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रेल हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन?

Hapur Updated Tue, 21 Aug 2012 12:00 PM IST
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रेलवे ट्रैक पर छह किलोमीटर में डाला जा रहा कूड़ा-करकट


पिलखुवा। नगरपालिका प्रशासन की लापरवाही किसी दिन हजारों लोगों की जिंदगी खतरे में डाल सकती है। पालिका की उदासीनता के कारण रेलवे ट्रैक के अगल-बगल रहने वाले पटरियों पर ही कूड़ा फेंक देते हैं। इससे ट्रैक गलने लगा है, जो किसी भी दिन हादसे की वजह बन सकता है। रेलवे के नोटिस के बाद भी पालिका अफसर हरकत में नहीं आ रहे।
नगर के बीच से दिल्ली लखनऊ रेल मार्ग गुजर रहा है। अप और डाउन ट्रैक पर पिलखुवा से रोजाना 98 ट्रेनों का संचालन होता हैं। रेलवे ने एहतियातन चंडी मंदिर से लेकर छिजारसी गांव तक करीब छह किलोमीटर क्षेत्र में ट्रैक के किनारे लोहे की फेंसिंग लगवाई थी। इसको नशेड़ी या ट्रैक के आसपास रह रहे लोग उखाड़ ले गये। फेंसिंग उखड़ने के बाद लोग घरों का कचरा ट्रैक पर ही डालने लगे हैं।
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि कई वर्षों से लगातार ट्रैक पर कचरा डालने के कारण पटरी गलने लगी है। जिस पर छह माह पहले रेलवे ने नगरपालिका पिलखुवा के ईओ को नोटिस जारी कर कूड़ा उठवाने और कूड़े के डंपिंग को बंद कराने की मांग की थी लेकिन ईओ ने इस गंभीर मामले पर ध्यान नहीं दिया। ट्रैक पर कचरा होने के कारण की मैन ट्रैक पर चाबी चेक नहीं कर पा रहे हैं। पटरी गलने से किसी भी दिन हादसा हो सकता है।

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