यहां दिवाली पर होती है काली मां की पूजा

Hapur Updated Tue, 13 Nov 2012 12:00 PM IST
गढ़मुक्तेश्वर। तीर्थनगरी के पास एक ऐसा गांव भी है, जहां दीपावली पर काली मां की पूजा की जाती है और पितरों का तर्पण किया जाता है।
ब्रजघाट से मात्र 500 मीटर दूर गंगा के बीच टापू पर बसे गंगा नगर में करीब 100 परिवार रहते है। बंगाली समाज के ये लोग अपने आप में खुश हैं। दीपावली का त्योहार पूरे हिंदुस्तान में लक्ष्मी पूजन और भगवान राम के अयोध्या लौटने पर मनाया जाता है, परंतु इस गांव में सब कुछ अलग है। गांव में रहने वाले पंचानन का कहना है कि हमारे गांव में लक्ष्मी जी की पूजा-अर्चना नहीं की जाती। वह देवी काली मां की पूजा-अर्चना करते हैं। दीपावली के दिन शाम को ग्रामीण एक जगह एकत्र होंगे, जहां अग्नि प्रज्जवलित कर काली मां की तस्वीर रखी जाएगी। इसके बाद सभी पूरी रात पूजा-अर्चना करेंगे। उत्तम बताता है कि पूरी रात नाच गाना होता है, जिसमें दो पक्ष आमने-सामने होते हैं और सुबह जो भी जीतता है उसे प्रथम घोषित किया जाता है। केशव मंडल का कहना है कि हमारे यहां कार्तिक मास की चतुर्दशी को मृतकों की आत्मशांति के लिए दीपदान नहीं किया जाता। दीपावली पर जलने वाले दीपों से उनकी आत्मशांति की जाती है। गांव में विद्युत की कोई व्यवस्था नहीं है। स्वास्थ्य सेवा और शिक्षा भी यहां से कोसों दूर है। इन्हें आज तक मतदाता का अधिकार भी नहीं मिल पाया है।

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