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एचपीडीए की हालत खस्ता, लैंड बैंक नहीं

Hapur Updated Sat, 09 Feb 2013 05:31 AM IST
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नई योजनाओं के लिए नहीं मिल रही भूमि, खर्चों में कटौती कर रहा प्राधिकरण
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एनसीआर बोर्ड और जीडीए का कर्ज भी चुकाना है
हापुड़ (ब्यूरो)। हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) की स्थापना के समय तैनात रहे अधिकारियों की लापरवाही के कारण व्यापक लैंड बैंक की व्यवस्था नहीं करने के कारण प्राधिकरण की हालत अब खस्ता होती जा रही है। नई योजनाओं के लिए आसानी से भूमि नहीं मिलना बड़ी समस्या बनी हुई है। उधर, प्राधिकरण द्वारा विकसित दोनों कालोनियों में भूखंड निवेशकों के हाथों में चले जाने के कारण 17 साल में एक भी कालोनी आबाद नहीं हो सकी है, जबकि एनसीआर और जीडीए से लिये कर्ज की किश्तों की समय से अदायगी भी प्राधिकरण को करना जरूरी है।
करीब 17 साल पहले एचपीडीए की स्थापना के समय प्राधिकरण के अधिकारियों ने आनंद विहार और प्रीत विहार आवासीय योजनाओं के लिए सबसे पहले डिमांड सर्वे निकाला था, जिसमें लगभग 9 हजार लोगों ने फार्म भरकर अपनी रुचि भूखंड लेने में दर्शायी थी। बावजूद इसके प्राधिकरण के अधिकारियों ने सिर्फ अच्छेजा, श्यामनगर चमरी और सबली के कुछ भाग तक ही प्राधिकरण की आवासीय योजना को सीमित रखा। पिलखुवा में सिर्फ टैक्सटाइल सेंटर के लिए और गढ़मुक्तेश्वर में भी बांगड़ आवासीय योजना के लिए भू अर्जन की कार्यवाही प्रारंभ की। नतीजा यह रहा कि जब-जब प्राधिकरण ने आवासीय योजना लांच की, तब-तब आवेदकों में से बमुश्किल 20 प्रतिशत लोगों को ही भूखंड मिल सके। वह भी निवेशकों के हाथों में चले गए, इसीलिए अब तक प्रीत विहार फेस एक और दो तथा आनंद विहार आबाद नहीं हो सकी हैं। उधर, नया भू अर्जन कानून आने के कारण प्राधिकरण को नई योजनाओं के लिए भूमि नहीं मिल पा रही है। इसी कारण प्राधिकरण की ट्रांसपोर्ट नगर और औद्योगिक नगरी योजना खटाई में पड़ी हैं। नई योजनाएं शुरू नहीं होने से प्राधिकरण की हालत खस्ता होती जा रही है। हालांकि प्राधिकरण के अधिकारी अपनी संपत्तियों को बेचकर और बेचे गए भूखंडों की किश्तों से आ रहे पैसे से अपना काम चला रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण पर एनसीआर और जीडीए का कर्ज भी काफी है।

प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्रीराम का कहना है कि एनसीआर बोर्ड और जीडीए से 50-50 करोड़ रुपये वर्ष 2007 और 2008 प्राधिकरण ने बतौर कर्ज लिए थे। इस कर्ज को उतारने के लिए हर साल किश्त जा रही है। उन्होंने बताया कि जीडीए को ब्याज सहित 25 करोड़ रुपया लौटाया जा चुका है। एक किश्त और मार्च में जाने के बाद जीडीए का मूलधन 21.43 करोड़ रह जाएगा, जबकि एनसीआर बोर्ड को 28.57 करोड़ रुपये मूलधन और 14.54 ब्याज सहित कुल 43.11 करोड़ रुपया लौटाया जा चुका है। उनका मानना है कि यह किश्त समय पर दिया जाना जरूरी है, इसलिए खर्चों में काफी कटौती की जा रही है।

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