गैस सिलेंडर के झमेले में मिड-डे-मील पर संकट!

Hapur Updated Sat, 22 Sep 2012 12:00 PM IST
हापुड़। केंद्र सरकार ने रसोई गैस का कोटा निर्धारित करके जहां आम लोगों की नाराजगी मोल ली, वहीं मिड-डे-मील पर संकट के बादल खड़े कर दिए हैं। जनपद के विद्यालयों को एनजीओ द्वारा दिया जाने वाला मिड-डे-मील केंद्र सरकार के फैसले से खतरे में है। सिलेंडर की महंगाई से आवासीय विद्यालयों में गरीब बच्चों के लिए भोजन का दायित्व उठाने वाले ठेकेदार भी जिम्मेदारी से हाथ समेटने की तैयारी कर रहे हैं।
दरअसल परिषदीय विद्यालयों में मिड-डे-मील के लिए सरकारी तौर पर प्रति छात्र प्राइमरी में 3.11 रुपये और जूनियर में 4.65 रुपये निर्धारित है। यानि कि इतनी धनराशि में एनजीओ को गैस सिलेंडर से लेकर हरी सब्जी, दाल, दूध, भाड़ा आदि की व्यवस्था करनी होती है। औसतन 25 बच्चों के भोजन के लिए एक माह में एक सिलेंडर खर्च हो जाता है। ऐसे में नई व्यवस्था लागू होने पर छह सिलेंडर एनजीओ को दोगुने दामों में खरीदने होंगे।
शिक्षा विभाग के अनुसार जिले में 400 प्राइमरी विद्यालय, 209 जूनियर हाईस्कूल के साथ करीब सात सौ विद्यालय हैं। इनमें करीब 45 हजार बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं। विद्यालयों में पढ़ने वाले इन बच्चों को दोपहर में भोजन दिए जाने के लिए जनपद में पांच एनजीओ कार्यरत है। जबकि 88 ग्राम पंचायतों में प्रधानों द्वारा मिड-डे-मील बांटा जाता है।

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