आखिर कहां गए 22 करोड़ रुपये!

Hapur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
हापुड़। हापुड़ शहर के विकास के लिए उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को अवस्थापना निधि के मिले लगभग 22 करोड़ रुपये का कोई रिकार्ड होने से आवास विकास परिषद के अधिकारियों ने फिलहाल पल्ला झाड़ लिया है। बता दें कि हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण (एचपीडीए) के पूर्व उपाध्यक्ष यू एन ठाकुर ने अपने कार्यकाल में शासन को एक पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि अवस्थापना निधि से हापुड़ के विकास के लिए 22 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को मिले थे, जो पैसा अब तक यहां विकास कार्यों पर खर्च नहीं किया गया है। पत्र की प्रति आवास विकास परिषद के गाजियाबाद में तैनात अधिशासी अभियंता को भी भेजी गयी थी।
उल्लेखनीय है कि अवस्थापना निधि की उक्त रकम 1996 के बाद कई सालों में एकत्र होने के बाद कुछ साल पहले शासन से नगर पालिका परिषद हापुड़, हापुड़ पिलखुवा विकास प्राधिकरण और उत्तर प्रदेश आवास विकास परिषद को 22-22 करोड़ रुपये के रूप में आवंटित की गई थी। नगर पालिका परिषद और एचपीडीए ने अपने-अपने हिस्से में आए 22-22 करोड़ रुपये से विकास कार्य करा दिए, लेकिन आवास विकास परिषद ने 22 करोड़ रुपये से कोई काम नहीं कराया।
प्राधिकरण के तत्कालीन उपाध्यक्ष के पत्र लिखने पर शासन ने आवास विकास परिषद गाजियाबाद के अधिकारियों को इस बाबत आवश्यक निर्देश दिये थे। इस पर आवास विकास परिषद गाजियाबाद की टीम ने यहां आकर सर्वे भी किया।
उल्लेखनीय है कि यहां मेरठ रोड और बुलंदशहर रोड पर आवास विकास परिषद की दो बड़ी कालोनियां हैं, लेकिन तब यह कहकर कार्य आगे नहीं बढ़ सका कि उक्त पैसा आवास विकास परिषद के मुख्यालय से रिलीज होने पर काम होगा। इसी बीच विधान सभा और नगर पालिका परिषद के चुनाव आ गये और चुनाव अधिसूचना जारी होने के कारण यह कार्य नहीं हो सका।
इसी बीच यूएन ठाकुर का तबादला हो गया और नये उपाध्यक्ष श्रीराम आ गए। जब उनके संज्ञान में यह मामला आया तो उन्होंने प्राधिकरण के सहायक अभियंता एसके नागर को अवस्थापना निधि से जारी हुए उक्त पैसे के बारे में जानकारी करने की ड्यूटी लगाई। उन्होंने आवास विकास परिषद में जानकारी की तो वहां के अधिकारियों ने यह कहकर पल्ला झाड़ दिया कि उनके यहां इसका कोई रिकार्ड ही नहीं है।
उल्लेखनीय है कि उक्त पैसा अब सीधे रजिस्ट्री विभाग से आवंटित कर दिया जाता है, इसीलिए उन्होंने रजिस्ट्री विभाग में जानकारी की तो पता चला कि उनके यहां सिर्फ 5 साल का रिकार्ड है, जिसके अनुसार प्राधिकरण और नगर पालिका के मुकाबले सिर्फ 10 प्रतिशत धनराशि आवास विकास परिषद को गई है, हो सकता है कि इससे पहले का पैसा हो। फिलहाल आवास विकास परिषद के अधिकारियों की लापरवाही से शहर के विकास में 22 करोड़ रुपये लगने से लटक गया है। इस मामले में प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्रीराम का कहना है कि वह इस संबंध में आवास विकास परिषद के अधिकारियों को लखनऊ पत्र लिखेंगे ताकि उक्त धनराशि शहर के विकास में लग सके।

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