अब इलाज भी महंगा

Hapur Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
पिलखुवा। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और खाद्य पदार्थों में दिनोंदिन बढ़ती महंगाई की मार झेल रहे आम आदमी पर अब इलाज की महंगाई की मार भी पड़ गई है। एक ओर जहां अक्तूबर माह से डाक्टरों ने अपनी फीस बढ़ा दी है, वहीं, दवाइयां भी महंगी हो गई हैं। जानकारी के मुताबिक निजी चिकित्सकों ने अपने परामर्श शुल्क में करीब 50 फीसदी की बढ़ोत्तरी कर दी है। उधर, निजी चिकित्सकों की फीस बढ़ने का सीधा फायदा झोलाछाप डाक्टरों को हो रहा है। गरीब मरीज निजी डाक्टरों की जगह अब झोलाछाप डाक्टरों से इलाज कराने पहुंच रहे हैं।
बाल रोग विशेषज्ञ डा. तेजवीर सिंह सोम की फीस अगस्त 2012 तक 100 रुपये थी, जिसे उन्होंने सितंबर में बढ़कर 150 रुपये कर दिया। इस संबंध में उन्होंने बताया कि महंगाई के हिसाब से वह खुद अपनी फीस तय करते हैं। वहीं, शहर में एक हेल्थ केयर चलाने वाले डा. अनिल अग्रवाल का परामर्श शुल्क पिछले महीने तक 30 रुपये था, जिसे बढ़ाकर उन्होंने अक्तूबर से 50 रुपये कर दिया है। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है। हमारी फीस पहले भी सबसे कम थी लेकिन अब महंगाई के कारण बढ़ाकर 50 रुपये करनी पड़ी है। वहीं, रेलवे रोड स्थित एक नर्सिंग होम के डाक्टर उमेश का कहना है कि खाद्य पदार्थों से लेकर कपड़ा, पेट्रोल, डीजल, गैस, इन्फ्रास्ट्रक्चर सब पर महंगाई आ गई है। ऐसे में सितंबर से परामर्श शुल्क 50 रुपये से बढ़ाकर 70 रुपये किया गया है। वहीं, आईएमए के अध्यक्ष डा. बीबी सिंह ने भी अपना परामर्श शुल्क अगस्त से 50 रुपये से बढ़ाकर 100 रुपये कर दिया है। इनका कहना है कि आईएमए के कहने से फीस नहीं बढ़ती। सभी डाक्टर अपनी डिग्री और खर्च के हिसाब से अपना परामर्श और टेस्टिंग फीस तय करते हैं।

झोलाछाप डाक्टरों की चांदी
पिलखुवा। प्राइवेट चिकित्सकों की महंगी फीस से मजबूर लोग नगर के झोलाछाप डाक्टरों की शरण में पहुंच रहे हैं। नगर में आधा दर्जन से अधिक झोलाछाप चिकित्सक ऐसे हैं, जो सौ से अधिक रोगियों की ओपीडी कर रहे हैैं।

सरकार सुविधा दे तो नहीं जाना पड़े निजी अस्पताल
एक निजी अस्पताल में इलाज कराने पहुंचे जनक सिंह शिशौदिया ने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर सरकार करोड़ों रुपये बहा रही है, लेकिन आम जनता को कोई खास लाभ नहीं मिल रहा है। परिवार में कोई भी बीमार होता है तो प्राइवेट डाक्टर से ही इलाज कराना पड़ता है। वहीं, तीमारदार वीरेश तोमर ने कहा कि सरकारी अस्पताल में दवाओं का अकाल है और डाक्टरों का टोटा है। सरकारी अस्पताल में जांच की भी अच्छी सुविधा नहीं है। यदि सरकारी अस्पताल में मरीजों का अच्छा इलाज मिले तो निजी चिकित्सकों की लूट से आम आदमी बच सकता है।

टेस्ट भी हुए महंगे
एक्सरे की जांच 100 रुपये से बढ़कर 130 रुपये
स्टोन की जांच का अल्ट्रासाउंड 300 से बढ़ाकर 350 रुपये
गर्भवती महिला का अल्ट्रासाउंड 250 से 300
रक्त की सभी जांचों पर बीस से तीस की बढ़ोत्तरी

छह माह में 15 फीसदी महंगी हुई दवाएं
पिलखुवा। बीते छह माह के भीतर दवाओं पर करीब 10 से 15 फीसदी की महंगाई आ गयी है। दवाइयों पर आई महंगाई से मरीजों के साथ तीमारदार भी कराह उठे हैं। बदलते मौसम में वायरल, खांसी, जुकाम और नजला जैसी बीमारियां पैर पसार रही हैं। वायरल बुखार से कई मौतें भी हो चुकी हैं। बढ़ती बीमारियों पर महंगी दवाएं कोढ़ में खाज का काम कर रही हैं। दवाओं के थोक विक्रेता संजीव का कहना है कि सामान्य दवाओं में 10 से 15 और बुखार, डायबिटीज, खांसी, जुकाम, खाज खुजली, थायरायड और हृदय रोग से संबंधित दवाओं में 20 से 30 फीसदी की वृद्धि हुई है। ताकत का पाउडर भी मरीजों का पसीना छुड़ा रहा है।


दवाओं पर वर्ष में 3 से 4 प्रतिशत की वृद्धि तो हो ही जाती है। वहीं, साल्ट पर महंगाई आने या एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के कारण दवाओं पर ज्यादा महंगाई आती है। थोक रेट पर अपने मुनाफे को जोड़कर ही रिटेल में दवाएं बेचते हैं।
- अमित कुमार गोयल, अध्यक्ष केमिस्ट एसोसिएशन

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