशि के सापेक्ष काफी कम पैसा खर्च किया गया है। कहीं ब्लाक से ही गांवों को धनरारिश जारी नहीं की गई है जिसको देखकर जिलाधिकारी का पारा चढ़ गया है। डीएम ने खंड विकास अधिकारियों पर नाराजगी व्यक्त कर उन्हें उपलब्धता के बावजूद कम धनराशि खर्च करने वाली ग्राम पंचायतों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्र सरकार की मनरेगा योजना के तहत गांवों में पैसा तो दिया जा रहा है लेकिन अब जिम्मेदार ही मनरेगा के कार्यों के प्रति रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ग्राम पंचायतों में नए कार्यों की शुरूआत कराना और ग्रामीणों को मांगने पर काम देने की जिम्मेदारी खंड विकास अधिकारियों की है लेकिन वे कार्यों में रुचि नहीं ले रहे हैं और ग्राम पंचायतों के लिए आई धनराशि को जारी नहीं कर रहे हैं। ऐसे में जिले की कई ऐसी ग्राम पंचायतें हैं जिनके खातों में काफी धनराशि मौजूद है लेकिन काम नहीं हो रहा है।
ग्राम पंचायतों में कार्यों की धीमी गति होने के कारण ही जिलाधिकारी अनिल कुमार ने काफी असंतोष व्यक्त किया है। इतना ही नहीं जिलाधिकारी ने तो मनरेगा में खराब प्रगति पर माधौगंज, बावन व मल्लावां के खंड विकास अधिकारी को समीक्षा बैठक में जमकर फटकार भी लगाई थी। वहीं अब जिलाधिकारी ने मनरेगा की राशि पर को खर्च करने में कंजूसी दिखाने वाली ग्राम पंचायतों की सूची तैयार कर प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैें। जिसके लिए पत्र जारी कर दिए गए हैं। बताया जाता है कि मनरेगा का पैसा उपलब्ध होने के बावजूद काम कराने में जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। जिलाधिकारी की इस कार्रवाई से जिम्मेदारों में हड़ंकप मच गया है।

इंसेट--या अगल बगल--
रोजगार सेवकों का छूटा अतिरिक्त काम से पीछा
क्रासर--
जाब चार्ट के अलावा काम न दिए जानेे के निर्देश
रोजगार सेवकों की शिकायत के बाद हुई कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो
हरदोई। मनरेगा के तहत ग्राम पंचायतों में योजना को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए तैनात ग्राम रोजगार सेवक ों को और राहत मिली है। मानदेय में बढ़ोतरी के बाद शासन ने अब उन पर काम के अतिरिक्त बोझ को भी कम कर दिया है। शासन ने जिलाधिकारी को लिखे पत्र में स्पष्ट कर दिया है कि ग्राम रोजगार सेवकों से जाब चार्ट के अतिरिक्त कार्य न लिया जाए।
ग्राम रोजगार सेवकों की ओर से शासन तक पहुंचायी गई शिकायतों में कहा गया था कि ग्राम पंचायताें में तैनात ग्राम विकास व पंचायत अधिकारी उनसे जाब चार्ट के अलावा अन्य योजनाओं का काम या सर्वे आदि कराने लगते हैं। इस बाबत संयुक्त सचिव गिरजा शंकर त्रिवेदी के द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि मनरेगा में ग्राम पंचायत स्तर पर रोजगार सहायकों से निर्धारित जॉब कार्ड के अतिरिक्त अन्य कोई कार्य न लिए जाने के संबंध में 7 अक्तूबर 11 को निर्देश जारी किए गए थे, तथा यह भी कहा गया था कि जनपद व विकास खंड के अधिकारी द्वारा समय समय पर निरीक्षण व भ्रमण करने के बाद इसकीसमीक्षा भी की जाए। लेकिन शायद ऐसा नहीं हो रहा है। उन शासनादेशों का पालन नहीं किया जा रहा है।
जिलाधिकारी व मुख्य विकास अधिकारी के पास पत्र पहुंचने के बाद अग्रिम कार्रवाई के लिए इन्हें खंड विकास अधिकारियों को भेज दिए गए हैं। कुल मिलाकर इन निर्देशों की सूचना मिलने के बाद ग्राम रोजगार सेवकों में खुशी की लहर दौड़ गई।

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