तीन बेटों पर मां भारी मंदिर में रहने को मजबूर

Hapur Updated Sun, 30 Sep 2012 12:00 PM IST
गढ़मुक्तेश्वर। जिगर के टुकड़ों की बेरुखी का दंश झेल रही वृद्धा जिंदगी के आखिरी पड़ाव में दर-दर की ठोकरें खाती फिर रही है। गांव भद्स्याना की 95 वर्षीय विद्या देवी के पति छोटे लाल की करीब 28 साल पहले बीमारी से मौत हो गई थी। उनके नाम की 36 बीघा कृषि भूमि में विधवा विद्या देवी एवं तीन बेटों गिरीश, प्रमोद एवं ब्रिजेश को चौथाई का हिस्सा मिला था। मंझला बेटा प्रमोद मां को घर ले आया, लेकिन चंद दिनों बाद ही जब गिरीश एवं ब्रिजेश ने मां के हिस्से वाली भूमि में खड़ी फसल काटकर करीब 9 वर्ष पहले उस पर जबरन कब्जा जमा लिया तो प्रमोद ने भी मां को घर से निकाल दिया। विधवा की गुहार पर वर्ष 2006 को गांव में सर्वसमाज की पंचायत हुई, जिसमें एसडीएम की मौजूदगी में ग्रामीणों ने बड़े एवं छोटे बेटे को मां की गुजर बसर के लिए प्रतिमाह 2 हजार रुपये का गुजारा भत्ता देने का फरमान सुनाया।
क्या कहते हैं पुत्रः बड़े पुत्र ने कई वर्षों से संबंध खत्म किए हुए हैं। उससे बात नहीं हो पाई। छोटे पुत्र ब्रिजेश का कहना है कि मां दरवाजा खोलकर बाहर बैठ जाती थी। वह खुद ही घर छोड़कर मंदिर में चली गई।

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