गन्ना तौल नहीं होने पर किसानों में गुस्सा

Hapur Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
हापुड़। श्यामपुर के किसान गन्ने की खरीददारी नहीं होने पर गुस्से में हैं। मंगलवार को उन्होंने गांव स्थित सिंभावली शुगर मिल के क्रय केंद्र पर अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाकर प्रदर्शन किया। किसानों ने मिल अधिकारियों से जल्द तौल शुरू कराने की मांग की है। मंगलवार की सुबह गांव श्यामपुर के किसान गन्ने की तौल कराने के लिए सिंभावली शुगर मिल के क्रय केंद्र पहुंचे लेकिन केंद्र बंद था। किसानों ने बताया कि क्रय केंद्रों पर काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पर्चियां समय से नहीं मिलने के कारण गेहूं की बुवाई में देरी हो रही है। ऐसे में तौल बंद होने से गन्ना किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पुष्पेंद्र, उदयवीर, नरेंद्र सिंह, रामपाल, महावीर, समरपाल, भगतराम, भोपाल, जगशरण, मनवीर, ओमपाल आदि किसानों ने मिल अधिकारियों से तत्काल तौल शुरू कराने की मांग की है।
क्रय केंद्र के प्रभारी कुलविंद्र का कहना है कि गन्ना अधिक होने के कारण क्रय केंद्र पर जगह नहीं बच पाई। इसके कारण तौल बंद कर दिया गया। पर्चियां पीछे से ही नहीं मिल रही, इसलिए किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

पर्चियां न मिलने पर हंगामा
गढ़मुक्तेश्वर। अपेक्षित पर्चियां न मिलने से गुस्साए किसानों ने शुगर मिल के केन ऑफिस पर विरोध प्रदर्शन किया। किसानों का कहना है कि गेहूं की बुआई लगातार लेट हो रही है। साथ ही आवश्यकता पूर्ति के लिए उन्हें कोल्हू-क्रेशरों पर सस्ते रेट में गन्ना बेचना पड़ रहा है।
हापुड़ ब्लाक के गांव छपकौली, भड़ंगपुर, भिम्यारी गढ़ी होशियारपुर, अल्लीपुर एवं सिंभावली ब्लाक के हिम्मतपुर, राजपुर, सिखैड़ा सहित कई गांवों के किसान मंगलवार को सिंभावली शुगर मिल के केन ऑफिस पर जमा हुए। सुरेश शर्मा, उधम सिंह चौहान, भुजेन्द्र, करणसिंह, परमानंद सैनी का कहना था कि शुगर मिल की पर्ची न मिलने से खेतों में खड़े गन्ने की कटाई नहीं हो पा रही है। इसके चलते गेहूं की बुआई लगातार पछेती होती जा रही है। बिल्लू पहलवान, फकीरा, ताहिर हुसैन, प्रेमवीर, कादिर, अस्सन, मंगलसैन, नरेन्द्र, गंगाचरण का कहना था कि आवश्यकता पूर्ति सहित साहूकारों से लिए गए कर्ज को उतारना संभव नहीं हो पा रहा है। मजबूरी में किसान अपना गन्ना कोल्हू-क्रेशरों को सस्ते दाम में बेच रहे हैं। बाद में केन मैनेजर अमानुल्ला खां ने किसी भी भेदभाव के बिना पारदर्शी ढंग में पर्ची भिजवाने का आश्वासन देकर किसानों को लौटा दिया।

सर्वे होने के बाद भी अभी तक नहीं मिली पर्ची : राजपुर निवासी अकरम ने बताया कि उसके खेत में खड़ी गन्ने की फसल किसी बीमारी की चपेट में आकर सूखने लगी थी। मिल के गन्ना विशेषज्ञों ने अक्तूबर में सर्वे कर पेराई सत्र चालू होते ही सबसे पहले पर्ची दिलाने का आश्वासन दिया था। खेत में खड़ी फसल बर्बाद हो रही है लेकिन अभी तक पर्ची नहीं मिली।

नाम-पते की त्रुटि होने से भी परेशानी : समरपाल का कहना था कि उसकी वल्दियत बालकिशन है, लेकिन मिल की पर्चियों में उसकी वल्दियत रामकिशन लिखी हुई है। इसके कारण वह गन्ने की तौल नहीं कर पा रहा है, क्योंकि बैंक खाते में पैसा नहीं पहुंच पाएगा।

