‘ हमें जीने की कला सिखाती है रामायण’

Hapur Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
पिलखुवा। कथा वाचक तेजानंद महाराज ने कहा कि रामकथा ही जीवन का आधार है और रामायण हमें जीने की कला सिखाती है। इंसान को रामायण में दी गई शिक्षा को अपने जीवन में उतारना चाहिए। नगर के गुलरू बाबा मंदिर में चल रही श्रीरामकथा में बुधवार को कथा श्रवण के लिए काफी संख्या में भक्त पहुंचे। इस अवसर प्रभु के भजनों पर श्रद्धालुओं ने जमकर ठुमके लगाए।
व्यास ने कहा कि भगवान श्रीराम को आदर्श मानने वाला प्राणी कभी कोई गलत कर्म नहीं कर सकता। इंसान को भगवान का भजन नियमित करते हुए सद्कर्म करने चाहिये। इस मौके पर सजी भगवान राम और सीता की झांकी का भक्तों ने पूजन किया। भगवान के भजनों पर भक्त जमकर झूमे। कथा के बाद हवन में भक्तों ने आहुति डाली। समापन पर प्रसाद का वितरण किया गया। कथा में प्रवीण कुमार, मिथलेश अग्रवाल, सौरभ गुप्ता, आयुषी, तृप्ति, स्पर्श, यश, प्रदीप कुमार, निर्मला देवी, डॉ. उमेश, विनय, रीचा, तरु, शिप्रा, भनु आदि श्रद्धालु मौजूद रहे।


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