सेवानिवृत्त टीचरों की महकमे में सुनवाई नहीं

Hardoi Updated Wed, 10 Oct 2012 12:00 PM IST
हरदोई। परिषदीय विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षकों की समस्याओें पर महकमे के अधिकारी गंभीर होते नजर नहीं आ रहे। आलम यह है कि अर्से से बकाए का भुगतान तो दूर पेंशन भी समय से नहीं मिल पा रही है जिसके चलते जिले के सेवानिवृत्त शिक्षक मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे है। मंगलवार को ‘अमर उजाला’ को अपनी पीड़ा बताते बताते उनकी आंखें भर आईं। बोले अपने ही पैसे के लिए वह अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। यदि बकाया समय पर मिल जाता तो वह अपने परिवार का भरण पोषण तथा बीमारी आदि का खर्च वहन कर सकते है। पेश है बातचीत के कुछ अंश...
सेवानिवृत्त शिक्षक शिशुपाल सिंह ने कहाकि वह वर्ष 2007 में बावन ब्लॉक से रिटायर हुए थे। विभाग में उनका एरियर बकाया है। पेंशन भी समय पर नहीं मिल रही। जिसके चलते पैर में तकलीफ होने के बावजूद वह पैसे के अभाव मेें अच्छा उपचार नहीं करा पा रहे है। वर्ष 2006 में सांडी ब्लॉक से सेवानिवृत्त हुए राधा कृष्ण द्विवेदी ने कहा कि विभाग से बकाया न मिलने के कारण पर दो बेटियों के हाथ पीले करने में कठिनाई आ रही है। वर्ष 2006 में सुरसा ब्लॉक से सेवानिवृत्त हुए यदुनाथ सिंह ने कहाकि बेटें को पैसे की जरूरत होने पर 80 हजार रूपए 10 फीसदी ब्याज पर लिए थे। जो अभी तक चुकता नहीं कर पाए है। यदि विभाग से बकाया मिल जाता तो कर्ज अदा कर सकते थे। वर्ष 2007 में बावन ब्लॉक से सेवानिवृत्त हुए अमर सिंह सोमवंशी ने बताया कि पत्नी को हार्ट की बीमारी है जिसका उपचार फतेहगढ़ के एक हृदयरोग विशेषज्ञ से चल रहा है। उन्होंने दोनों वाल्ब बदलवाने की सलाह दी। न बदलवाने पर हालत और बिगड़ सकती है। उन्होेंने कहाकि पत्नी के उपचार में करीब 4 लाख का खर्च होगा। विभाग से उम्मीद थी वह भी टूटती नजर आ रही है। अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए उनकी आंखे भर आई।
वर्ष 2006 में नगर क्षेत्र के मोहनलाल जूनियर हाई स्कूल से सेवानिवृत्त हुए वंश गोपल सिंह ने कहाकि विभाग से बकाया मिलता तो वह पत्नी का उपचार करा सकते है। वर्ष 2003 में सुरसा ब्लॉक से सेवानिवृत्त हुए लालबिहारी पाल ने कहाकि सेवानिवृत्त होने के बाद उम्मींद थी कि बकाया मिलने पर बुढ़ापे का खर्चा ठीक से चल सकेगा। लेकिन बकाया न मिलने से यह आस भी टूटती नजर आ रही है। वर्ष 1999 में टोडरपुर ब्लॉक से सेवानिवृत्त हुए मेवाराम कटियार ने कहाकि आर्थिक तंगी के चलते वह पत्नी का उपचार नहीं करा सके। जिसकी उनकी पत्नी की बीमारी के चलते दो माह पहले मौत हो गई। वह भी अस्वस्थ रहते है। इसी तरह सेवानिवृत्त शिक्षक रामविलास सिंह कुशवाहा, बालकराम गुप्ता, वीरेंद्र कुमार, गंगूराम, हरीराम त्रिपाठी, रामभरोसे, रामविलास आदि ने अपनी पीड़ा व्यक्त की और कहाकि विभाग यदि समय पर पेंशन ही दे दें तो उनका गुजारा हो सकता है।

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