ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की नियम विपरीत खरीद में विजिलेंस जांच के आदेश

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Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 May 2019 11:27 PM IST

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हरदोई। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) की आड़ में ग्राम पंचायतों में नियम विपरीत कूड़ेदान खरीदे जाने के मामले में शासन विजिलेंस (राज्य सतर्कता अधिष्ठान) टीम से जांच कराएगा। टीम से जुड़े अधिकारी ने शनिवार को पंचायत राज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से कूड़ेदान प्रकरण की जानकारी भी ली। विजिलेंस जांच के आदेश होने की खबर मिलते ही कूड़ेदान खरीद में संलिप्त प्रधानों और सचिवों में खलबली मच गई है।
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जिले में एक विशेष फर्म ने अलग-अलग विकास खंडों की ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवाए थे। फर्म के जिम्मेदारों ने ग्राम सचिवों और प्रधानों पर तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह के माध्यम से भुगतान के लिए दबाव बनाया था। नतीजा यह हुआ कि बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों से ऐसी चेक कटवा लीं गईं, जिनमें भुगतान की राशि तो अंकित थी, लेकिन फर्म का नाम नहीं था। फर्म का नाम जिला मुख्यालय पर बावन विकास खंड के स्वच्छ भारत मिशन के एक कर्मचारी ने भरा था। अमर उजाला में खबरें छपने पर नियम विपरीत कूड़ेदान की खरीद का मामला शासन तक पहुंचा और तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह को निलंबित कर दिया गया था। वह वर्तमान में पंचायत राज निदेशालय से संबद्ध हैं। डीपीआरओ आलोक कुमार सिन्हा ने बताया कि विजिलेंस से कुछ अधिकारी आए थे और उन्होंने कूड़ेदान के संबंध में जानकारियां ली हैं। इससे ज्यादा कुछ भी बताने से डीपीआरओ ने इनकार किया।


अमर उजाला ने किया था पूरे खेल का खुलासा
जिले में स्वच्छ भारत मिशन की आड़ में शुरू हुए गोलमाल का खुलासा अमर उजाला ने 17 जुलाई 2018 के अंक में कूड़ेदान आपूर्तिकर्ता फर्म का पता नहीं, कटवाए चेक शीर्षक से किया था। इस पर जिलाधिकारी पुलकित खरे ने तत्कालीन जिला पंचायत राज अधिकारी अनिल कुमार सिंह को कूड़ेदानों का भुगतान न करने के आदेश जारी किए थे। इसके बावजूद भाजपा की एक महिला नेता के दखल पर तीन माह बाद फिर से जनपद की अलग-अलग ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान रखवा दिए गए और फिर तत्कालीन डीपीआरओ के माध्यम से भुगतान कराया जाने लगा। चार फरवरी 2019 को डीएम की रोक के बाद भी कूड़ेदानों का भुगतान शीर्षक से खबर प्रकाशित की गई। फरवरी में स्वच्छता की आड़ में कमीशन का खेल खबर छपी। साथ ही दो कूड़ेदान तीन हजार के, चेक 9999 रुपये पर भी खबर दी। शासन ने अमर उजाला की खबरों को संज्ञान में लेकर तत्कालीन डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह को पहले जिले से हटाकर निदेशालय संबद्ध कर दिया और एक मार्च को निलंबित कर दिया था।

महिला नेता के जतन भी नहीं आए काम
कूड़ेदान आपूर्ति करने वाली फर्म में जिले की रहने वाली एक महिला नेता भी साझेदार हैं। ग्राम पंचायतों को दिए गए बिलों के मुताबिक लखनऊ के गोमतीनगर के विभूतिखंड में फर्म का कार्यालय है। महिला नेता ने अपने प्रभाव से भुगतान करा लेने और पूरे मामले को दबाने के हर संभव जतन किए। यहां तक कि एक वरिष्ठ अधिकारी को उन्होंने रौब में लेने में भी कसर नहीं छोड़ी, लेकिन उक्त अधिकारी ने कोई मदद करने से साफ इनकार कर दिया। इतना ही नहीं महिला नेता ने कई ग्राम प्रधानों और ग्राम सचिवों पर भी रौब जमाकर चेकें कटवा लीं।

मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में लिए जाएंगे ग्राम प्रधानों और सचिवों के बयान
शासन ने जब अनिल कुमार सिंह को निलंबित किया था तो पूरे मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी सीतापुर संदीप कुमार को सौंपी थी। सीतापुर के सीडीओ ने भी पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो सीतापुर के सीडीओ संदीप कुमार ने हरदोई के सीडीओ आनंद कुमार को पत्र भेजकर कहा है कि प्राथमिक तौर पर जिन ग्राम पंचायतों में कूड़ेदान की आपूर्ति और भुगतान की पुष्टि हुई है, उन सभी प्रधानों और सचिवों के बयान मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में कराए जाएं। शनिवार को सीडीओ आनंद कुमार और डीपीआरओ आलोक सिन्हा ने बयान को लेकर सभी प्रधानों और सचिवों को एक साथ बुलाने को लेकर भी चर्चा की। लगभग 200 लोगों के बयान दर्ज होने हैं।

इतने कूड़ेदानों का हुआ भुगतान
विश्वस्त सूत्रों की मानें तो बावन विकास खंड में 250, टड़ियावां में 207, सुरसा में 104, कछौना में 38, बिलग्राम में 35, हरपालपुर में 15, भरावन में 19, भरखनी में पांच, हरियावां में 17, अहिरोरी में छह और बेंहदर में दो कूड़ेदानों का भुगतान किया गया है। इससे इतर रियावां विकास खंड की कई ग्राम पंचायतों में भुगतान बाद में हुआ, जिसकी जांच अलग से की जाएगी।

सीडीओ को डीपीआरओ ने नहीं दी थी जानकारी
विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि पूरे प्रकरण के अमर उजाला में प्रकाशित होने के बाद मुख्य विकास अधिकारी आनंद कुमार ने डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह से प्रकरण की जानकारी मांगी थी। बाकायदा पत्र लिखकर कूड़ेदान की आपूर्ति के बारे में सवाल किया था, लेकिन डीपीआरओ ने कोई भी जानकारी सीडीओ को नहीं दी।

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