बदलती रही सरकार, 42 साल से लटका है निर्माण

Hapur Updated Mon, 05 May 2014 05:30 AM IST
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हापुड़। ये विभागीय अफसरों की लापरवाही की इंतेहा है जो ब्रजघाट के विकास में सबसे बड़ी बाधा है। इसकी बानगी ब्रजघाट में 42 साल से लटका इंटरस्टेट बस अड्डा है जिसके लिए 1972 से जमीन परिवहन निगम के पास है लेकिन आज तक उस पर निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हो सका। हरिद्वार की तर्ज पर गढ़ के विकास की महायोजना की कवायद शुरू हुई तो अब आस जगी इसका निर्माण शुरू होने की। साथ ही चालकों के लिए प्रशिक्षण केंद्र की भी जो इसी योजना में शामिल कर लिया गया है। यह प्रदेश में कानपुर के बाद दूसरा प्रशिक्षण सेंटर होगा।
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मालूम रहे कि गढ़ क्षेत्र को हरिद्वार की तर्ज पर पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किए जाने की योजना अब तैयार होने लगी है। इसमें क्षेत्रीय सौंदर्यीकरण के साथ-साथ सुविधाएं बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है। इसमें ब्रजघाट में अंतर राज्यीय बस अड्डे की स्थापना को भी प्रमुखता से शामिल किया गया है। बीती 23 अप्रैल को डीएम ने इस मुद्दे पर अफसरों से प्रगति रिपोर्ट तलब की थी। बीते दिन सौंदर्यीकरण पर अफसरों ने अपने प्रस्ताव और कार्ययोजना को आगे बढ़ाया। रविवार को रोडवेज के एआरएम ने बस अड्डे की बाबत अपनी रिपोर्ट पेश की।
एआरएम गढ़मुक्तेश्वर भुवनेश्वर कुमार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि परिवहन निगम ने वर्ष 1972 में 5.19 हेक्टेयर भूमि को अधिग्रहण किया था। इस भूमि पर इंटर स्टेट बस अड्डा परिवहन निगम मुख्यालय/शासन से प्रस्तावित है। लेकिन अभी नक्शा पास नहीं हुआ है। डेढ़ साल पहले चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान भी बनाने का प्रस्ताव था जो अब इसी बस अड्डे के कैंपस में स्थापित किए जाने की योजना है। उन्होंने बताया कि इस भूमि के लिए वित्तीय उपलब्धता क आंकलन निगम मुख्यालय से ही संभव है। इस समय गढ़ डिपो के पास 77 बसें हैं। जबकि खाली पड़ी निगम की भूमि के आगे से प्रतिदिन 500 बसें गुजरती हैं। गढ़मुक्तेश्वर डिपो से रवाना होने वाली बसों में करीब 12500 दैनिक यात्री प्रतिदिन सफर करते हैं। बस स्टैंड की स्थापना की कार्यवाही परिवहन निगम की ओर से गतिशील है।
म्यूजियम के लिए पुरातत्व विभाग से जानकारी मांगी
हापुड़। ब्रजघाट धार्मिक नगरी में संग्राहलय/म्यूजियम बनाए जाने के लिए नगर पालिका गढ़मुक्तेश्वर की अधिशासी अधिकारी ने पुरातत्व विभाग के अफसरों से जानकारी मांगी है कि कितनी भूमि की आवश्यकता पड़ेगी और क्या आवश्यक कार्यवाही की जानी है?

डेढ़ साल पहले बना था प्रशिक्षण केंद्र का प्रस्ताव
हापुड़। रोडवेज ने ब्रजघाट में 1972 में अधिग्रहत भूमि पर चालक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान बनाने के लिए करीब डेढ़ साल पहले प्रस्ताव शासन को भेजा था। वर्तमान में रोडवेज का एक मात्र प्रशिक्षण एवं अनुसंधान केन्द्र कानपुर में है। रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक गढ़मुक्तेश्वर भुवनेश्वर कुमार ने बताया कि फरवरी माह में ही उन्होंने कार्यभार ग्रहण किया है। इस भूमि के बारे में जानकारी की गई तो पता चला कि डेढ़ साल पहले प्रशिक्षण केन्द्र के लिए प्रस्ताव भेजा गया है। इस संबंध में वह रोडवेज के वरिष्ठ अधिकारियों से वार्ता करेंगे ताकि जल्द ही प्रस्ताव पास हो सके।
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