...ताकि आपकी दीपावली रहे शुभ

Hapur Updated Mon, 05 Nov 2012 12:00 PM IST
हापुड़/गढ़मुक्तेश्वर। उपजिलाधिकारी ने रविवार को पटाखे बनाने वाली फैक्ट्रियों और दुकानों का औचक निरीक्षण किया और जरूरी निर्देश दिए। साथ ही यह स्पष्ट किया कि पटाखों की दुकान पर बच्चे और विकलांग नहीं बैठेंगे।
रविवार को एसडीएम (सदर) जयशंकर मिश्रा, लेखपाल (सदर) साबिर राणा तहसील कर्मियों के साथ मोदीनगर रोड स्थित अतुल और पक्का बाग स्थित पवन कुमार की दुकानों पर पहुंचे और वहां पटाखों की जांच की। इसके बाद मोहम्मद मुस्लीन, मुस्तकीम, केसर अहमद की पटाखा बनाने की फैक्ट्रियों पर टीम पहुंची और वहां जांच की गई। एसडीएम ने बताया कि सभी स्थानों पर आग बुझाने के लिए इस्तेमाल होने वाले अग्निशमन यंत्र सही हालत में मिले। साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि क्षमता से अधिक आवाज वाले पटाखों का निर्माण किसी भी हाल में न किया जाए। वह लोग अपने निश्चित स्थान पर ही पटाखों का निर्माण करें और स्टॉक आबादी में न रखें। सभी लाइसेंस धारकों के लाइसेंसों की जांच कर उनकी वैधता भी देखी गई। यह भी निर्देश दिए गए कि पटाखों की दुकानों पर बच्चे और विकलांगों को नहीं बैठने दिया जाए।
एसडीएम ने बताया कि रामलीला मैदान में लगने वाली पटाखे की दुकानों के बीच कम से कम तीन मीटर की दूरी होगी। अग्निशमन अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जो लोग पटाखों की बिक्री के लिए अस्थाई लाइसेंस लेंगे उन्हें नियमों और आग लगने की स्थिति में तुरंत क्या-क्या करना चाहिए इसके बारे में विस्तार से बताया जाएगा। रामलीला मैदान में दमकल गाड़ी मौजूद रहें। प्रतिबंधित पटाखों की बिक्री किसी भी हाल में नहीं होने दी जाएगी।

इन नियमों का करना होगा पालन
प्रतिबंधित सुतली बम आदि की बिक्री नहीं होगी
125 डीवी (सी) से अधिक ध्वनि तीव्रता वाले पटाखे नहीं बिकेंगे
आतिशबाजी की दुकानों पर अन्य सामान की बिक्री नहीं होगी
दो दुकानों के मध्य तीन मीटर की दूरी रहेगी
दुकान पर पानी भरा ड्रम, बालू और कंबल रखना होगा
दुकान पर ज्वलनशील पदार्थ, चिराग, मोमबत्ती, कटा हुआ बिजली तार नहीं होगा


सक्रिय हुए आतिशबाजी के अवैध कारोबारी
अनहोनी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए एक ओर जहां पुलिस, प्रशासन और अग्निशमन विभाग आतिशबाजी का अवैध धंधा करने वालों पर शिकंजा कसने में जुटे हैं, वहीं पटाखे के अवैध कारोबारी बाज नहीं आ रहे। एक सप्ताह पहले नैनापुर के सुलतान सिंह को 4 बोरा सुतली बम एवं भारी मात्रा में बारूद के साथ गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। यही नहीं, गढ़ सहित क्षेत्र के कई गांवों में बेहद संकरी गलियों और आबादी के बीच अवैध रूप से आतिशबाजी बनाने का गोरखधंधा फल फूल रहा है। स्थानीय पुलिस-प्रशासन ने अब तक आतिशबाजी बिक्री के लाइसेंस जारी नहीं किए हैं, लेकिन लोग दिल्ली सहित विभिन्न स्थानों से अवैध रूप में माल खरीदकर दीवाली पर बिक्री के लिए उसका स्टॉक कर रहे हैं। स्टॉक वाले स्थानों पर आग से बचाव का कोई भी उपाय नहीं है। अग्निशमन उपकेंद्र प्रभारी डीके शर्मा ने बताया कि क्षेत्र में भैना, सिंभावली एवं बहादुरगढ़ में आतिशबाजी बनाने के मात्र 3 लाइसेंस जारी हैं, जबकि गढ़ में किसी के पास लाइसेंस नहीं है। दीवाली पर आतिशबाजी बेचने वालों को तहसील प्रशासन से लाइसेंस बनवाना होगा। बिना लाइसेंस आतिशबाजी बेचने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने बताया कि गढ़ के बारादरी मैदान में पटाखों की बिक्री होगी और क्षेत्र में अन्य जगह भी खुले स्थानों पर आबादी के बाहर ही पटाखे बिकेंगे। बारादरी मैदान में सुरक्षा के लिहाज से दमकल गाड़ी हर समय मौजूद रहेगी। अग्निशमन विभाग की टीम समूचे क्षेत्र में गश्त कर स्थिति पर नजर रखेगी।


ट्रेनों में भी विशेष चौकसी
गढ़मुक्तेश्वर रेलवे स्टेशन के अधीक्षक महेश चंद त्यागी ने बताया कि दीपावली हर किसी के लिए शुभ रहे, इसके लिए रेलवे पूरी तरह चौकसी बरत रहा है। ट्रेनों के जरिए पटाखे लाने पर पूरी तरह रोक है। स्टेशन पर भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है। जीआरपी इंचार्ज रामबाबू का कहना है कि ट्रेनों से उतरने चढ़ने वालों पर विशेष नजर रखी जा रही है, जबकि ट्रेनों के अंदर एस्कार्ट पार्टी द्वारा आतिशबाजी लाने ले जाने वालों की धरपकड़ के लिए सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।


...तो इस बार भी अंधेरे में मनेगी दीवाली
शहर की तर्ज पर बिल देने के बाद भी गढ़-ब्रजघाट में अटपटे शेड्यूल पर बिजली मिल रही है। ऐसे में क्षेत्रवासियों को हर बार दीवाली पर लक्ष्मी पूजन अंधेरे में करना पड़ता है। मौजूदा शेड्यूल के तहत रात 10 बजे से सप्लाई आती है। अवर अभियंता महबूब अली कहते हैं कि फिलहाल पावर कारपोरेशन ने शेड्यूल में कोई बदलाव नहीं किया है। पालिका की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था भी बुरी तरह लड़खड़ाई हुई है। अधिकांश खंभों के मरकरी एवं सोडियम बल्ब गायब हो चुके हैं, जिनके स्थान पर पालिका कर्मी बल्ब टांग रहे हैं, जिनमें ज्यादातर को दिन ढलने से पहले ही बच्चे कंकड़-पत्थर फेंक कर फोड़ डालते हैं। पुराना पेमेंट न मिलने पर अधिकांश ठेकेदार नया काम करने से कतरा रहे हैं। चेयरमैन संगीता पुरुषोत्तम का कहना है कि धनाभाव के चलते मरकरी एवं सोडियम बल्ब खरीदने संभव नहीं हो पा रहे हैं, हालांकि गली-मोहल्लों में लगातार बल्ब लगवाए जा रहे हैं।

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