खाद के लिए दर-दर भटक रहा किसान

Hardoi Updated Tue, 09 Oct 2012 12:00 PM IST
हरदोई। कुदरत की मार से बेहाल किसानों को अब खाद के लिए भटकना पड़ रहा है। आलम यह है कि रबी की फसल के लिए जहां खाद नहीं मिल पा रही है वहीं आलू की बुवाई भी खाद न मिलने से पिछड़ती नजर आ रही है। जिला मुख्यालय स्थित प्रमुख खाद सेंटर एग्रो में भी स्टाक न होने से किसान निराश होेकर लौट रहे हैं। उधर, ग्रामीण इलाकोें में ऊं चीं दरों पर खाद की कालाबाजारी हो रही है।
जिला मुख्यालय स्थित एग्रो सेंटर पर खाद का वितरण ठप है। एग्रो के प्रबंधक रमेश कुमार का कहना है कि खाद 11 या 12 अक्तूबर आने पर वितरित की जाएगी जिससे आज काफी किसान निराश होकर लौट गए। उधर, कैनाल रोड स्थित क्रय विक्रय समिति के खाद गोदाम पर वितरण होने की जानकारी मिलते ही किसानों की भीड़ जमा हो गई लेकिन शाम तक काफी संख्या में किसानाें को बिना खाद के लिए लौटना पड़ा। निजी क्षेत्र में कई दुकानदारों द्वारा खाद की कालाबाजारी की जा रही है जिससे किसान काफी परेशान हैं।
संडीला तहसील क्षेत्र में पीसीएफ का केंद्र नेवादा व साधन सहकारी समिति भरावन की तरफ से ब्लॉक मुख्यालय के पीछे स्टोर है। दोनों ही केंद्रों पर सोमवार को ताला देखकर कई किसान निराश होकर चले गए। महीठा के प्रधान रामनरेश शुक्ल ने बताया कि खाद की दुकानें बंद रहने से किसानों को परेशानी हो रही है। पीसीएफ नेवादा के प्रभारी एसपी पांडे ने बताया कि स्टाक में करीब सौ बोरी एनपीके खाद उपलब्ध है, जिसमें से प्रतिदिन औसतन 35 से सौ बोरी खाद की बिक्री हो रही है। साधन सहकारी समिति भरावन के प्रभारी आरके सिंह ने बताया कि खाद की कोई उपलब्धता नहीं है, उधर, कोथावां में सरकारी दुकानों पर खाद की कोई उपलब्धता नहीं है। बाजार की प्राइवेट दुकानों पर यूरिया की बोरी 380 रुपया की बेची जा रही है। जबकि सूत्रों के अनुसार लाइसेंस के अनुबंध के अनुसार यूरिया की बोरी को मात्र 304 रुपया में बेचना होता है। इसी प्रकार बाजार में डीएपी और एनपीके पर निर्धारित दर से अधिक कीमत वसूली जा रही है। हालांकि एसडीएम गिरीश चंद्र श्रीवास्तव का कहना है कि किसानों को खाद की उपलब्धता में कोई समस्या नहीं आने दी जाएगी।
शाहाबाद तहसील क्षेत्र के पिहानी निवासी किसान महेंद्र शर्मा, हंसराज, अमरीक सिंह, शिवप्रकाश व शकील आदि ने बताया कि इस बार कस्बे में कोई सेंटर न होने से उन्हें खाद के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि डीएपी तो कहीं भी मौजूद नहीं है। इसके चलते गन्ना, सरसों, मसूर, चना
और आलू की फसलें प्रभावित हो रही हैं। इन लोगों के अनुसार पीसीएफ केंद्र राभा पर भी डीएपी मौजूद नहीं है। इस तरह उन्हें दुकानों पर मंहगे दामों पर खाद खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है। सवायजपुर तहसील क्षेत्र के कटियारी क्षेत्र में अधिकांश साधन सहकारी समितियां बंद पड़ी है। हरपालपुर की पलिया समिति पर बीतें दिनों 500 बोरी और पीसीएफ कें द्र कि र्तियापुर मेें 300 बोरी एनपीके आई थी। एडीओ सहकारिता विनोद कटियार ने बताया कि जल्द ही अन्य समितियों पर खाद वितरित कराई जाएगी।
बिलग्राम तहसील के मल्लावां क्षेत्र में पीसीएफ केंद्र पर 600 बोरी एनपीके आई थी जिसका वितरण शुरू कर दिया है। लेकिन यह खाद किसानों के लिए पर्याप्त होती नहीं नजर नहीं आ रही। राधेश्याम निवासी मिर्जापुर ने बताया कि दो एकड़ जमीन के लिए मात्र दो बोरी खाद मिल है जबकि उसे अधिक मात्रा में खाद की जरूरत है।
डीएपी न मिलने से समस्या और गहराई है। प्रभारी रजनी देवी ने बताया कि एक हेक्टेयर पर एक बोरी एनपीके किसान को दी जा रही है जबकि डीएपी व यूरिया का स्टाक मौजूद नहीं है। फिलहाल खाद के संकट से किसान परेशान नजर आ रहा है।

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