तंग गलियों में बन रही आतिशबाजी

Hapur Updated Tue, 30 Oct 2012 12:00 PM IST
गढ़मुक्तेश्वर। दीवाली पर बिक्री के मद्देनजर संकरी गलियों में बनाई जा रही आतिशबाजी थोड़ी सी लापरवाही पर बड़ी अनहोनी का कारण बन सकती है। तीन साल पहले हुए अग्निकांड के बाद भी पुलिस-प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा है। 9 नवंबर 2009 को दीवाली के दिन आतिशबाजी में लगी आग से गढ़-चौपला पर भीषण अग्निकांड हुआ था और आग की चपेट में आने से व्यापारी के पुत्र यश एवं रिक्शाचालक शिवा की मौत हो गई थी। कई लोग झुलसे भी थे। दीपावली के लिए नगर सहित देहात में कई स्थानों पर आबादी के बीच बेहद संकरी गलियों में आतिशबाजी तैयार की करने का धंधा जोरों पर चल रहा है। इन स्थानों पर दमकल गाड़ियों का पहुंचना बहुत मुश्किल है।
अग्नि शमन विभाग, पुलिस एवं एसडीएम की संस्तुति के बाद ही आतिशबाजी बनाने का लाइसेंस जारी किया जाता है। संकरी गलियों में आतिशबाजी नहीं बन पाएगी। अवैध रूप में आतिशबाजी बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई होगी। लाइसेंस धारकों की चेकिंग भी होगी। दिवाली पर आबादी के बाहर खुली जगह में केवल लाइसेंसधारक ही आतिशबाजी बेच सकेंगे।
चक्रपाणि यादव, जिलाधिकारी

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