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दूसरे दिन भी निकला यात्रियों का पसीना

Hapur Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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हापुड़। अनुबंधित बस चालकों की हड़ताल का असर शनिवार को भी दिखा। दूसरे दिन भी बसों के समय से नहीं मिलने और बस में चढ़ने की मारामारी से यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बसों के इंतजार में घंटों बस स्टॉप पर खड़े रहने वाले यात्रियों को मजबूरी में डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ा। वहीं यूनियन अध्यक्ष ने अधिकारियों द्वारा मांग नहीं मानने पर हड़ताल जारी रखने की घोषणा की है।
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उल्लेखनीय है कि यूपी अनुबंधित बस ओनर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने 30 जनवरी को परिवहन आयुक्त को अपनी पांच मुख्य मांगों को नहीं मानने पर हड़ताल का नोटिस दिया था। इस पर 7 फरवरी की रात तक भी कोई निर्णय नहीं होने पर जनपद की अनुबंधित बसों के चालकों ने चक्का जाम कर हड़ताल करने का निर्णय लिया था। अनुबंधित बसों की हड़ताल होने पर रोडवेज निगम ने जिन मार्ग पर अनुबंधित चलती हैं, उन पर बसों के फेरे बढ़ाने की घोषणा की थी।

शनिवार को अधिकांश कार्यालयों में छुट्टी होने के कारण यात्रियों की संख्या बस स्टापों पर कम ही रही, लेकिन जो यात्री बस स्टॉप पर खड़े थे, उन्हें समय से बस नहीं मिलने से परेशानियों का सामना करना पड़ा। यात्रियों का कहना था कि घंटों इंतजार करने के बाद रोडवेज की बसें आ रही हैं। जो बसें आ भी रही हैं, वह खचाखच भरी रह रही हैं। ऐसे में उन्हें बस में चढ़ने के लिए काफी दिक्कत हो रही है।
वहीं, यूनियन अध्यक्ष उमेश मावी का कहना है कि डीजल के दाम बढ़ने के बाद एक अनुबंधित को चलाने में 400 से 500 रुपये का घाटा हो रहा है। ऐसे में अधिकारियों द्वारा उनकी मांग नहीं मानना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने घोषणा की है कि जब तक लखनऊ में बैठे परिवहन निगम के अधिकारी उनकी मांगों को नहीं मानते है उनकी हड़ताल जारी रहेगी। एआरएम सीपी कमल का कहना है कि अनुबंधित बसों के पदाधिकारियों से वार्ता की जा रही है। यदि उन्होंने यात्रियों को परेशान किया तो वह बस संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि यात्रियों को किसी भी हाल में परेशान नहीं होने दिया जाएगा।

डग्गामार वाहन चालकों ने मनमाना किराया वसूला
हापुड़। अनुबंधित बसों के नहीं चलने से हापुड़, बुलंदशहर, दिल्ली, मेरठ आदि स्थानों पर जाने वाले यात्रियों ने मजबूरी में डग्गामार वाहनों का सहारा लिया। इन बसों के संचालकों ने यात्रियों से मनमाफिक किराया वसूला।


ट्रैक्टर ट्रालियों से स्कूल जा रहे बच्चे
पिलखुवा। पुलिस-प्रशासन द्वारा जुगाड़ बंद कराने से स्कूली बच्चों के सामने यात्रा का संकट खड़ा हो गया है। स्थिति यह है कि परेशान छात्र-छात्राओं को ट्रैक्टर-ट्राली से स्कूल जाना पड़ रहा है। उल्लेखनीय है कि पुलिस-प्रशासन ने दो दिन पहले डग्गामार वाहनों के खिलाफ अभियान चलाया। इस अभियान में उन जुगाड़ों को भी बंद कर दिया। इसी से देहात क्षेत्र के छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं। धौलाना तहसील क्षेत्र के करीब पन्द्रह स्कूलों में तीस के लगभग जुगाड़ बच्चों के यातायात व्यवस्था में लगे हैं। जुगाड़ बंद होने के कारण फगौता, दहपा, कमालपुर, अनवरपुर, नयागांव और खेड़ा आदि से छात्र-छात्राएं स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। जुगाड़ बंद होने के कारण शामली और परतापुर गांव के ग्रामीण् बच्चों को स्कूल लाने और ले जाने के लिए ट्रैक्टर-ट्राली का सहारा ले रहे हैं। भाजपा नेता यशपाल सिंह का कहना है कि देहात में गरीब लोग रहते हैं। स्कूली बस का खर्च 600 रुपये प्रति बच्चे आता है। इतना वह कहां से देंगे। वीआईपी इंटर कालेज की प्रिंसिपल बीना शर्मा का कहना है कि बच्चों के सामने यात्रा का संकट खड़ा हो गया है।

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