इक परिंदा हूं, दरख्तों पे बसर कर लूंगा...

Hardoi Updated Mon, 08 Oct 2012 12:00 PM IST
पिहानी (हरदोई)। हाशमी फाउंडेशन के मुशायरे में शायरों ने जिंदगी के विभिन्न पहलुओं को शायरी में पेश किया। अध्यक्षता करते हुए बुजुर्ग उर्दू शायर मौलाना आबिद असअदी ने कहा कि उर्दू की लोकप्रियता के लिए इस तरह के आयोजन जरूरी हैं। हाफिज सलीमुल्लाह असलम ने उर्दू गजल के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह हिंदुस्तानी जुबान है, जिसकी खिदमत हर जाति-धर्म के लोग कर रहे हैं। इसे एक वर्ग विशेष से जोड़ना गलत है। आयोजक सलमान जफर ने नए लिखने वालों से अपील की कि कथित शायरों की महफिल में बैठने से परहेज किया जाए।
इसके बाद हकीमुद्दीन हैरत ने नात शरीफ पेश कर मुशायरे का आगाज किया। इस शेर पर खूब तारीफें हुईं- सीपियां भी करती हैं, कश्तियां भी करती हैं, जिक्र उनका दरिया में मछलियां भी करती हैं। इसके बाद गजल का दौर शुरू हुआ। वयोवृद्ध शायर मौलाना आबिद असअदी का यह शेर बार- बार सुना गया- सच तो हर हाल में खुद राह बना लेता है, सच की ताकत किसी तलवार की मोहताज नहीं। हाफिज सलीमुल्लाह असलम ने अपने इस शेर पर बेपनाह तारीफ हासिल की- नाखुदा पर नहीं, उस पर है भरोसा मुझको, अब यह कश्ती किसी पतवार की मोहताज नहीं। लईक पिहानवी ने है मेरे बच्चों के जब खौफे खुदा दिल में लईक, परदादारी दरो- दीवार की मोहताज नहीं। बेकल पिहानवी ने मौजूदा दौर की बुराइयों को अपनी शायरी का मौजू बनाया। इस शेर पर खूब तालियां बजीं- बेहयाई का चलन ऐसा जहां में फैला, आबरू बिकने को बाजार की मोहताज नहीं। नौजवान शायर सलमान जफर की रूमानी गजल सुनकर सभी अपने चाहने वालों में खो गए- इस शेर पर उन्हें जमकर दाद मिली- हर घड़ी साथ मैं रखता हूं एहसास तेरा, मेरी आंखें तेरे दीदार की मोहताज नहीं। हैरत पिहानवी के बेहतरीन कलाम और दिलकश आवाज को सुनकर सभी मंत्रमुग्ध हो गए। हास्य- व्यंग्य के शायर चांद देहलवी ने अपने इस शेर पर महफिल को ठहाके लगाने पर मजबूर कर दिया- उसकी बेटी भी अगर प्यार की मोहताज नहीं, पीठ अपनी भी अब मार की मोहताज नहीं, क्या बताऊं कि पिटा हूं हर इक चौराहे पर, मेरी शोहरत किसी अखबार की मोहताज नहीं। जमाल शहनवाज ने शेर पढ़ा- इक परिंदा हूं, दरख्तों पे बसर कर लूंगा, मेरी हस्ती किसी दीवार की मोहताज नहीं।
कार्यक्रम में इसके अलावा साजिद पिहानवी, हकीमुद्दीन हैरत, मोहम्मद अरसलान तथा एमए गालिब ने भी शेर सुनाएं। इस दौरान मुफ्ती नजीब अहमद कसमी, राजन कुशवाहा, मुराद अली, अबरार, मिन्हाजुद्दीन अंसारी, अब्दुल हादी, वकी अहमद व अनीस आदि मौजूद थे। संचालन एमएफ कैफी ने किया। अंत में आयोजक सलमान जफर ने सभी के प्रति आभार जताया।

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