पहले आंधी फिर बारिश, गेहूं की फसल को नुकसान

Hapur Updated Fri, 29 Mar 2013 05:32 AM IST
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हापुड़। सूरज ढलते ही पहले तेज हवा चली फिर काले बदरा घिर आए। कुछ देर बाद गरजते बादलों ने धरती की तपिश को शांत कर दिया। बृहस्पतिवार शाम अचानक तेज आंधी और बारिश से जहां जनजीवन प्रभावित हुआ, वहीं पकने को तैयार गेहूं की फसल को नुकसान से किसान परेशान हो गये। दिनभर मौसम काफी सुहावना रहने के बाद शाम को बादल छा गये और तेजी आंधी शुरू हो गई। इस आंधी के चलते कुछ ही देर बाद जोरदार बारिश शुरू हो गई। सबली के किसान राजेश्वर दयाल त्यागी का कहना है कि गेहूं के जिन खेतों में पिछले दो दिनों में सिंचाई की गयी हैं, उनमें गेहूं की फसल ढहने से भारी नुकसान पहुंचेगा। क्योंकि फसल के ढहने से गेहूं का दाना कमजोर पड़ जायेगा जिससे पैदावार पर बुरा असर पड़ेगा। चिकित्सक गौरव मित्तल का कहना है कि बारिश पड़ने से गर्मी सर्दी होने से बच्चों और वृद्धों के बीमार पड़ने का का खतरा है।
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मौसम की अंगड़ाई से किसानों की उड़ी नींद
गढ़। बारिश शुरू होने से ओलावृष्टि का खतरा बढ़ गया है, जिससे किसानों को फसल चौपट होने का खतरा सता रहा है।बृहस्पतिवार को दिन ढलते ही मौसम ने फिर से अंगड़ाई बदल ली, जिससे मेहनतकश किसानों के होश फाख्ता हो उठे हैं। चुन्ने खां पौपाई, अनिल चौधरी सादुल्लापुर, मुखिया मदहत अली बदरखा, कृष्ण त्यागी झड़ीना, अशरफ मुखिया गढ़ का कहना है कि पहले बिजली संकट और सूखा जैसी स्थिति ने रुलाया था। किसानों का कहना है कि इस वर्ष 20 जनवरी, 5 फरवरी और 24 मार्च को जबरदस्त ओलावृष्टि होने से फसल बर्बाद हो चुकी हैं। सिंभावली शुगर मिल की कृषि प्रयोगशाला के इंचार्ज हरविंद्र सिंह ने बताया कि औसत से अधिक तापमान होने से मौसम चक्र लड़खड़ा रहा है। बृहस्पतिवार को अधिकतम तापमान 34.4, न्यूनतम 14.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

किसानों को सता रही नुकसान की आशंका
पिलखुवा। आसमान में बीते कई दिन से मंडरा रहे बादलों ने बृहस्पतिवार की शाम साढ़े छह बजे झमाझम बारिश शुरू कर दी। तेज हवा से जिन खेतों में गेहूं की फसल गिरेगी उनमें भारी नुकसान होगा। बीते एक सप्ताह से तापमान लगातार चढ़ रहा था। जिसके चलते लोगों को दिन में गर्मी में खूब अहसास हो रहा था। करीब छह बजे तेज हवा के साथ धूल के गुबार उड़ने लगे और साढ़े छह बजे झमाझम बारिश शुरू हो गई। दहपा के किसान मुखिया आसमौहम्मद का कहना है कि खेतों में गेहूं की फसलों में बालियां निकल चुकी हैं और दाना मोटाई ले रहा है। जिन खेतों में इस समय फसल गिरती है। उत्पादन गिरना तय है। परतापुर के किसान सतबीर कहते हैं कि बेमौसम जब भी बारिश होती है, किसानों को हानि ही होती है।

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