किसानों को मालूम नहीं बैंक ने कर दिया बीमा

Hapur Updated Tue, 10 Jul 2012 12:00 PM IST

गढ़मुक्तेश्वर। बैंक ने बिना बताए किसानों का फसली बीमा कर दिया और उनके खाते से हजारों की रकम भी काट ली। खाता चेक करने पर जब किसानों को जानकारी हुई तो वे बिफर पड़। सोमवार को किसानों ने बैंक पर मनमानी का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। बैंक प्रबंधक का घेराव कर पीड़ितों ने रकम वापस करने की मांग की। उच्चाधिकारियों के आश्वासन पर शांत हुए किसानों ने रकम वापस न मिलने पर कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
सोमवार सुबह 11 बजे गांव पावटी के किसान भारतीय स्टेट बैंक की शाखा पहुंचे। किसानों ने बैंक पर मनमानी और उत्पीड़न किसानों के उत्पीड़न का आरोप लगा उन्होंने जमकर हंगामा किया। ग्राम प्रधान अनुराज का कहना है कि किसान क्रेडिट कार्ड द्वारा किसानों ने बैंक से लोन लिया था, जिस पर उन्हें 7 प्रतिशत की ब्याज दर से भुगतान करने की बात कही गई थी। लेकिन पैसा अदा करने के बाद हिसाब लगाया गया तो ब्याज 14 प्रतिशत से भी अधिक का बैठ रहा है। जसबीर सिंह ने बताया कि अधिक पैसा जमा कराने का कारण पूछने पर बैंक ने फसली बीमा और फसल निरीक्षण चार्ज की रकम काटने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।
किसानों का आरोप है कि बिना पूछे बैंक ने फसल का बीमा कर दिया। बीमे की जानकारी न होने के कारण पिछले वर्ष कई किसानों की फसल बर्बाद होने के बाद भी उन्हें कोई क्लेम नहीं मिल पाया। बैंक में हंगामे की सूचना पर वरिष्ठ शाखा प्रबंधक हापुड़ विनय कुमार अग्रवाल मौके पर पहुंच गए जिन्होंने भविष्य में किसानों की मर्जी के बिना फसली बीमा न करने के निर्देश दिए। रकम वापसी की मांग को उन्होंने भी इंकार कर दिया, जिसके बाद किसान कोर्ट में लड़ाई लड़ने की चेतावनी दे लौट आए।
किन-किन के पैसे जमा कराए
ग्राम प्रधान के अनुसार गांव में 100 से अधिक किसान केसीसी धारक हैं। लोन जमा करने के बाद हिसाब लगाया तो निर्धारित ब्याज से अधिक राशि जमा कराने पर बैंक से पूछताछ की गई तो गड़बड़झाले का खुलासा हुआ। उन्होंने बताया कि जसबीर सिंह, रामधन सिंह, राजेन्द्र सिंह, रिछपाल सिंह, नेमपाल सिंह, ऐशवीर सिंह आदि से लोन के अनुसार हजारों की राशि जमा करा ली गई।
फसल बर्बाद हुई, लेकिन कुछ नहीं मिला ःजसबीर सिंह का कहना है कि पिछले वर्ष उसकी पांच बीघा उड़द की फसल बीमारी लगने से बर्बाद हो गई थी। उससे बीमे का प्रीमियम जमा कराया गया, लेकिन उसकी फसल की बीमा भी है, इसके बारे में उसे कोई जानकारी न होने के कारण उसे कोई क्लेम नहीं मिल पाया।


क्या कहते हैं शाखा प्रबंधक
एनके जैन का कहना है कि बैंक द्वारा बनाए गए नियमों के तहत किसानों को लोन दिया गया है और उनका फसली बीमा हुआ है। किसानों को बिना बताए बीमा करने की बात पर वह चुप्पी साध गए।
गलती मानी, कार्रवाई पर चुप्पी साधी
चीफ मैनेजर विनय अग्रवाल ने भी माना कि किसानों को बताए बिना उनकी फसल का बीमा करना गलत है। लेकिन बैंक प्रबंधक द्वारा की गई मनमानी पर कार्रवाई को लेकर वह भी चुप हो गए।

क्या है बीमे का ‘खेल’
स्टेट बैंक के गढ़ शाखा प्रबंधक एनके जैन के अनुसार दैवीय आपदा में फसल बर्बाद होने पर किसानों को लाभ देने के मकसद से फसली बीमा किया जाता है। जिसके तहत क्रेडिट कार्ड से लोन लेने वाले प्रत्येक किसान का अनिवार्य रूप से फसली बीमा किया जाता है। बीमे के तहत 15 रुपये प्रति हजार प्रतिवर्ष का प्रीमियम तथा 5 सौ रुपये प्रति लाख प्रतिवर्ष का निरीक्षण शुल्क जमा कराया जाता है। सूखा तथा बाढ़ ग्रस्त इलाका घोषित होने पर पीड़ित को बीमे का लाभ मिलता है। प्रबंधक के अनुसार बैंक में 500 से अधिक केसीसी बने हुए हैं जिनमें से अधिकतर का फसली बीमा है। किसानों का आरोप है कि बिना उन्हें जानकारी दिए बीमे का ‘खेल’ किया गया।


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