सृष्टि में विवेक की आवश्यकता : दिव्यानंद

Hapur Updated Fri, 25 Oct 2013 05:42 AM IST
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हापुड़। ‘सृष्टि में विवेक की आवश्यकता होती है। गर्भाधान यदि उचित समय में होगा तो संतान विवेकी और तपस्वी होगी। ’उक्त विचार गांव बाबूगढ़ स्थित मुन्ना प्रधान के आवास पर जगदगुरु शंकराचार्य दिव्यानंद महाराज ने व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि अलग अलग स्वरुप में प्रभु की भक्ति हो सकती है परंतु प्रभु तो एक ही है। सत्य तो एक ही है,चाहे उसे निर्गुण के रुप में जाने चाहे सगुण के रुप में जाने,किंतु सत्य एक ही है। धैर्यपूर्वक साधना पथ पर बढ़े। धर्म उद्देश्य है। किस उद्देश्य से धर्म में लगे हैं। उन्होंने कहा कि स्वर्ग एक क्षण का सुख है बाद में तो दुख ही दुख है। यदि सुख है तो केवल भगवान के नाम में सुख है। इस संसार में सुख प्राप्त हो सकता है तो केवल प्रभु की शरण में जाकर ही मिल सकता है। इस मौके पर पूर्व प्रधानाचार्य राजकुमार शर्मा, योगिंद्र सिंह, नरेश चौधरी, राजबाला चौधरी, धनवीर शर्मा, राम नारायण मधुर और निरंजन सिंह शास्त्री मौजूद रहे।
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