मिलों की मनमानी से किसान परेशान
हापुड़। चीनी मिलों द्वारा गन्ने की खरीद में मनमानी किये जाने से गन्ना किसान काफी परेशान हैं। किसानों का कहना है कि मिल पहले क्षेत्र का गन्ना खरीदे उसके बाद बाहर का। इसका मुख्य कारण यह है कि 50 प्रतिशत पेडी गन्ना अभी तक खेतों में खड़ा है। पर्चियां नहीं आने के कारण गन्ने की कटाई नहीं हो पा रही है।
क्षेत्र में ब्रजनाथपुर, सिंभावली, नगलामल और मोदी नगर की चीनी मिल के लिए गन्ने की खरीद की जाती है। आमतौर पर दिसंबर तक गन्ने में चीनी की रिकवरी कम होती है। इसलिए चीनी मिलों के प्रबंधन क्षेत्र के किसानों के लिए गन्ने का इंडेंट रोककर बाहर का गन्ना सस्ती दर पर खरीदवाने लगते हैं। ऐसा ही मामला यहां के ब्रजनाथपुर चीनी मिल क्षेत्र में पकड़ा गया थाकिसान नेता जंगबहादुर सिंह का कहना है कि किसान अपनी हक की लड़ाई लड़ते रहेंगे। मिल जल्द से जल्द पर्चियां जारी कर क्षेत्र के किसानों का गन्ना खरीदे। ऐसे नहीं होने पर किसानों को नुकसान होगा, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पांच दिन बाद भी जारी नहीं हुआ रेट का गजट
पिलखुवा। गन्ना पेराई सत्र चालू होने के एक माह बाद जैसे तैसे गन्ना मूल्य घोषित तो कर दिया गया लेकिन रेट का गजट जारी नहीं हुआ है। नतीजतन किसानों को बिना रेट डाले ही मिलें गन्ने की पर्चियां भेज रही हैं। सोमवार शाम तक गजट आने की उम्मीद थी, लेकिन मंगलवार की दोपहर तक भी गजट जारी नहीं किया गया। ऐसे में मिलों को भुगतान करने के निर्देश भी जारी नहीं हो पाएंगे। भुगतान में देरी होगी। गन्ना किसान राजसुंदर तेवतिया और कांवी के पूर्व प्रधान सिपट्टर सिंह का कहना है कि एक तो सरकार ने रेट देरी से घोषित किया। अब गजट जारी नहीं कर रही है। कई किसान परिवार ऐसे हैं, जोकि गन्ने पर ही आधारित रहते हैं। वो कैसे गुजारा करेंगे।

अटके हैं एक अरब तीस करोड़
पिलखुवा। हापुड़ जिले में दो और गाजियाबाद में एक चीनी मिल है। गन्ना विभाग के मुताबिक तीनों शुगर मिल अब तक 46 लाख कुंतल गन्ने की पेराई कर चुकी हैं। इसमें करीब 18 लाख 40 हजार कुंतल गन्ना अगैती प्रजाति का है और 27 लाख 60 हजार कुंतल गन्ना सामान्य का है। सरकार द्वारा घोषित अगैती प्रजाति का मूल्य 290 और सामान्य का 280 रुपये है। इस हिसाब से 46 लाख कुंतल गन्ने का मूल्य 1 अरब 30 करोड़ 64 लाख रुपये बैठता है। गन्ना रेट के गजट के चलते किसानों की ये धनराशि अटकी हुई है।

सोमवार शाम तक गन्ने रेट का शासनादेश आने की संभावना थी। लेकिन अभी नहीं आया है। शासनादेश आते ही मिलों को लिखित में भुगतान के आदेश जारी कर दिये जाएंगे। गन्ना पर्चियों पर भी तभी रेट डलेगा। ब्रजनाथपुर, सिंभावली और मोदी शुगर मिल अब तक 46 लाख कुंतल से अधिक गन्ना पेर चुकी हैं।
- बीएस चौहान, जिला गन्ना अधिकारी

Spotlight

Most Read

Hapur

अब जिले में नहीं कटेंगे बूढ़े हो चुके फलदार वृक्ष

अब जिले में नहीं कटेंगे बूढ़े हो चुके फलदार वृक्ष

22 जनवरी 2018

Related Videos

VIDEO: इस बंदर और कुत्ते की दोस्ती एक मिसाल है

अक्सर हम सब ने बंदर और कुत्ते की दुश्मनी देखी है लेकिन हापुड़ में बंदर और कुत्ते के बच्चे का प्यार इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है।

15 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper