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बंदरों के हमले में स्कूटी से गिरकर बी-फार्मा के छात्र की मौत

Ghaziabad Bureau गाजियाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 23 Jun 2022 10:42 PM IST
पिलखुवा में बंदरों के हमला से हुई छात्र की मौत के बाद बिलाप करते परिजन।
पिलखुवा में बंदरों के हमला से हुई छात्र की मौत के बाद बिलाप करते परिजन। - फोटो : PILAKHWA
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बंदरों के हमले में स्कूटी से गिरकर बी-फार्मा के छात्र की मौत

पिलखुवा। शादी समारोह में शामिल होकर स्कूटी से घर लौट रहे बी-फार्मा के छात्र पर बंदरों के झुंड ने हमला बोल दिया, जिसके कारण स्कूटी अनियंत्रित होकर गिर गई, सड़क पर पड़ी ईंट से छात्र का सिर टकरा गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना पाकर मौके पर पहुंचे परिजनों ने घायल को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इकलौते पुत्र की मौत से घर में कोहराम मच गया, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल है।
मोहल्ला जवाहर बाजार निवासी अनिल पहलवान का 21 वर्षीय पुत्र कुनाल उर्फ गुड्डू बी-फार्मा का छात्र था। बुधवार की रात करीब डेढ़ बजे कुनाल हाईवे स्थित एक मैरिज होम में आयोजित शादी समारोह में शामिल होकर स्कूटी से घर लौट रहा था। रास्ते में कोतवाली के पास गांधी बाजार स्थित लाला गंगा सहाय की धर्मशाला के पास अचानक बंदरों के झुंड ने उस पर हमला कर दिया। बंदरों से बचने के चक्कर में उसकी स्कूटी फिसल गई और सड़क पर पड़ी ईंट से उसका सिर टकरा गया। परिजनों ने उपचार के लिए कुनाल को अस्पताल में भर्ती कराया, जहां पर चिकित्सकों ने उसे मृतक घोषित कर दिया।

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हेलमेट होता तो शायद बच जाती जान
घटना के समय छात्र कुनाल ने हेलमेट नहीं पहना था। लोगों का कहना था कि अगर कुनाल ने हेलमेट पहना होता तो चोट ही लगती, जान नहीं जाती। कुनाल की मौत सिर में चोट लगने के कारण हुई है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि स्कूटी की गति बहुत तेज नहीं थी।
नगर पालिका के खिलाफ लोगों में रोष
शहर के बंदरों को पकड़ने की जिम्मेदारी नगर पालिका परिषद की होती है। बजट के लिए पालिका बोर्ड बैठक में प्रस्ताव पास होता है और उसके बाद ठेका छोड़ा जाता है। सुनील गर्ग का कहना है कि पिछले एक दशक से बंदरों को पकड़ने के लिए कोई अभियान नहीं चला गया है। शहर का ऐसा कोई मोहल्ला, गली नहीं है, जहां बंदरों का उत्पात न हो। आए-दिन बंदरों का झुंड किसी न किसी पर हमला बोल देता है। हालात यह है कि लोगों ने मकानों की छत पर जाना बंद कर दिया है। बच्चे घर के बाहर खेलने से घबराते हैं। पालिकाध्यक्ष और अधिशासी अधिकारी से शिकायत कर बंदरों को पकड़ाने की मांग की जाएगी। सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक चंदनप्रकाश का कहना है कि रोजाना करीब 45 से 55 लोग बंदर व कुत्तों के काटने से घायल मरीज अस्पताल आते है। जिन्हें एंटी रैबीज का इंजेक्शन दिया जाता है।
कोट-
पालिका के अधिशासी अधिकारी विकास सेन का कहना है कि बंदर पकड़वाने और उन्हें छोड़ने के लिए लखनऊ स्तर से अनुमति लेनी होती है। बंदरों को छुड़वाने के लिए स्थान नहीं मिल पा रहा है, ऐसे में अभियान में भी देरी हो रही है।

मृतक छात्र कुनाल उर्फ गुड्डू का फाइल फोटो।

मृतक छात्र कुनाल उर्फ गुड्डू का फाइल फोटो।- फोटो : PILAKHWA

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